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माँ दुर्गा के रूप, उनके भोग तथा कलश स्थापन एवं पूजन की सरल विधि ।। Navratri Poojan And Kalash Sthapan Vidhi.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, कल से बासन्तिक नवरात्रि का आरम्भ हो रहा है । कल से शुरू हो रहे "नव वर्ष" "विक्रम संवत 2073" की आप सभी को हमारे बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र, सिलवासा के तरफ से हार्दिक शुभकामनायें ।।

माता की पहली शक्ति का नाम शैलपुत्री है जो की हिमालय की कन्या पार्वती की रूप हैं । माँ शैलपुत्री को पायस अर्थात खीर का भोग लगाकर माँ को प्रसन्न किया जा सकता है ।।

मित्रों, माँ की दूसरी शक्ति का नाम ब्रह्मचारिणी है जो परब्रह्म परमात्मा का साक्षातकार करवाने वाली है । इन्हें प्रसन्न करने कें लिये खीर, गाय के घी एवं मिश्री का भोग लगाया जाता है ।।

तीसरी शक्ति का नाम चन्द्रघंटा है जिनका मुख चंद्रमा की कांति कें समान शोभित हो अथवा चन्द्रमा जिनकी घंटा में हो उस माँ चंद्रघंटा को केला, दूध, माखन एवं मिश्री का भोग अत्यन्त प्रिय है ।।

मित्रों, माँ की चौथी शक्ति का नाम "कूष्मान्डा" है सारा संसार जिसके उदर में निवास करता है । इनको भोग के रूप में पेठा, नारियल एवं मखाना अत्यन्त प्रिय है ।।

पाँचवी शक्ति "स्कन्दमाता" के नाम से विख्यात है जिनको शास्त्रो कें अनुसार भगवान कार्तिकेय को जन्म देने वाली (जननी) माता के नाम से भी जाना जाता है ।।

मित्रों, माँ स्कन्दमाता को प्रसन्न करने के लिये उनका प्रिय भोग शहद एवं मालपुआ अर्पित करना चाहिए एवं षोडशोपचार से विधि-विधान पूर्वक पूजन करना चाहिए ।।

माँ की छठवी शक्ति का नाम कात्यायनी है शास्त्रानुसार महर्षि कात्यायन के अप्रतिम तेज सें माँ कात्यायनी को उत्पन्न होने वाली माँ को भोग के रूप में शहद एवं खजूर अत्यन्त प्रिय है ।।

मित्रों, माँ की सातवीं शक्ति का नाम "माँ कालरात्री" है जिन्हें समस्त सृष्टि का संहार करने वाली बताया गया है । भोग के रूप में माँ को अंकुरित चने एवं अंकुरित मूँग अत्यन्त प्रिय है ।।

आठवीं शक्ति "माँ महागौरी" हैं भगवान शिव के कहने पर माँ महाकाली ने तपस्या कर ब्रह्मदेव सें अपने लिए गौर वर्ण का वरदान माँगा था । माँ महागौरी को नारियल, खिचड़ी एवं खीर का भोग बहुत ही प्रिय है ।।

मित्रों, माँ की नवीं शक्ति का नाम "सिध्दीदात्री" है । अपने भक्तों को अणिमा, लघिमा, महिमा, प्राप्ति, प्राकम्य, ईशित्व, वशित्व एवं कामावसायिता इन आठ प्रकार की सिद्धियाँ देती हैं ।।

माता सिद्धिदात्री को भोग के रूप में पोहा अर्थात चूड़ा, दही, पेड़ा एवं हलवे का भोग अत्यन्त प्रिय है । आप बहुत से परेशानियों सें ग्रसित हैं तो इन नव दिनों में माताओं के रुचिनुसार भोग अर्पित करें ।।

सभी माताओं को नवरात्री में भक्तिभाव सें भोग अर्पित करें तथा उपवास पूर्वक पूरी श्रद्धा एवं समर्पण भाव से पूजन-अर्चन करें तो उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं ।।

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कलश स्थापन का शुभ मुहूर्त एवं विधान ।।

मित्रों, कल घट स्थापन अथवा नवरात्रि में माँ के स्थापन का सबसे अच्छा मुहूर्त "अभिजीत मुहूर्त" है । यह मुहूर्त कल दोपहर में सिलवासा के रेखांश के अनुसार 12.04 से 12.54 pm तक है ।।

चौघड़ियों के हिसाब से सुबह ०८.०० बजे से ०९.३४ बजे तक लाभ एवं ०९.३४ से ११.०७ तक अमृत है । दोपहर १२.४० से १४.१४ तक शुभ चौघडियाँ है इनमें घट स्थापन करना सर्वोत्तम रहेगा ।।

मित्रों, जिनका दिन में अपने कार्य की व्यस्तता के वजह से दिन में समय न मिले वो सायंकालीन चल चौघडियाँ जो कि १७.२१ से १८.५४ बजे तक है उसमें कर सकते हैं ।।

भक्ति के लिए समय का कोई प्रतिबन्ध नहीं होता और नवरात्री जैसे अवसरों पर तो मुहूर्त की कोई बात नहीं होती । फिर भी अच्छा मुहूर्त ज्यादा फल अवश्य प्रदान करता है ।।

मित्रों, नवरात्र में क्यों करें घटस्थापन ? किसी भी पूजन में घटस्थापन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है । घटस्थापना के बिना किसी भी पूजन कार्यक्रम को सफल नहीं माना जाता है ।।

मंगल कार्यों में हमारी सनातन व्यवस्था के अनुसार घट में इस सृष्टि के रचियता भगवान ब्रह्मा का निवास हैं । घटस्थापन से सभी देवी-देवताओं का पूजन हो जाता है ।।

घटस्थापन नवरात्रि में करने का अभिप्राय ये होता है, कि माता के साथ ही सभी देवताओं का पूजन भी एक साथ एक ही घट के माध्यम से हो जाता है ।।

शास्त्रानुसार मान्यता यह है कि शक्ति और ऊर्जा के लिए दीप में अग्निदेव को प्रतिष्ठित करें और कलश के अन्दर जल का होना अनिवार्य होता है ।।

कलश में जल, चंदन, पंच-पल्लव, पंचामृत, दूर्वा, सुपारी, साबुत हल्दी, कुशा एवं गोशाला की मिट्टी डालें । घट के नीचे मिट्टी में सप्तधान्य मिलाकर उसपर ऊपर जौ एवं गेहूं दोनों को मिलाकर बोना चाहिए ।।

मित्रों, कलश के उपर नारियल की स्थापना सदैव इस प्रकार करनी चाहिए कि उसका मुख आपकी तरफ रहे । जहाँ भी आप कलश स्थापन करें स्थल शुद्ध हो एवं घर का ईशान कोण हो तो सर्वोत्तम ।।

माता जानकी जी ने गौरी माँ की उपासना से ही भगवान श्रीराम को प्राप्त किया तथा माँ सीता की भक्ति से प्रभु श्री हनुमान जी आठों सिद्धियों और नौ निधियों को देने वाले बन गए ।।

विद्वानों का मानना है, कि यदि नवरात्रि की उपासना यदि श्री हनुमान महाराज की अध्यक्षता में की जाये तो माता भगवती की पूर्ण कृपा तत्काल साधक को प्राप्त होती है ।।
 मित्रों, नवरात्रि में भगवान श्रीराम एवं रावण ने भी चण्‍डी पाठ अर्थात दुर्गा सप्‍तशती की पाठ की थी । लंका विजय के लिए ब्रह्माजी ने प्रभु श्रीराम से माता भगवती का पूजन कर देवी को प्रसन्न करने को कहा ।।


रावण का वध अर्थात ब्रह्महत्या का दोष, शिवभक्त की हत्या अर्थात शिव का कोप, इस प्रकार की कई अनचाही परिस्थितियों से बचने के लिए ही ब्रम्‍हाजी ने भगवान राम को माता चण्‍डी की प्रशन्नता आवश्यक बताया ।।

दूसरी ओर रावण ने भी अमरता एवं विजय कामना से वही चंडी पाठ प्रारंभ किया था । पाठ के लिए महान एवं विद्वान् ब्राम्‍हणों को नि‍युक्‍त किया था ।।

परन्तु श्रेष्ठ ब्राह्मणों को हनुमान जी द्वारा भ्रमित होकर शब्दों के हेर-फेर के कारण गलत उच्‍चारण से देवी रुष्ट हो गईं और रावण को अमरता के स्‍थान पर उसका सर्वनाश करवा दिया ।।

इसलिए चण्‍डी पाठ शुद्ध उच्चारण के साथ ही करना चाहिए । अगर आपसे न हो तो किसी श्रेष्ठ विद्वान ब्राह्मणों से पाठ करवायें । अथवा हिन्दी में ही करें वो श्रेष्ठ फलदायी होगा ।।

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।। नारायण नारायण ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।

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