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पुत्र या पुत्री आपकी कुण्डली के अनुसार योग ।। Apaki Kundli Ke Yoganusar Putra Or Putri.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,
Lord Shiva.

मित्रों, जैसा की मैंने अपने पिछले लेख में बताया था, कि अपने अगले लेख में इस विषय पर चर्चा करूँगा, कि जन्मकुण्डली देखकर कैसे जाने की हमें सन्तान अगर होगा तो पुत्र होगा या फिर पुत्री ? तो आज हम इसी विषय में विस्तृत चर्चा करेंगे ।।

अगर आप ग्रहों के लिंग, उनके स्वभाव, उनके उच्च-नीचादि स्थितियों तथा ग्रह मैत्री को अच्छी प्रकार समझ गए हैं, तो इस विषय को समझने में आपको कोई कष्ट नहीं होगा कोई तकलीफ नहीं होगी आप आसानी से इस बात को समझ जायेंगे ।।

मित्रों, चलिये इस विषय को गंभीरतापूर्वक देखने का प्रयास करते हैं । ज्योतिष शास्त्रानुसार सूर्य, मंगल और गुरु ये तीनों पुरुष ग्रह हैं । शुक्र और चन्द्रमा ये दोनों स्त्री ग्रह हैं जबकि बुध और शनि को नपुंसक ग्रह माना गया है ।।
 Bhagwan Shiva.
जन्मकुण्डली में यदि संतान के लिए योग कारक ग्रह यदि कोई पुरुष ग्रह हो तो पुत्र देता है । परन्तु यदि सन्तान का योगकारक ग्रह कोई स्त्री ग्रह हो तो कन्या रत्न का सौभाग्य प्राप्त होता है ।।

मित्रों, यदि शनि और बुध में से कोई सन्तान के लिए कुण्डली में योग कारक हो कर विषम राशि में बैठा हों तो पुत्र व सम राशि में हो तो पुत्री प्रदान करते हैं । सम और विषम गणित के आधार पर ही तय किया जाता है ।।

परन्तु यदि सप्तमान्शेष पुरुष ग्रह हो तो पुत्र तथा स्त्री ग्रह हो तो कन्या सन्तति का सुख मिलता है । गुरु के अष्टक वर्ग में गुरु से पांचवें स्थान पर पुरुष ग्रह बिंदु दायक हों तो पुत्र, स्त्री ग्रह बिंदु दायक हो तो पुत्री का सुख प्राप्त होता है ।।

मित्रों, पुरुष और स्त्री ग्रह दोनों ही योग कारक हों तो पुत्र व पुत्री दोनों का ही सुख प्राप्त होता है । पंचम भाव तथा पंचमेश पुरुष ग्रह के वर्गों में हो तो पुत्र व स्त्री ग्रह के वर्गों में हो तो कन्या सन्तति की प्रधानता रहती है ।।
 Bhagwan Shiva.

पंचमेश के भुक्त नवांशों में जितने पुरुष ग्रह के नवांश हों उतने पुत्र और जितने स्त्री ग्रह के नवांश हों उतनी ही पुत्रियों का योग बनता है । जितने  नवांशों के स्वामी कुंडली में अस्त, नीच एवं शत्रु राशि में पाप युक्त या दृष्ट होंगे उतने पुत्र या पुत्रियों की हानि होगी ।।

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