आपका जीवन साथी कैसा मिलेगा ? वैवाहिक जीवन का राज एवं मंगल दोष आदि का निराकरण ।। What will be your life partner.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,


मित्रों, विवाह का बन्धन जिसे वैवाहिक बन्धन कहते हैं, मनुष्य जीवन का सबसे महत्वपूर्ण बंधन होता है । वैवाहिक जीवन प्यार और स्नेह पर अधारित एक व्यवस्था है, यह वह पवित्र बंधन है, जिसपर पूरे परिवार का भविष्य निर्भर करता है ।।

बाहर से देखने में किसी भी व्यक्ति में बाहरी आकर्षण हो सकता है । परन्तु भीतर से वह व्यक्ति पत्थर हृदय वाला और स्वार्थी भी हो सकता है । यही कारण है, कि हमारे वैदिक समाज में विवाह से पहले वर-वधु की कुण्डली की व्याख्या अनिवार्य समझी जाती हैं ।।

मित्रों, वैसे तो जन्मकुण्डली के बारह भावों में से सप्तम भाव ही दांपत्य-जीवन का माना गया है । परन्तु इस भाव के अलावा वर-वधु के उज्ज्वल भविष्य हेतु आयु, भाग्य, संतान, सुख, कर्म आदि भावों का विश्लेषण भी एक सीमा में अनिवार्य होता है ।।

जन्मकुण्डली में सामान्यतया अष्ट कुट एवं मांगलिक दोष ही देखा जाता है । परन्तु आज मैं अपने इस पोस्ट के माध्यम से आपलोगों को बताना चाहता हूँ, कि कुंडली मिलान के साथ ही दोनों जातकों के जन्मकुण्डली की मूल संरचना का गहरा अध्ययन भी अति महत्वपूर्ण होता है ।।

मित्रों, जन्मकुण्डली के अलावा जातक की नवमांश, सप्तांश, चतुर्विशांश, सप्तविशांश तथा रोगादि के लिए त्रिशांश कुण्डली भी देखनी चाहिये । सामान्यतया लड़कों के लिए शुक्र एवं लड़कियों के लिए गुरु विवाह का कारक ग्रह माना जाता है । अत: कुण्डली में इनकी स्थिति भी देखना अनिवार्य हो जाता है ।।

ज्योतिष के सिद्धांत जिसमें "भावात् भावम्" प्रधान होता है, के अनुसार गुरु से सप्तम, चन्द्र से सप्तम तथा सप्तम भाव के अधिपति की शुभ स्थिति भी देखना आवश्यक हो जाता है । शुभ ग्रह उसे कहते है जो स्वगृही, मित्रगृही अथवा अपने उच्च स्थिति का हो ।।

मित्रों, दो दिन पहले एक भाई हमारे ऑफिस में आये और उन्होंने कहा की मिलान का केवल प्रिन्ट चाहिए । मैंने उन्हें समझाने का प्रयास किया, परन्तु मुझे ऐसा लगा की मैं इससे आगे कहूँगा तो उन्हें लगेगा की अपनी फीस पूरी लेने के लिए महाराज जी ऐसा बोल रहे हैं, इसलिए मैं कुछ भी न बोला ।।

परन्तु कल तो हद ही हो गयी, एक अस्सी के पार की माताजी, जो अहमदाबाद की थी । अपने बेटे के लिए होनेवाली बहु की जन्मपत्री के साथ मिलान करवाने आयीं । बोलीं महाराज, आजकल तो सॉफ्टवेयर से सब निकल जाता है मेरे बेटे ने भी निकाला है ।।

मैंने पूछा माताजी फिर मेरे ऊपर इतनी कृपा क्यों ? बोलीं - नहीं ! आप ब्राह्मण हैं तो आपके मुंह से हाँ सुनना शुभ होता है न इसलिए । मैंने कहा - लगता है वो दिन दूर नहीं जब लोग गाय की तरह ब्राह्मणों को भी एक दो दिन की सुखी रोटी डाल जायेंगे ।।

मित्रों, आजकल शादी में सिर्फ लड़का-लड़की का रूप-रंग ही देखा जाता है । जबकि सामान्य कद-काठी और रूप-रंग के बच्चे भी यदि अत्यंत भाग्यशाली हुए तो घर की स्थिति उत्तरोत्तर अच्छी होती ही है और घर की उन्नति में चार चांद लग जाते हैं । कई बार अन्य ग्रहों के वजह से मांगलिक दोष भी भंग हो जाता है, परन्तु उसे मांगलिक मानकर शादियां कट कर दी जाती हैं ।।

इन विषयों को गौर से देखें क्योंकि कोई एक सूत्र ही प्रभावी नहीं होता । यदि सप्तम भाव का स्वामी प्रथम भाव में हो तो वह जातक किसी ऐसे व्यक्ति से शादी करेगा जिसे वह बचपन से जानता हो अर्थात लव मैरिज भी कह सकते हैं ।।

पति एवं पत्नी प्रखर बुद्धि के होंगे और सभी बातों की जांच करने की इनमें क्षमता होगी । यदि यह दूसरे भाव में हो तो पत्नी धनी होगी या उसके ससुराल आने के बाद धन की वृद्धि होगी । यदि तीसरे भाव में हो तो भाई भाग्यशाली होंगे एवं विदेश में निवास के उनके योग बनेंगे ।।

मित्रों, कुण्डली में यदि सप्तमेश चौथे भाव में बैठा हो तो जातक का जीवन पूर्णत: प्रसन्न एवं खुशहाल होता है । यदि पंचमभाव में हो तो पति या पत्नी संपन्न परिवार से होंगे और एक-दूसरे के लिए लाभकारी होंगे । परन्तु छठे भाव में होने पर वैवाहिक बन्धन के लिए शुभ स्थिति नहीं होती ।।

कुण्डली के सप्तम भाव में ही यदि सप्तमेश स्थित हो तो पति या पत्नी का व्यक्तित्व आकर्षक होता है । वह न्यायप्रिय और सम्मानित व्यक्ति हो सकता है । अष्टम भाव में सप्तमेश के स्थित होने से जातक की शादी किसी नजदीकी सम्बन्धियों में ही हो जाती है परन्तु दोनों का जीवन सर्वोत्तम सुखों से भरा रहता है ।।

मित्रों, सप्तमेश के नवम भाव में स्थित होने से जातक के पिता विदेश में रहते हैं और उसकी जीवन संगिनी सुसंस्कृत एवं आदर्श होती है । दशम भाव में स्थित होने पर जातक विदेश में सफल होता है परन्तु उसका जीवन निरंतर यात्राओं से भरी रहती है । पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित रहते हैं ।।

सप्तमेश यदि एकादश भाव में बैठा हो तो पत्नी धनी परिवार से होती है एवं अपने साथ प्रचूर धन लेकर आती है । द्वादश भाव में होने पर स्थिति शुभ नहीं रहती है । ऐसा जीवन बिखर भी सकता है विवाह टूटने तक की नौबत आ जाती है ।।

मित्रों, अगर किसी जातक की कुण्डली के सप्तम भाव में सूर्य हो तो जातक गोरा होगा, सिर पर बाल कम होंगे और शादी भी विलंब से होगी वो भी बहुत कष्ट के बाद । यदि चंद्रमा हो तो पति या पत्नी देखने में सुंदर होंगे, लेकिन ईष्या की भावना से भरे होंगे ।।

मंगल हो तो जातक पर पत्नी का शासन रहेगा एवं दाम्पत्य तनावपूर्ण होगा । बुध के होने से वह जातक सदाचारी और मिलनसार होगा, उसे कानून या गणित का भी ज्ञान हो सकता है एवं उसमें लेखन की क्षमता भरपूर होगी ।।

इस घर में गुरु के होने से जातक राजनयिक और कोमल हृदय वाला होगा । पति या पत्नी सुंदर होगी, शिक्षा अच्छी होगी और इस शादी से लाभ-ही-लाभ सम्भव होगा । इस घर में शुक्र हो तो जातक का विवाहित जीवन सुखी रहेगा । पत्नी इसकी भक्त होगी, लेकिन यह स्वयं झगड़ालु होगा ।।

मित्रों, यदि सप्तम भाव में शनि हो तो विवाह विलंब से करवायेगा । ऐसा जातक अपनी पत्नी के नियंत्रण में रहेगा, पत्नी कुरूप होगी, लेकिन अत्यधिक मेहनती हो सकती है । यदि यहां राहू हो तो यह जातक के परिवार के लिए दुख लेकर आयेगा ।।

ऐसे जातक की पत्नी स्त्रीरोग से पीड़ित रहने वाली एवं आरामपसंद होगी । इस भाव में केतू हो तो पत्नी दुष्ट प्रकृति की होगी अथवा पति दुष्ट होगा । ऐसे जातक के पेट में असाध्य बीमारी का होना भी सम्भव हो सकता है ।।

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।। नारायण नारायण ।।

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