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बाँझ एवं नि:सन्तान स्त्री के लिये सन्तान प्राप्ति के अचूक उपाय ।।



बाँझ एवं नि:सन्तान स्त्री के लिये सन्तान प्राप्ति के अचूक उपाय ।। The sure way to progeny.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,


मित्रों, वास्तु शास्त्र में कुछ ऐसे दोषों का वर्णन मिलता है, जिनके कारण संतान की प्राप्ति अथवा वंश वृद्धि अवरुद्ध हो जाती है । इस समस्या के पीछे की वास्तविकता अथवा ज्योतिषीय आधार को जानने के लिये जन्म देखना पड़ेगा । सन्तान प्राप्ति हेतु हरिवंश पुराण का अनुष्ठानात्मक परायण या फिर संतान गोपाल मंत्र का जप करवा सकते हैं ।। सन्तान प्राप्ति हेतु पति-पत्नी स्वयं इस सन्तान गोपाल मन्त्र का जप कर सकते हैं । दोनों सुबह स्नान कर पूरी पवित्रता के साथ इस मंत्र का जप तुलसी की माला से करें । संतान गोपाल मंत्र :- "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ।।"

मित्रों, इस मंत्र का प्रतिदिन एक माला (108 बार) जप करें एवं जप के बाद पूर्ण समर्पण भाव से निरोग, दीर्घजीवी, अच्छे चरित्रवाला तथा सेहतमंद पुत्र के लिये भगवान से प्रार्थना करें । अपने शयनकक्ष में भगवान "श्री कृष्ण" के बाल रूप की (लड्डू गोपाल) का फोटो लगायें तथा उन्हें प्रतिदिन माखन मिसरी का भोग लगायें ।।
अगर विवाह के वर्षो बाद भी गर्भ धारण नहीं हो पाता या बार-बार गर्भपात हो जाता है । तो ज्योतिष शास्त्रानुसार इस समस्या या दोष का मुख्य कारण पति या पत्नी की कुण्डली में संतान दोष अथवा पितृ दोष हो सकता है । घर का वास्तुदोष भी कारण हो सकता है, जिसके कारण गर्भ ठहरता नहीं या बार-बार गर्भपात हो जाता है ।।

मित्रों, सन्तान प्राप्ति हेतु श्री महागणपति के बाल रूप की भी उपासना फलदायी होता है । सन्तान प्राप्ति की इच्छुक महिला प्रतिदिन स्नानादि से निवृत होकर एक माह तक बिल्ब फल चढ़ाकर पूजन करे । पूजन पुरे भावना से करें एवं गणेश जी की ऐसी तस्वीर या प्रतिमा रखें जिसमें माँ पार्वती के गोद में भगवान बैठे हों ।।
पूजनोपरान्त श्री महागणपति के इस मंत्र का ११ माला जप करे ‘‘ॐ पार्वतीप्रियनंदनाय नम:’’ । ये उपाय किसी भी शुक्लपक्ष के बुधवार से शुरू करें । प्रत्येक बुधवार को इस उपाय को श्रद्धापूर्वक करें साथ ही गणेशजी के द्वादश नाम का जप भी करें । बारह बुधवार से पहले ही आपको खुशखबरी मिल जायेगी ।।

मित्रों, चलिये आज पुत्र प्राप्ति के कुछ अन्य और ज्यादा प्रभावी उपायों को जानते हैं । यदि आपको कोई पुत्री है और आपको पुत्र कि कामना है तो ये एक प्रयोग करें । अपनी पुत्री का पूर्ण श्रद्धा से विधिवत पूजन एवं नमस्कार करें तथा सगे-सम्बन्धियों के साथ ही अपने परिजनों को भी खीर एवं जलेबी का भोजन करायें, भविष्य में पुत्र अवश्य ही होगा ।।
कोई भी नि:सन्तान स्त्री किसी के भी पहली संतान जो संयोग से लड़का हो, उस लड़के कि नाल खोलती हैं, उसे अवस्य ही पुत्र रत्न की प्राप्ति होती ही है । किसी शमी वृक्ष पर कोई पीपल उगा हो, उस वृक्ष के नीचे जाकर नि:सन्तान दंपत्ति पुत्र की कामना करते हुए वृक्ष को स्पर्श व् प्रणाम करें ।।

पुत्र की कामना करते हुए वृक्ष का स्पर्श करके यह संकल्प करे कि "गर्भाधान के पश्चात जब पुत्ररत्न की प्राप्ति होगी, तब अपने पुत्र का मुंडन संस्कार यहीं आपके पास आकर आपकी छाया में बैठकर करवायेंगे । ये टोटका बड़ा ही प्रभावी है इसे करने से बंध्या स्त्री को भी पुत्र रत्न की प्राप्ती हो जाती हैं ।।
पुष्य नक्षत्र में असगन्ध की जड़ को उखाड़कर अपने घर लाकर रख लेवें । ऋतुकाल के उपरांत (स्त्री को) शुद्ध होने पर गाय के दूध के साथ सील पर पीसकर पीते रहने से किसी बाँझ स्त्री की भी पुत्र प्राप्ति की आकाँक्षा अवश्य पूर्ण हो जाती हैं ।।

पलाश के पांच कोमल पत्ते किसी स्त्री के दूध में पीसे और जो बांझ स्त्री मासिक धर्म के चोथे दिन स्नान करके उसे खा लेगी, वो निश्चय ही पुत्रवती होने का सौभाग्य प्राप्त करेगी । ताकतवर और गोरे पुत्र के लिए गर्भवती स्‍त्री को पलाश के एक पत्‍ते को लेकर पीसकर गाय के दूध के साथ रोज पीना चाहिए ।।
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