Shiv Stotram

अथ आर्तिहरस्तोत्रम् ।। Artihara Stotram.

आर्त = दुःख ! हर प्रकार के दु:खों का अन्त करने वाला भगवान शिव का ये आर्तिहर स्तोत्र जो एक दु:खियारे गृहस्थ के लिये रामबाण औषधि के समान कार्य करता है । आपके जीवन के किसी भी तरह के दुःख, पीड़ा, कष्ट आदि अथवा किसी भी तरह के कुचक्र को तोड़कर जीवन के सभी सुखों को देने वाले इस स्तोत्र का आइये पाठ करें ।।

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,


मित्रों, इसकी विधि ये है, कि आप किसी भी सोमवार को भगवान शिव का यथाविधि पूजन करने के उपरान्त । अथवा किसी भी शिव मन्दिर में जाकर अर्चन-वन्दन-पूजन करके फिर इस स्तोत्र का पाठ करें । ग्यारह सोमवार में ही इसका असर दिख जाता है और आपके सारे कष्ट स्वतः दूर होने लगते हैं ।।

अथ आर्तिहरस्तोत्रम् ।। Artihara Stotram.

श्री शम्भो मयि करुणाशिशिरां दृष्टिं दिशन् सुधावृष्टिम्।
सन्तापमपाकुरुमे मन्तापरमेश तव दयायाः स्याम् ॥१॥

अवसीदामि यदार्तिभिरनुगुणमिदमोकसोंहसां खलु मे।
तव सन्नवसीदामि यदन्तकशासन नतत्तवानुगुणम् ॥२॥

देव स्मरन्ति तव येतेषां स्मरतोऽपि नार्तिरितिकीर्तिम्।
कलयसि शिव पाहीतिक्रन्दन् सीदाम्यहं किमुचितमिदम् ॥३॥

आदिश्याघकृतौ मामन्तर्यामिन्नसावघात्मेति।
आर्तिषुमज्जयसे मां किम्ब्रूयां तवकृपैकपात्रमहम् ॥४॥

मन्दाग्र्णीरहं तव मयि करुणां घटयितुं विबोनालम्।
आकृष्टुं तान्तु बलादलमिह मद्दैन्यमिति समाश्वसिति ॥५॥

त्वं सर्वज्ञोऽहं पुनरज्ञोऽनीशोहमीश्वरत्वमसि।
त्वं मयि दोषान् गणयसि किं कथये तुदति किं दया नत्वाम् ॥६॥

आश्रितमार्ततरं मामुपेक्षसे किमिति शिव न किं दयसे।
श्रितगोप्ता दीनार्तिहृदिति खलु शंसन्ति जगति सन्तस्त्वाम् ॥७॥

प्रहराहरेतिवादी फणितमदाख्य इति पालितो भवता।
शिव पाहीति वदोऽहं शृतो न किं क्वां कथं न पाल्यस्ते ॥८॥

शरणं व्रज शिवमार्तीस्सतव हरेदिति सतां गिराऽहम् त्वाम्।
शरणं गतोऽस्मि पालय खलमपि तेष्वीश पक्षपातान्माम् ॥९॥

।। इति श्री श्रीधरवेङ्कटेशार्यकृतिषु आर्तिहरस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।।

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