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कार्य सिद्धि हेतु यज्ञ (हवन) के लिए अग्निवास देखना (भृगुसंहिता)।। Agnivas Dekhna.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,


मित्रों, कई बार कई लोगों हमारे ज्योतिषी मित्रों ने भी पूछा कि गुरूजी हवन करने के लिए शुभ मुहूर्त कैसे देखें । अर्थात् हवन कब करें ताकि जिस संकल्प से हवन किया जाय वो पूर्ण हो ।।

किसी भी ग्रह दोषों के निवारण हेतु जो कर्म किया जाता है अथवा देव-प्रतिष्ठा, गृह-प्रवेश, यज्ञोपवीत जैसे सभी कर्मों में ये अनिवार्य होता है, की अग्निवास देखकर ही यज्ञ (हवन) किया जाय अन्यथा कर्म निष्फल हो जाते हैं ।।

तिथि प्रहर संयुक्ता तारकावार मिश्रिता ।
अग्निभिश्च हरेद्भागम् शेषे सत्वरजस्तमा ।।
सत्वे तात्कालिकी सिद्धी रजसा तु बिलंबकम् ।
तमसा निष्फ़लं कार्यं ज्ञातब्यं प्रश्न कोबिदै ।।

अर्थ:-- तिथि, प्रहर, नक्षत्र एवं वार को जोड़ दें, तथा इसमें तीन का भाग दे दें । शेष अगर 1. 2. 3. हो तो, 1 हो तो सत्व अर्थात कार्य तत्काल पूर्ण होगा । 2 बचे तो रजस सिद्धि अर्थात कार्य तो होगा, लेकिन बिलम्ब से । अगर शेष 3 या 0 बचे तो तमसा सिद्धि अर्थात कार्य निष्फल होगा, अर्थात पूर्ण नहीं होगा ।।

शिव वास देखने का मुहूर्त:-

सैकातिथि से अभिप्राय है, शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या तक तिथियों की कुल संख्या 30 होती है । इस तरह से कोई भी मुहूर्त देखने के लिए 1 से 30 तक की संख्या को ही लेना चाहिए ।।

तिथी च द्विगुणी कृत्वा तामे पञ्च समाजयेत ।।
सप्तभि (मुनिभिः) हरेद्भागं शेषे शिव वाससं ।।
एक शेषे तू कैलाशे, द्वितीये गौरी संनिधौ ।।
तृतीये वृष भारुढौ सभायां च चतुर्थके ।।
पंचमे तू क्रीडायां भोजने च षष्टकं ।।
सप्तमे श्मशाने च शिववास: प्रकीर्तितः ।।

अर्थ:- तिथि को दुगुना करें, उसमे पांच को जोड़ देना चाहिए, कुल योग में, 7 का भाग देने पर, 1.2.3. शेष बचे तो इच्छा पूर्ति होता है, शिववास अच्छा बनता है । बाकि बचे तो हानिकारक होता है, शुभ नहीं है ।।

इसे इस प्रकार समझना चाहिए ... १.कैलाश अर्थात = सुख, २. गौरिसंग = सुख एवं संपत्ति, ३.वृषभारूढ = अभिष्ट्सिद्धि, ४.सभा = सन्ताप, ५.भोजन = पीड़ा, ६.क्रीड़ा = कष्ट, ७.श्मशाने = मरण ।।

अग्नि वास:-

शैकातिथि वार कृतायुयाप्ता शेषे गुणभ्रे भुवि अग्निवासः ।।
अर्थ:- तिथि और वार को जोड़ कर, उसमे चार का भाग देने पर, तीन व शून्य बचे तो, भूमि पर अग्निवास माना जाता है ।।

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