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ज्योतिष में संतान हीन योग एवं सन्तान प्राप्ति के उपाय ।। SantanHina Yoga And Prapti Ke Upaya.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, ज्योतिष एक ऐसा विषय है, जो मानव जीवन के हर एक पहलू को स्पष्ट करता है । आज हम जिन मित्रों के जीवन में सन्तान सुख का अभाव है, उनके लिए कुछ ख़ास बातें लेकर आये हैं । आज हम इसी विषय में विस्तृत चर्चा करेंगे, कि सन्तान न होने देने वाले योग आपकी कुण्डली में है ।।

अगर है तो क्या आपका जीवन नि:संतान हिकार ही गुजरेगा अथवा इसका भी कोई इलाज है ? आज हम ज्योतिष के कुछ ऐसे योगों की चर्चा करेंगे जो सन्तान में बाधा उत्पन्न करने वाले हैं । तो आप अपनी कुण्डली से मिलान करें, क्या आपकी कुण्डली में ये योग हैं और अगर हैं तो इसका उपाय क्या है ? ।।

मित्रों, आपकी कुण्डली के लग्न एवं चंद्रमा से पंचम भाव में कोई निर्बल अथवा पाप ग्रह है या फिर कोई अस्त ग्रह, शत्रु राशी का, नीच राशि का होकर नवांश में स्थित हों अथवा आपकी कुण्डली का पंचम भाव पाप कर्तरी योग से पीड़ित हो तो सन्तान सुख का जीवन में अभाव होता है ।।

कुण्डली का पंचमेश और सन्तान कारक ग्रह गुरु अगर अस्त हो, शत्रु अथवा नीच राशि के नवांश में हो, लग्न से 6, 8 या 12 वें भाव में स्थित हों, गुरु से पंचम में पाप ग्रह हों अथवा षष्टेश अष्टमेश या द्वादशेश का सम्बन्ध पंचम भाव या उसके स्वामी से होता हो तो सन्तान सुख का अभाव होता है ।।

मित्रों, यदि सप्तमांश कुण्डली के लग्न का स्वामी जन्म कुंडली में 6, 8 या 12 वें भाव में हो, अस्त हो, शत्रु अथवा नीच राशि के नवांश में स्थित हों तो संतान प्राप्ति में बाधा होती है । मित्रों, कुण्डली में जितने अधिक कुयोग होंगे उतनी ही अधिक कठिनाई संतान प्राप्ति में होगी ।।

यदि कुण्डली के पंचम भाव में अल्पसुत राशि जैसे - वृष, सिंह, कन्या या वृश्चिक हो तथा उपरोक्त योगों में से कोई योग भी घटित होता हो तो बहुत धर्म-कर्म के बाद बड़ी ही कठिनाईयों से संतान की प्राप्ति होती है ।।

मित्रों, यदि गुरु के अष्टक वर्ग में गुरु से पंचम स्थान शुभ बिंदु से रहित हो तो संतानहीनता होती है । सप्तमेश निर्बल हो कर पंचम भाव में हो तो संतान प्राप्ति में बहुत बड़ी बाधा होती है ।।

कुण्डली में यदि गुरु, लग्नेश, पंचमेश और सप्तमेश ये चारों ही बलहीन हों तो सन्तान की उम्मीद ना के बराबर होती है । गुरु, लग्न व चन्द्र से पांचवें स्थान पर कोई पाप ग्रह हों तो सन्तान की उम्मीद ना के बराबर होती है ।।

मित्रों, आपकी कुण्डली में यदि पञ्चम भाव का मालिक ग्रह पाप ग्रहों के बीच में बैठा हो तथा पञ्चम भाव में कोई पाप ग्रह हो एवं किसी शुभ ग्रह की दृष्टि भी न हो तो संतान प्राप्ति में बहुत बड़ी बाधा होती है ।।

मित्रों, इन सभी दोषों को दूर कर जीवन में सन्तान सुख का आनंद प्राप्त करने के लिए प्रदोष का व्रत करें और शुद्ध गाय के दूध से प्रदोष के दिन ही किसी योग्य विद्वान् वेदपाठी ब्राह्मण से रुद्राभिषेक करवाएं, सन्तान सुख अवश्य ही प्राप्त होगी ।।

आज के लिए इतना ही, अब हम अपने अगले लेख में आपकी कुण्डली में पुत्र का सुख अथवा कन्या का सुख है ? ये कैसे जानें, इस विषय पर विस्तृत चर्चा करेंगे । तो प्लीज मेरे Astro Classes, Silvassa. के फेसबुक के ऑफिसियल पेज को प्लीज लाइक करें और पढ़ते रहें ।।
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।। नारायण नारायण ।।

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