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एक फुल चढ़ाने से सौ स्वर्ण मुद्राओं के दान के बराबर फल मिलता है ।। 1Ful Se 100 Swarna Mudraon Ka Fal.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,
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मित्रों, भगवान शिव बहुत जल्द प्रशन्न होनेवाले देवता हैं । भगवान शिव की प्रशन्नता मनुष्य के सभी पापों का हरण कर लेती है । भगवान शिव की प्रशन्नता सम्पूर्ण भोगो को सहज ही मनुष्य को प्रदान कर देती है ।।

फुल चढाने से भगवान शिव बहुत जल्द प्रशन्न होते हैं इसलिये शिव पर फुल चढाने का बहुत ही महत्त्व है । कहा गया है, कि एक तपस्वी, शीलवान, वेदों में निष्णात एवं सर्वगुण सम्पन्न ब्राह्मण को सौ स्वर्ण मुद्राओं के दान का जो फल होता है, वो फल शिव को सौ पुष्प चढ़ा देने मात्र से मिल जाता है ।।

मित्रों, ये जानना जरुरी है, कि कौन सा पुष्प भगवान शिव को प्रिय है ? जिसके चढ़ाने से इस प्रकार का सम्पूर्ण फल प्राप्त हो सके । इस बात की जानकारी अत्यावश्यक है, इसलिये आज हम इसी विषय में चर्चा करेंगे ।।

भगवान विष्णु को जितने पुष्प-पत्रादि चढ़ाये जाते हैं, वे सभी भगवान शिव को प्रिय हैं । परन्तु केवड़े (केतकी) का फुल जो भगवान विष्णु पर तो चढ़ता है, परन्तु भगवान शिव पर केतकी का फुल नहीं चढ़ता ।।
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मित्रों, हमारे शास्त्रों ने कुछ फूलों के चढ़ाने से मिलनेवाले फल का तारतम्य बतलाया है । दस स्वर्ण मुद्राओं के दान के बराबर एक आक के फुल चढ़ाने का फल मिलता है । हजार आक के फुल के बराबर एक कनेर के चढ़ाने का फल होता है ।।

हजार कनेर के फुल के बराबर एक बिल्वपत्र चढ़ाने का फल होता है । हजार बिल्वपत्र के बराबर एक गुमा (द्रोण-पुष्प) के फुल से, हजार गुमाफुल के बराबर एक चिडचिडा, हजार चिडचिडा के फुल के बराबर एक कुशा के फुल चढ़ाने का फल होता है ।।

मित्रों, हजार कुशापुष्प के बराबर एक शमी का पत्र, हजार शमी पत्तों से बढ़कर एक नीलकमल, हजार नीलकमलों से बढ़कर एक धतूरा, हजार धतुरों से भी बढ़कर एक शमी का फुल शिव को चढ़ाना विशिष्ट फलदायी माना गया है । वैसे पुष्पों में सर्वश्रेष्ठ नीलकमल को ही माना गया है ।।(सर्वासां पुष्पजातीनां प्रवरं नीलमुत्पलम्){वीरमित्रोदय, पूजाप्रकाश)

व्यासजी ने कनेर की श्रेणी में ही चमेली, मौलसिरी, पाटला, मदार, श्वेतकमल, शमीपुष्प और बड़ी भटकटैया को रखा है । धतूरे की ही श्रेणी में नागचम्पा तथा पुंनाग के पुष्पों को भी रखा है । शास्त्रानुसार बक-बकुल (मौलसिरी) के पुष्प को ही शिव पूजन हेतु श्रेष्ठ माना है ।।
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मित्रों, भविष्यपुराण में भगवान शिव पर चढ़ाने हेतु उपरोक्त सभी पुष्पों को श्रेष्ठ बताया है । परन्तु कदम्ब, सारहीन फुल या कठूमर, केवड़ा, शिरीष, तिन्तिणी, मौलसिरी, कोष्ठ, कैथ, गाजर, बहेड़ा, कपास, गंभारी, पत्रकंटक, सेमल, अनार, धव तथा केतकी आदि पुष्प निषिद्ध बताये गये हैं ।।

इसके अलावा बसंत ऋतू में खिलनेवाले कंद- विशेष, कुंद, जूही, मदन्ति, शिरीष सर्ज और दोपहरिया के फुल भगवान शिव पर नहीं चढ़ाना चाहिये । इस बात का विस्तृत उल्लेख वीरमित्रोदय नामक ग्रन्थ में मिलता है ।।

कदम्ब, बकुल और कुंद इन तीन पुष्पों के लिये ऊपर मना किया गया है । परन्तु शास्त्रों में कहीं-कहीं इस प्रकार मिलता है - "कदम्बकुसुमै: शम्भुमुन्मत्तै: सर्वसिद्धिभाक्।" अर्थात् कदम्ब और धतूरे के फुल से पूजा करने से शिव समस्त सिद्धियाँ दे देते हैं ।।

इसी प्रकार कई जगहों पर इस बात पर कई प्रकार से बहुत ही जोर दिया गया है । इस "ना" "हाँ" का जबाब वीरमित्रोदय, पुजाप्रकाश पृष्ठ २१६, में मिलता है । "सामान्यतः कदम्बकुसुमार्चनं यत्तद् वर्षर्तुविषयम् । अन्यदा तू निषेधः ।।"

अर्थात् "कदम्बैश्चम्पकैरेवं नभस्ये सर्वकामदा" । भाद्रपद में कदम्ब और चम्पा से शिव पूजन से सभी इच्छाएँ पूर्ण हो जाती हैं । इसके अनुसार भाद्रपद में विधी चरितार्थ हो जाती है और अन्य मासों में निषेध चरितार्थ हो जाता है । इसलिये "तेन न पूर्वोत्तरवाक्यविरोधः ।।"
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मित्रों, आगे के आनेवाले लेखों में हम बाकी के देवताओं की विशिष्ट कृपा प्राप्ति हेतु किस पुष्प से करें पूजन ? इस विषय पर विस्तृत चर्चा करेंगे । इसलिये ज्योतिष के गूढ़-से-गूढ़ ज्ञान एवं अन्य हर प्रकार के टिप्स & ट्रिक्स के लिए हमारे फेसबुक के ऑफिसियल पेज को अवश्य लाइक करें - Astro Classes, Silvassa.

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