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एक चुटकी सिंदूर और पति-पत्नी की खटपट सदा के लिये समाप्त ।।



मां पार्वती को प्रतिदिन सिंदूर अर्पित करें, गृहस्थ जीवन की खटपट सदा के लिये समाप्त हो जायेगी ।। Sindoor will solve all problems.


हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, ज्योतिष बड़ा ही उलझा हुआ विषय है । परन्तु शत प्रतिशत समाधान अवश्य देता है । बाजार में जितने भी सम्पूर्ण रूप से सॉफ्टवेयर पर निर्भर ज्योतिषी लोग हैं, ज्योतिष से समाधान कर पाना उनके वश की बात नहीं है ।।

ज्योतिष को समझने और जातक को समाधान मिले इसके लिए ज्योतिष की भरपूर जानकारी की आवश्यकता पहले जरुरी है । इसके साथ-ही-साथ अनुभव इसमें ज्यादा काम आता है ।।

अगर आपके पास अनुभव की कमी है और आप अपनी वाक्पटुता एवं सॉफ्टवेयर के भरोसे हैं तो आप किसी के लिए कोई समाधान नहीं निकाल सकते ।।

मित्रों, इसके साथ ही ये भी बताता चलूँ, कि बहुत बड़ी पूजा-ग्रह दोष शान्ति कर्म-अनुष्ठान आदि से ही शान्ति नहीं होती अपितु छोटे-छोटे टिप्स & ट्रिक्स भी बहुत आते हैं ।।

चलिए आज मैं आपलोगों को घर में पति-पत्नी के बीच होनेवाले प्रतिदिन के झगड़ों की शान्ति का एक अचूक टोटका बताता हूँ । कई दिन कई मित्रों ने व्हाट्स अप पर भी तथा फेसबुक के मैसेज बॉक्स में भी लिखा की बताएं ।।

आइये सबसे पहले हम कुछ ऐसे तथ्यों से अवगत हो लें जिसके कारण ये दुर्घटना घर में घटित होती रहती है । पहले तो जीवन में विवाह न होना जिसका कारण जन्म कुंडली के अनेक ऎसे दोष हो सकते हैं ।।

मित्रों, जन्म कुंडली में विवाह का योग है या नहीं यह सप्तम भाव में स्थित ग्रह एवं राशि, सप्तम भाव के स्वामी की स्थिति और विवाह के कारक की स्थिति पर निर्भर करता है ।।

यदि पुरूष की कुंडली है, तो शुक्र व स्त्री की कुंडली है, तो गुरू विवाह का कारक ग्रह होता है । इसलिए सप्तमेश, शुक्र अथवा गुरू अस्त, नीच या बलहीन हो तो विवाह के योग नहीं बन पाते ।।

यदि किसी अन्य वजहों से बनते भी हैं, तो शादी होने के बाद भी वैवाहिक जीवन में सरसता का अभाव रहता है । विवाह सुख में कमी के अन्य ग्रहजनित कारण भी होते हैं जो इस प्रकार हो सकते हैं ।।

मित्रों, कुंडली में यदि लग्नेश अस्त हो, सूर्य दूसरे स्थान में और शनि बारहवें स्थान में हो तो जीवन में वैवाहिक सुख की कमी को दर्शाता है । पांचवें घर पर मंगल, सूर्य, राहु, शनि जैसे एक से अधिक पापी ग्रहों की दृष्टि विवाह सुख में कमी लाती है ।।

शुक्र और चंद्र, शुक्र और सूर्य की युति सप्तम स्थान में हो व मंगल शनि की युति लग्न में हो, तो जातक का विवाह नहीं होता । अष्टम स्थान में बुध-शनि की युति वाले जातक का विवाह नहीं होता और अगर होता भी है तो अत्यल्प होता है ।।

पंचम स्थान में मंगल, लाभ स्थान में शनि तथा पापकर्तरी में शुक्र होने से विवाह सुख में अल्पता आती ही है । लग्नेश, पंचमेश, सप्तमेश तथा भाग्येश यदि छठे, आठवें या 12वें स्थान में युति करें तथा इन ग्रहों पर शनि का प्रभाव हो पति-पत्नी के बीच सामंजस्य बहुत ही कम होता है ।।

पंचमेश अस्त, शत्रु क्षेत्री या नीच का होकर छठे, आठवें या 12वें स्थान में हो तो वैवाहिक सुख अत्यल्प होता है । सूर्य, चंद्र, शुक्र, पंचमेश या सप्तमेश यदि शत्रु ग्रह के नक्षत्र में बैठे हों तो वैवाहिक सुख में कमी संभव है ।।

मित्रों, ग्रह जनित दोषों के उपाय करने से लाभ मिलता ही है । ज्योतिष शास्त्रानुसार कुंडली में कुछ विशेष ग्रह दोषों के प्रभाव से वैवाहिक जीवन पर बुरा असर पड़ता ही है ।।

ऐसे में उन ग्रहों के उचित ज्योतिषीय उपचार के साथ ही भगवान शिव को पूजनोपरान्त शहद का लेप एवं माँ पार्वती को प्रतिदिन सिंदूर अर्पित करना चाहिए । और वैसे भी सिंदूर को सुहाग का प्रतीक माना जाता है इसलिए आपका जीवन दोषमुक्त होकर स्वर्ग बन जायेगा ।।

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