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दीपावली पर अक्षय-धन-प्राप्ति हेतु मन्त्र एवं दीप-दान विधी ।। To Know Mantra for Akshaya-Dhana-Prapti and Deep Daan viddhi On Dipawali.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,


मित्रों, आज के समय में अपनी बुद्धि एवं परिश्रम से सबको धन की प्राप्ति तो हो ही जाती है । साथ ही सबको दुनिया का हर ऐशो-आराम, बैंक बैलेंस आदि भी चाहिए होता है । लेकिन सिर्फ ऐसा चाहने से कुछ नहीं होगा, इसके लिये कुछ सार्थक प्रयास करना पड़ता है तभी ये सब सम्भव होता है । परन्तु सभी प्रयासों के बाद भी व्यक्ति अपने जीवन में बैंक बैलेन्स (बचत) नहीं कर पाता अर्थात् खर्च होने वाली लक्ष्मी तो सबके पास है लगभग, परन्तु अक्षय-धन बहुत कम लोगों के पास होता है ।।

हमारा संस्कृत साहित्य कहता है, कि - भाग्यं फलति सर्वदा न विद्या न च पौरुषम् । अर्थात् विद्या और परिश्रम भी जब न फले वहां मनुष्य का भाग्य फलित होता है । अथवा परिश्रम भी कभी-कभी बेकार हो जाता है, बड़े-बड़े विद्वान् भी जब कुछ नहीं कर पाते तब भाग्य फलित होता है फिर तो सबकुछ फलित हो जाता है ।।

अगर आप चाहते हैं कि इस दीवाली माता लक्ष्मी की विशेष कृपा आपको प्राप्त हो तो इसके लिये इस दीवाली ये आसन से उपाय करें । विधि-विधान से इन उपायों को करने से अत्यंत दरिद्र भी राजा बन जाता है तथा अक्षय-धन की प्राप्ति होती है ।।

मित्रों, जीवन में धन की आवश्यकता आज के समय बढ़ती ही जा रही है और सभी के साथ ऐसा ही है । अगर जीवन में धन न हो तो व्यक्ति के जीवन में खुशियां भी बेईमानी जैसी लगती है और यदि बैंक-बैलेन्स हो तो हर दिन एक नई खुशी होती है ।।

हमारे तंत्र शास्त्र के अंतर्गत कई ऐसे उपाय बताए गए हैं जिन्हें करने से धन की चाह पूरी हो जाती है और जीवन में फिर कभी धन की कमी नहीं होती । तो आइये जानते हैं, कि उपाय करना क्या है ? 

अक्षय-धन-प्राप्ति हेतु सर्वप्रथम धन की अधिष्ठात्री देवी माँ लक्ष्मी की प्रतिमा जिसमें कमल के फुल पर माँ धन की वर्षा करती हुई बैठी हों स्थापित करें । जितना भी ज्ञान हो उसके अनुसार ही परन्तु भावपूर्ण तरीके से माँ की पूजा करें । फिर इस मन्त्र से भावपूर्ण तरीके से प्रार्थना करें:-

हे मां लक्ष्मी, शरण हम तुम्हारी ।
पूरण करो अब माता कामना हमारी ।।
धन की अधिष्ठात्री, जीवन-सुख-दात्री ।
सुनो-सुनो अम्बे सत्-गुरु की पुकार ।
शम्भु की पुकार, मां कामाक्षी की पुकार ।।
तुम्हें विष्णु की आन, अब मत करो मान ।
आश लगाकर हम देते हैं दीप-दान ।।

मन्त्र- “ॐ नमः विष्णु-प्रियायै’’ । “ॐ नमः कामाक्ष्यै’’ । “ह्रीं ह्रीं ह्रीं क्रीं क्रीं क्रीं श्रीं श्रीं श्रीं फट् स्वाहा ।।”
विधि ये है, कि - ‘‘दीपावली’’ की शाम को पाँच मिट्टी के दीपकों में गाय का घी डालकर देशी रुई की बत्ती जलायें । माँ लक्ष्मी को दीप-दान करें परन्तु ध्यान माँ कामाक्षी का करें और उपरोक्त प्रार्थना करें ।।

मुख्य मन्त्र जो उपर दिया गया है, उसका १०८ बार जप करें । जो दीपक जलायें, उसमें इतना घी डालें की सारी रात जल सके । घर के सभी लोग रात भर जागरण करें तथा स्वयं भी जागता रहे । जब भी नींद आने लगे तो मन्त्र का जप करे । प्रातःकाल दीपों के बुझ जाने के बाद उन्हें नए वस्त्र में बाँधकर अपने घर के तिजोरी में बश रख दें ।।

 ऐसा करने से माँ लक्ष्मी का उसमें वास हो जाएगा और अक्षय-धन-की-प्राप्ति निश्चित ही होगी । प्रतिदिन सन्ध्या समय दीप जलाए और पाँच बार उक्त मन्त्र का जप करे, ऐसा कम-से-कम इकतालीस दिन तक करें ।।

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