Devata Stotram

अथ श्रीविचित्रवीर हनुमान मालामन्त्रः ।। Hanumana Mantra.

इस मन्त्र से आप अपने बड़े-से-बड़े शत्रु को धुल चटा सकते हैं । आपको करना ये है, कि मंगलवार अथवा शनिवार को सरसों के तेल का दीपक जलाकर इस मन्त्र का जप अधिक-से-अधिक करना होगा । उसके पहले और जप के बाद भी इस स्तोत्र का भी परायण करना होता है । मन्त्र में अपने शत्रु का नाम भी लेना है, पर ...... ये मैं बता दूँगा, उसके लिये संपर्क करें ।।


श्रीगणेशाय नमः ।।

ॐ अस्य श्रीविचित्रवीरहनुमन्मालामन्त्रस्य ।
श्रीरामचन्द्रो भगवानृषिः । अनुष्टुप् छन्दः ।
श्रीविचित्रवीरहनुमान् देवता । ममाभीष्टसिद्ध्यर्थे
मालामन्त्र जपे विनियोगः ।।

ॐ ह्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।
ॐ ह्रीं तर्जनीभ्यां नमः ।
ॐ ह्रूं मध्यमाभ्यां नमः ।
ॐ ह्रैं अनामिकाभ्यां नमः ।
ॐ ह्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।
ॐ ह्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ।।

ॐ ह्रां हृदयाय नमः ।
ॐ ह्रीं शिरसे स्वाहा ।
ॐ ह्रूं शिखायै वषट् ।
ॐ ह्रैं कवचाय हुम् ।
ॐ ह्रौं नेत्रत्रयाय वौषट् ।
ॐ ह्रः अस्त्राय फट् ।।

।। अथ ध्यानम् ।।
वामे करे वैरवहं वहन्तं शैलं परे श्रृङ्खलमालयाढ्यम् ।
दधानमाध्मातसुवर्णवर्णं भजे ज्वलत्कुण्डलमाञ्जनेयम् ।।

ॐ नमो भगवते विचित्रवीरहनुमते
प्रलयकालानलप्रभाज्वलत्प्रतापवज्रदेहाय
अञ्जनीगर्भसम्भूताय प्रकटविक्रमवीरदैत्य-
दानवयक्षराक्षसग्रहबन्धनाय भूतग्रह-
प्रेतग्रहपिशाचग्रहशाकिनीग्रहडाकिनीग्रह-
काकिनीग्रहकामिनीग्रहब्रह्मग्रहब्रह्मराक्षसग्रह-
चोरग्रहबन्धनाय एहि एहि आगच्छागच्छ-
आवेशयावेशय मम हृदयं प्रवेशय प्रवेशय
स्फुर स्फुर प्रस्फुर प्रस्फुर सत्यं कथय कथय
व्याघ्रमुखं बन्धय बन्धय सर्पमुखं बन्धय बन्धय
राजमुखं बन्धय बन्धय सभामुखं बन्धय बन्धय
शत्रुमुखं बन्धय बन्धय सर्वमुखं बन्धय बन्धय
लङ्काप्रासादभञ्जन सर्वजनं मे वशमानय वशमानय
श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं सर्वानाकर्षय आकर्षय
शत्रून् मर्दय मर्दय मारय मारय चूर्णय चूर्णय
खे खे खे श्रीरामचन्द्राज्ञया प्रज्ञया मम कार्यसिद्धि
कुरु कुरु मम शत्रून् भस्मी कुरु कुरु स्वाहा ।।

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः फट् श्रीविचित्रवीरहनुमते
मम सर्वशत्रून् भस्मी कुरु कुरु हन हन हुं फट् स्वाहा ।।

एकादशशतवारं जपित्वा सर्वशत्रून् वशमानयति नान्यथा इति ।।

।। इति श्रीविचित्रवीरहनुमन्मालामन्त्रः सम्पूर्णम् ।।

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ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः फट् श्रीविचित्रवीरहनुमते मम सर्वशत्रून् भस्मी कुरु कुरु हन हन हुं फट् स्वाहा । इस मन्त्र से आप अपने बड़े-से-बड़े शत्रु को धुल चटा सकते हैं । आपको करना ये है, कि मंगलवार अथवा शनिवार को सरसों के तेल का दीपक जलाकर इस मन्त्र का जप अधिक-से-अधिक करना होगा । उसके पहले और जप के बाद भी इस स्तोत्र का भी परायण करना होता है । मन्त्र में अपने शत्रु का नाम भी लेना है, पर ...... ये मैं बता दूँगा, उसके लिये संपर्क करें ।।
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