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सर्वोत्तम श्रेणी का व्यापारी अथवा सफल व्यापारी बुध ही बनाता है, पर कैसे ? आइये जानें ।।



सर्वोत्तम श्रेणी का व्यापारी अथवा सफल व्यापारी बुध ही बनाता है, पर कैसे ? आइये जानें ।। Mercury creates successful businessman, but how? Lets.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, एक बार चंद्रमा ने देवगुरु बृहस्पति की पत्नी तारा का अपहरण कर लिया । गर्भवती होने पर देवी तारा ने बृहस्पति के डर से गर्भ को इषीकास्तम्ब में विसर्जित कर दिया । जिससे देदीप्यमान एवं एक अत्यन्त सुंदर बालक बुध का जन्म हुआ । चंद्रमा एवं बृहस्पति दोनों ने ही उसे अपना पुत्र माना तथा जातकर्म संस्कार करना चाहा ।। बृहस्पति ने प्रतिवाद में कहा कि पुत्र क्षेत्री का होता है । मात्रा क्षेत्रिणी होती है और पिता क्षेत्री, अत: बृहस्पति ने बुध पर अपना अधिकार माना । जब यह विवाद बहुत अधिक बढ़ गया, तब ब्रह्माजी ने अपने प्रभाव का प्रयोग करते हुए हस्तक्षेप किया । ब्रह्माजी के पूछने पर तारा ने उसे चंद्रमा का पुत्र होना स्वीकार किया तब ब्रह्माजी ने उस बालक को चंद्रमा को दे दिया ।।

चंद्रमा के पुत्र माने जाने के कारण बुध क्षत्रिय हुये यदि उन्हें बृहस्पति का पुत्र माना जाता तो ब्राह्मण होते । चंद्रमा ने बुध के पालन-पोषण का दायित्व अपनी प्रिय पत्नी रोहिणी को दिया । रोहिणी द्वारा पालन-पोषण किए जाने के कारण बुध का नाम रौहिणेय भी है । पद्म पुराण में उल्लेख है कि बुध ने हस्ति शास्त्र का निर्माण किया ।। मित्रों, इस कथा में खगोलीय पक्ष के अतिरिक्त जो महत्वपूर्ण पक्ष है - वह है बुध के स्वरूप का चित्रण । इस कथा से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि बुध का रूप कितना अधिक मोहक है कि बृहस्पति अपना संपूर्ण क्रोध भूल गए तथा उन्हें पुत्र रूप में स्वीकार करने को तत्पर हो गए ।।

बुध की कांति-नवीन दूब के समान बताई गई है अत: बुध के स्वरूप में एक आकर्षण एवं खिंचाव है । बुध की कृपा जिन व्यक्तियों पर होती है उनके व्यक्तित्व में ऎसा आकर्षण सहज ही पाया जाता है । चंद्रमा के पुत्र होने तथा बृहस्पति द्वारा पुत्र माने जाने के कारण स्वयं के गुणधर्म के अतिरिक्त बुध पर इन दोनों ग्रहों का प्रभाव भी स्पष्टत: देखने को मिलता है ।। चन्द्रमा और बृहस्पति दोनों के गुणों को पाकर ही बुध के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी विषय अत्यन्त विस्तृत हैं । गंधर्वराज के पुत्र होने के कारण जहाँ ललित-कलाओं पर बुध का अधिकार है वहीं बृहस्पति के प्रभाव से विद्या, पाण्डित्य, शास्त्र, उपासना आदि बुध के प्रमुख विषय बन जाते हैं ।।

अभिव्यक्ति अथवा वाणी की प्रखरता जैसी क्षमता बुध ही दे सकते हैं । आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में सफलता के लिए जिस प्रस्तुतिकरण की आवश्यकता लोगों को होती है वो सिर्फ बुध ही दे सकते हैं ।। अन्य ग्रह जैसे चन्द्रमा, शुक्र, बृहस्पति, कला, विद्या, कल्पनाशक्ति प्रदान कर सकते हैं परन्तु यदि जन्मपत्रिका में बुध बली न हों तो अपनी प्रतिभा का आर्थिक लाभ उठाने की कला से व्यक्ति वंचित रह जाता है ।।

वाणी बुध एवं बृहस्पति दोनों का विषय है परन्तु जहाँ वाणी में ओजस्विता बृहस्पति का क्षेत्र है, वहीं वाक्-चातुर्य एवं पटुता जातक में बुध के आशीर्वाद का ही परिणाम होता है । बुध जातक को ऎसा हाजिर-जवाब बना देते हैं कि सामने वाला आवाक् रह जाए और उसे कुछ बोलते ही न बने ।। मित्रों, स्पष्ट है कि सही समय पर, सही जवाब या कार्य के लिए बुद्धि में जिस प्रखरता की आवश्यकता होती है वह बुध ही दे सकते है ।  बुध से जु़डा सर्वाधिक महत्वपूर्ण गुण उचित समय पर व्यवस्था बनाने के लिये हर हाल में खुद को तैयार कर लेना माना गया है । सिर्फ बुध प्रधान व्यक्ति में ही इस प्रकार के अद्वितीय गुण हो सकता है ।।

मित्रों, बुध प्रधान व्यक्ति समय के अनुसार अपने आप को बदल लेना अच्छी तरह जानते हैं । यह इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि यदि वक्त के साथ इन्होंने खुद को नहीं बदला तो ये बहुत पीछे और अकेले रह जाएंगे । बुध प्रधान व्यक्ति की जिज्ञासा ही इन्हें कुछ नए सूत्र बनाने तक की प्रेरणा देती है ।। जिनकी जन्मपत्रिका में बुध बलवान होता हैं, वे इस प्रकार के सिद्धान्तों को मानने वाले होते हैं, कि इंसान नियम को बनाता है, नियम इंसानों को नहीं, इसका सीधा अर्थ है नियमों में संशोधन का रास्ता खुला रखना । और वो इसीलिए कि ये समय की मांग के अनुसार खुद को, अपने नियमों और उसूलों को आसानी से बदल कर समय की मुख्य धारा में शामिल हो सकें ।।

ज्योतिषीय परिपेक्ष्य में देखें तो बुध का वर्गीकरण नैसर्गिक शुभ या अशुभ ग्रह के रूप में नहीं किया गया है । वे जिस ग्रह के साथ बैठते हैं या प्रभाव क्षेत्र में होते हैं, उसी के अनुरूप आचरण करते हैं परन्तु अपनी पहचान नहीं खोते हैं, जो इनकी मुख्य विशेषता है । सूर्य के साथ युति करके बुधादित्य योग बनाते हैं ।। सूर्य की ऊर्जा लेकर बुध जहाँ एक ओर बुद्धि को प्रखर करते हैं वहीं दूसरी ओर अनुशासन लेकर इन्द्रियों को नियंत्रित करते हैं । यद्यपि चन्द्रमा के प्रति बुध के मन में नाराजगी होती है तथापि बुध का हास्य-विनोद, चन्द्रमा के साथ से निखर उठता है । चन्द्रमा की कल्पनाशक्ति और उ़डान की सर्वश्रेष्ठ अभिव्यक्ति इस युति में मिल सकती है ।।

मंगल के साथ बुध की युति होने पर बुध की वणिक बुद्धि कुछ अधिक ही जाग्रत हो जाती है और इस युति को यदि बृहस्पति की अमृत दृष्टि मिल जाए तो उच्चाकोटि का धन योग बन जाता है । बुध और बृहस्पति की युति अद्भुत होती है, वाणी, बुद्धि, ज्ञान, संगीत से जु़डी नैसर्गिक प्रतिभा उसमें विद्यमान होती है ।। बुध प्रभावी व्यक्ति में व्यक्तित्व में संपूर्णता होती है तथा जातक उसे और अधिक से अधिक निखारने के लिए प्रयास करता है । यह योग लक्ष्मी और सरस्वती दोनों को पाने की इच्छा को अत्यधिक प्रबल बना देता है । बुध+शुक्र के साथ यदि युति बनाये तो साथ मिलकर लगभग इसी प्रकार के परिणाम देते हैं ।।

मित्रों, शनि के साथ मिलकर बुध, शनि के कठोर श्रम के गुण को अपनाकर ज्ञान और कला की वृद्धि का प्रयास करते हैं । परन्तु यदि शनि ग्रह का ठण्डापन भी इस युति पर हावी हो जाए तो निराशाजनक सोच को जन्म देती है । सीखने की गहरी ललक बुध की कृपा से ही आती है । बुध बालक हैं और एक बच्चे में ही सीखने की इच्छा सबसे तीव्र होती है ।। जन्मकुण्डली में बुध शक्तिशाली हों तो कुछ अधिक जानने की जिज्ञासा सदैव बनी रहती है । ऎसा व्यक्ति नित नई चीजें सीखने का प्रयत्न करते रहता है और समय की धारा से खुद को अलग नहीं होने देता बल्कि उस धारा को अपने पक्ष में मो़ड लेने को लालायित रहता है ।।

आगे जारी है..... अगले अंक को पढ़ें..... वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें ।।


बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।

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