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कालसर्प दोषों के द्वारा मिलनेवाले कष्ट एवं उसका सरल उपाय ।।



कालसर्प दोषों के द्वारा मिलनेवाले कष्ट एवं उसका सरल उपाय ।। Kalsarpa Dosh fal & Upay.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, मैंने अपने पहले लेख में पदम् नामक कालसर्प योग के विषय में वर्णन किया था । अब आज हम महापद्म नामक कालसर्प योग के विषय में बातें करेंगे ।।

जब कुण्डली के छठे स्थान में राहु व बारहवें स्थान में केतु बैठता है तथा बाकी के सभी ग्रह इन दोनों के बीच में बैठे हों तो महापद्म नामक कालसर्प दोष निर्मित होता है ।।

मित्रों, जिस जातक की कुण्डली में ये दोष होता है, वो जातक कर्जे में डूबा रहता है । ऐसा जातक तरह-तरह की बीमारी के कारण दवाईयों में अत्यधिक धन खर्च करता है ।।

ऐसे जातक का अकारण ही लोगों से दुश्मनी होते रहती है जिसके कारण कोर्ट कचहरी के व्यर्थ ही चक्कर लगाना पड़ता है । इस प्रकार जातक भारी कर्जे से दब जाता है ।।

इस दोष को दूर करने अथवा इन मुश्किलों से बचने का आसान उपाय है अमावस्या के दिन पितरों को शांत कराने हेतु दान आदि करें तथा कालसर्प दोष की शान्ति करवायें ।।

मित्रों, तक्षक नाम का कालसर्प योग किसी कुण्डली में तब बनता है जब सातवें स्थान में राहु व लग्न में केतु बैठा हो तथा बाकी के सभी ग्रह इन दोनों के बीच में बैठे हों ।।

ऐसे जातक का दांपत्य जीवन बहुत ही कष्टकारी बन जाता है । सप्तम में राहु मारक प्रभाव युक्त हो जाता है तथा यहां बैठकर राहु अलगाव, मतभेद एवं दांपत्य सुख में कमी करता ही है ।।

मित्रों, कुण्डली में इस प्रकार का राहु जातक को पैतृक सम्पत्ति में हिस्सा नहीं मिलने देता एवं पार्टनरशिप में धोखा तथा गुप्त रोगों से भयंकर कष्ट आदि होता है ।।

इस दोष को दूर करने अथवा इन मुश्किलों से बचने का बड़ा उपाय आसान है उपाय ये है कि नाग पंचमी के दिन सांपों को दिल खोलकर दूध पिलाएं एवं बन्धक नागों को मुक्त करवायें ।।

मित्रों, अब बात करते है, कर्कोटक कालसर्प योग की । अष्टम में राहु बैठकर कर्कोटक कालसर्प योग का निर्माण करें तो यह इसमें बैठकर दांपत्य जीवन कष्टप्रद भी बनाता है ।।

इस राहू के वजह से वैवाहिक जीवन में अलगाव अथवा तलाक की आशंका अधिक रहती है । जातक का अपने परिवारजनों से हमेशा ही विवाद भी बना रहता है ।।

मित्रों, पैतृक सम्पत्ति से भी ये राहू जातक को कुछ नहीं दिलाता है । अष्टम में राहु यदि 1, 4 एवं 8वीं राशियों में हो तो कन्या जातक को आपरेशन से संतान होना सम्भव होता है ।।

राहु अष्टम में बैठकर पेट संबंधी रोग एवं परेशानी पैदा करता है । ऐसे जातक का किसी काम में मन नहीं लगता है । इस दोष के वजह से इसका अपने पिता के साथ भी अनबन बना रहता है ।।

इसकी शान्ति हेतु सम्पुटित महामृत्युंजय मन्त्र का सवा लाख जप योग्य ब्राह्मणों से करवायें । अपने घर के दरवाजे पर स्वस्तिक एवं अन्य शुभ चिन्हों (शंख-चक्रादि) को लगायें ।।

मित्रों, हम अपने अगले लेख में घातक आदि बाकि के बचे हुए कालसर्प योगों की चर्चा उनके द्वारा मिलनेवाले कष्ट एवं उनके उपाय भी बताएँगे । तो प्लीज हमारे फेसबुक के पेज को लाइक अवश्य करें - My facebook Page.

बृहत्पाराशर होराशास्त्रम् के 19वें अध्याय में वर्णित अनेकयोगाध्यायः में ज्योतिष के सभी महत्वपूर्ण योगों का विस्तृत वर्णन किया गया है । जातक के जीवन में इन योगों का क्या असर होता है, इस बात का विस्तृत वर्णन हम कर रहे हैं । तो आइये जानें इस विडियो टुटोरियल में शँख योग एवं उसके फल के विषय में - शँख योग एवं उसके फल 


  
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