Devata Stotram

अथ श्रीमदाञ्जनेयसुप्रभातम् ।। Shrimada Aanjaneya Suprabhatam.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,


मित्रों, शनि दोष शान्ति हेतु एवं हनुमानजी की प्रशन्नता हेतु इस हनुमान जी की सुप्रभातं स्तोत्र का श्रद्धा पूर्वक परायण करें ।।


अमलकनकवर्णं प्रज्वलत्पावकाक्षं सरसिजनिभवक्त्रं सर्वदा सुप्रसन्नम् ।
रणरचनसुगात्रं कुण्डलालङ्कृताङ्गं परजयकरवालं रामदूतं नमामि ॥

श्रीरामचन्द्रचरणाम्बुजमत्तभृङ्ग श्रीराममन्त्रजपशील भवाब्धिपोत ।
श्रीजानकीहृदयतापनिवारमूर्ते श्रीवीर धीर हनुमन् तव सुप्रभातम् ॥१॥

श्रीरामदिव्यचरितामृतास्वादलोल श्रीरामकिङ्कर गुणाकर दीनबन्धो ।
श्रीरामभक्त जगदेकमहोग्रशौर्य श्रीवीर धीर हनुमन् तव सुप्रभातम् ॥२॥

सुग्रीवमित्र कपिशेखर पुण्यमूर्ते सुग्रीवराघवसमागमदिव्यकीर्ते ।
सुग्रीवमन्त्रिवर शूरकुलाग्रगण्य श्रीवीर धीर हनुमन् तव सुप्रभातम् ॥३॥

भक्तार्तिभञ्जन दयाकर योगिवन्द्य श्रीकेसरीप्रियतनूज सुवर्णदेह ।
श्रीभास्करात्मजमनोऽम्बुजचञ्चरीक श्रीवीर धीर हनुमन् तव सुप्रभातम्॥४॥

श्रीमारुतप्रियतनूज महाबलाढ्य मैनाकवन्दितपदाम्बुज दण्डितारिन् ।
श्री उष्ट्रवाहन सुलक्षणलक्षिताङ्ग श्रीवीर धीर हनुमन् तव सुप्रभातम्॥५॥

पञ्चाननस्य भवभीतिहरस्य रामपादाब्जसेवनपरस्य परात्परस्य ।
श्री अञ्जनाप्रियसुतस्य सुविग्रहस्य श्रीवीर धीर हनुमन् तव सुप्रभातम्॥६॥

गन्धर्वयक्षभुजगाधिपकिन्नराश्च आदित्यविश्ववसुरुद्रसुरर्षिसङ्घाः ।
सङ्कीर्तयन्ति तव दिव्यसुनामपङ्क्तिं श्रीवीर धीर हनुमन् तव सुप्रभातम् ॥७॥

श्रीगौतमच्यवनतुम्बुरुनारदात्रिमैत्रेयव्यासजनकादिमहर्षिसङ्घाः ।
गायन्ति हर्षभरितास्तव दिव्यकीर्तिं श्रीवीर धीर हनुमन् तव सुप्रभातम् ॥८॥

भृङ्गावली च मकरन्दरसं पिबेद्यं कूजन्त्युदारमधुरं चरणायुधाश्च ।
देवालये घनगभीरसुशङ्खघोषः श्रीवीर धीर हनुमन् तव सुप्रभातम् ॥९॥

पम्पासरोवरसुपुण्यपवित्रतीर्थमादाय हेमकलशैश्च महर्षिसङ्घाः ।
तिष्ठन्ति त्वच्चरणपङ्कजसेवनार्थं श्रीवीर धीर हनुमन् तव सुप्रभातम् ॥१०॥

श्रीसूर्यपुत्रप्रिय नाथ मनोज्ञमूर्ते वातात्मजात कपिवीर सुपिङ्गलाक्ष ।
सञ्जीवनाय रघुवीरसुभक्तवर्य श्रीवीर धीर हनुमन् तव सुप्रभातम् ॥११॥==============================================

मित्रों, प्रत्येक शुक्रवार को वर्ष भर केवल श्रीलक्ष्म्यष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् का पाठ करने वाला व्यक्ति विपुल सम्पदा के साथ अष्ट ऐश्वर्यों को प्राप्त कर लेता है ।।

इहलोक के सम्पूर्ण सुखों को भोगकर सभी दुखों से मुक्ति के साथ ही इस धरती पर कुबेर के समान धनाधिश होता है ।। यथा:- भृगुवारे शतं धीमान् पठेद्वत्सरमात्रकम् । अष्टैश्वर्यमवाप्नोति कुबेर इव भूतले ॥२८॥

इस विडियो में आइये हम भी साथ में श्री लक्ष्मी अष्टोत्तरशत नाम स्तोत्रम् का पाठ करें - https://youtu.be/oNKXd4SDhOo

मित्रों, इस लिंक को क्लिक करके श्रीलक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् का पाठ कर सकते हैं - http://www.astroclasses.tk/2015/11/shri-lakshmyashtottara-shatanama-stotram.html

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