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गृह कलह, स्वास्थ्य एवं क्रोध से मुक्ति हेतु ।।



गृह कलह, स्वास्थ्य एवं क्रोध से मुक्ति हेतु ।। Grih Kalah, Helth And Krodh Par Niyantran.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, इस संसार में लगभग ही कोई ऐसा होगा जिसके घर में गृह कलह न होता हो । ये एक ऐसी बीमारी है जो ब्रह्मा विष्णु, रूद्र एवं इन्द्र तक को नहीं छोड़ती । अगर ये बात सच न होती तो आज कोल्हापुर में माता महालक्ष्मी का मंदिर न होता ।।

पुष्कर में ब्रह्माजी का मंदिर है तो उसके पीछे भी कारण यही गृह कलह ही है । ऐसे और भी हजारों उदहारण है जो इस बात को प्रमाणित करते हैं । जितने साधू-संतों की मण्डली आप देख रहे हैं उसमें से अधिकाधिक साधू गृह कलह के वजह से ही साधू बने हैं ।।

इसका कारण मुख्यतः दो होता है एक तो पारिवारिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु धन का आभाव । दूसरा घर में सभी सदस्यों का अपना-अपना अहं । और ये दोनों ही परिवार के बिखराव के मुख्य कारण होते हैं ।।

मित्रों, आइये आज हम इस समस्या के समाधान को जानने का प्रयत्न करते हैं । अगर आपके परिवार में पैसे की वजह से कलह रहता है तो एक दक्षिणावर्ती शंख घे में लायें और उसमें पांच कौड़ियां रखकर उसे एक चांदी की कटोरी में चावल भरकर स्थापित करें ।।

किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार को पूरी निष्ठा एवं पूर्ण श्रद्धा से ये कार्य आप कर सकते हैं । अगर इस उपाय को दीपावली के अवसर पर करें तो और भी ज्यादा लाभ अवश्य होता है ।।

मित्रों, अगर आपको बात-बात पर पूर्णावेग से क्रोध आता है जिसपर आपका नियंत्रण नहीं रहता हो तो उसे नियंत्रित करने हेतु ये सरल सा उपाय आप कर सकते हैं । आपको करना ये है, कि एक दक्षिणावर्ती शंख को घर लायें और उसमें जल भरकर श्रीसूक्त का पाठ करके उसे पिला दें ।।

अगर आपके घर में शुद्ध स्फटिक का श्रीयन्त्र हो तो उसे विधिपूर्वक स्थापित करके दक्षिणावर्ती शंख में जल लेकर उस जल से श्रीसूक्तं का पाठ करते हुए यन्त्र का यथाविधी अभिषेक करें और उस अभिषिक्त जल को उस व्यक्ति को पिलायें जिसे बहुत क्रोध आता हो ।।

मित्रों, यदि आपके परिवार में पुरुष सदस्यों के कारण आपसी तनाव रहता है । आपसी मेलजोल बिलकुल न नहीं हो सभी पुरुष सदस्य आपस में एक दुसरे से अलग-अलग से रहते हों तो आप इस टोटके को करके देखें ।।

करना ये है कि किसी पूर्णिमा के दिन किसी कदंब वृक्ष की एक डाली जिसमें सात अखंड पत्तियाँ हो । उसे कदम्ब वृक्ष की प्रार्थना करके उसे तोड़ लें और उसे अपने घर लर आयें तथा उसे किसी एकान्त एवं पवित्र स्थान पर घर में रख देवें ।।

इस क्रिया को कम-से-कम चार बार अवश्य करें । उसे अपने यथास्थान अगली पूर्णिमा तक रहने दें तथा पुनः अगली पूर्णिमा को पुरानी डाली को उसी कदम्ब वृक्ष के पास छोड़ आएं और नई डाली लाकर रखें ।।

ये टोटका बहुत ही प्रसिद्द एवं बहुत ही प्रभावी है । इस कार्य को आप पूरी निष्ठा एवं पूर्ण श्रद्धा से करें । जब भी इस टोटके को आप करें इस बात का ध्यान रखें की इस कार्य को करते समय न कोई आपको देखे और न ही टोके घर में शान्ति अवश्य आएगी और तनाव कम होगा ।।

मित्रों, यदि आपके घर का कोई सदस्य अथवा यदि आपका बच्चा बहुत जल्दी-जल्दी बीमार पड़ रहा हो और आपको लग रहा कि दवा भी काम नहीं कर रही है । डाक्टरों को बीमारी का ही पता नहीं चल नहीं पा रहा है ।।

तो ऐसी स्थिति में शायद ये उपाय काम कर जाए और आपका बच्चा स्वस्थ हो जाए । क्योंकि एक कहावत है, कि द्वा से भी ज्यादा दुआ में ताकत होती है और वैसे भी इस कार्य को करने में कोई बहुत बड़ी रकम का व्यय तो होना है नहीं ।।

आप इस उपाय को किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को कर सकते हैं । करना ये है कि गोतमी चक्र जो संख्या में 8 आठ हो लेकर अपने पूजा स्थान में मां दुर्गा के श्रीविग्रह के सामने लाल रेशमी वस्त्र पर रखें ।।

मित्रों, श्रद्धा बड़ी प्रबल एवं प्रभावी चीज होती है । मां भगवती का ध्यान करते हुए पूर्ण श्रद्धा से कुंकुम आदि से गोमती चक्र पर तिलक करें । धूपबत्ती और दीपक प्रावलित कर यथाज्ञानेन पूजा करें ।।

धूपबत्ती उत्तम श्रेणी का होना चाहिए और उस धूपबत्ती की भभूत से भी गोमती चक्र का तिलक करना चाहिए । मा दुर्गा के बीज मन्त्र (ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे) की 11 माला जप करें ।।

जब आपका जप पूरा हो जाय तब उस गोमती चक्र में से 3 गोमती चक्र को उसी लाल कपड़े में बांधकर ताबीज का रूप देकर धूप, दीप दिखाकर बीमार व्यक्ति अथवा बच्चे के गले में पहना दें ।।

बाकि के बचे पांच गोमती चक्र को पीले वस्त्र में बांधकर बच्चे के ऊपर से 11 बार उतार कर के किसी सुनसान जगह पर गड्डा खोदकर दबा दें । बीमार व्यक्ति अथवा आपका बच्चा सदैव सुखी रहेगा ।।


  
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