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ज्योतिष एवं वास्तु के अनुसार दरिद्रता का मुख्य कारण ।।



ज्योतिष एवं वास्तु के अनुसार दरिद्रता का मुख्य कारण ।। Astrology, Vastu And Daridrata.


हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,




मित्रों, ज्योतिष हमारे पूर्वज ऋषियों द्वारा अनुसन्धानित विषय है । वे ऋषिजन जो हम सभी मनुष्य मात्र के पूर्वज थे । उनके द्वारा हम सभी के कल्याण हेतु यह विषय हमारे लिये प्रदान किया गया । अप्रत्यक्षाणि शास्त्राणि विवादस्तेषु केवलम् । प्रत्यक्षं ज्यौतिषम् शास्त्रं चन्द्रार्कौ यत्र साक्षिनौं ।। अर्थात ज्योतिष शास्त्र प्रत्यक्ष विषय है, जिसके साक्षी सूर्य और चन्द्रमा आदि ग्रह प्रत्यक्ष हैं ।।

इस विषय से हम अपने जीवन के किसी भी पहलू पर विचार करके सुखी हो सकते हैं । हम अपने विषय में जो भी जानना चाहें जान सकते हैं । जैसे शिक्षा, नौकरी, व्यापार, आय, व्यय, रोग, मृत्यु और कर्ज के विषय में भी । हमारे जीवन में कितना तक कर्ज होगा ? अगर हुआ तो उतरेगा की नहीं ? अगर हमें आवश्यकता पड़ी तो हमें कर्ज मिलेगा की नहीं इत्यादि ।।


मित्रों, आज हम ज्योतिष एवं वास्तुशास्त्र के अनुसार हमारे जीवन में कर्ज क्यों होता है और इसको निवृत्त होने के कोई योग कैसे बनते हैं ? इस विषय पर गम्भीरता से विचार करेंगे । साथ ही मैं ये भी बता दूँ, की पहले मैंने कई लेख इस विषय पर लिखा है कर्ज उतारने के उपाय । किसी पूजा, अनुष्ठान अथवा किसी स्तोत्र या मन्त्र विशेष के जप से कर्ज कैसे उतारा जाय इस विषय में मैंने बहुत से आर्टिकल लिखे हैं ।।



हम मनुष्य चाहे फिर वो कोई छोटा या बड़ा आदमी ही क्यों न हो किसी न किसी प्रकार के कर्ज से दबा हुआ ही दीखता है । कोई मकान, कोई गाड़ी, कोई शादी, कोई संतान, कोई गृह उपोयोगी वस्तुओं, कोई शिक्षा, कोई व्यापार आदि किसी न किसी कारण से कर्ज लेता ही है । परन्तु इनमें से अधिकांशतः व्यक्तिओं का पूरा जीवन कर्ज में ही गुजर जाता है वह लाख चाहकर भी कर्ज नहीं चुका पाता है ।।


मित्रों, ऐसा नहीं है की कर्ज लेकर व्यापार-धन्धा आदि करना कोई गुनाह है । परन्तु न देना गुनाह अवश्य ही हो जाता है । ऐसा भी नहीं की लोग कर्ज देना नहीं चाहते (कुछेक विकृत मानसिकता के लोगों को छोड़कर) । परन्तु कई लोग चाहकर भी अपना कर्ज नहीं उतार पाते । इसके वास्तविक कारण ज्योतिष के अनुसार जन्मकुण्डली के दोष हो सकते हैं अथवा वास्तुशात्र के अनुसार घर या फिर व्यापारिक प्रतिष्ठान में भी कोई दोष हो सकता है ।।


अब मैं आपलोगों को ज्योतिष के अनुसार कुछ योग बताता हूँ, जिसके वजह से ऐसी स्थिति बनती है । किसी व्यक्ति के जन्मकुण्डली के छठे भाव से रोग, ऋण, शत्रु, मामा आदि ननिहाल पक्ष तथा दुर्घटना आदि के विषय में विचार किया जाता है । ऋणग्रस्तता के लिए इस भाव के अलावा दूसरा भाव जो धन का है, दशम-भाव जो कर्म व रोजगार का है, एकादश भाव जो आमदनी का है तथा द्वादश भाव जो व्यय का भाव है, उसके उपर भी विचार किया जाना चाहिये ।।





मित्रों, आइये कुछ ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्मकुण्डली में इस प्रकार के योग होते हैं जो व्यक्ति को ऋणग्रस्त बनाते हैं उन्हें देखते हैं । यदि षष्ठेश पाप ग्रह होकर 8 वें अथवा 12 वें घर में बैठा हो तो जातक ऋणग्रस्त रहता है उसका कर्ज उतर नहीं पाता । षष्ठेश यदि हीन-बली होकर पापकर्तरी योग से ग्रसित हो अथवा पाप ग्रहों से देखा जा रहा हो तो भी कर्ज नहीं उतर पाता ।।

यदि कुण्डली में 12 वां भाव प्रबल हो और दूसरा तथा दशवाँ भाव कमजोर हो तो जातक अत्यधिक खर्चीला होता है । ऐसा जातक "ऋणं कृत्वा घृतं पिबेत्" का अनुगामी होता है । वह  निरंतर कर्ज लेकर ही अपनी जरूरतों को पूरा करने में लगा रहता है । इस प्रकार के योग जिनकी कुण्डली में हो वो जातक चाहकर भी अपना लिया हुआ कर्ज उतार नहीं पाता ।। 


मित्रों, कुछ घर अथवा ऑफिस के अन्दर वास्तु दोष भी होते हैं, जो हमें अपने जीवन में आगे बढ़ने से रोकते हैं । जैसे कर्ज लेकर यदि व्यक्ति कोई व्यापार करे तो वो इन दोषों के वजह से असफल हो जाता है और वहीँ-के-वहीँ रह जाता है । अब मैं आपलोगों को कुछ ऐसे ही वास्तु दोषों से अवगत करवाता हूँ, जिसके वजह से ऐसी स्थिति का निर्माण होता है ।।



यदि आपके घर अथवा ऑफिस के पूर्व एवं उत्तर दिशा की दीवारें बड़ी और ऊँची हो तथा दक्षिण दिशा के दीवार की ऊँचाई कम हो तो ऐसे व्यक्ति का व्यय सदैव ही उसके आय से अधिक होता है और कर्ज लेना ही पड़ता है । यदि किसी भवन के दक्षिण-पश्चिम एवं दक्षिण दिशा में भूमिगत पानी का टैंक, कुआं अथवा नल हो तो उस घर में सदैव दरिद्रता का वास होता है ।।


मित्रों, बंगलों अथवा बहुमंजिली इमारतों के बीच दबे हुये मकान में रहने वाले लोग भी घोर गरीबी एवं कर्ज में फंसे रहते हैं । अपने भवन के अन्दर अथवा बाहर सीढ़ी कभी भी पूर्व या उत्तर की दीवार से सटाकर न चढ़ायें । ध्यान रखें की सीढ़ी सदैव दक्षिणी या पश्चिमी दीवार पर ही वजन लेकर चढ़ाया जाय । ऐसा न करने से आमदनी एवं धनलाभ के सभी मार्ग बंद हो जाते हैं और कर्ज बढ़ता ही चला जाता है ।।



सीढ़ी किसी भी घर के दरवाजे के सामने से उतरता हुआ भी न हो इस बात का भी ध्यान रखें । उतरती हुई सीढ़ी घर की सम्पन्नता को लेकर घर से बाहर का रास्ता देख लेती है । घर के पूर्वी तथा उत्तरी दीवार पर भूलकर भी कोई मशीनरी, बड़े कंस्ट्रक्शन के नक़्शे अथवा किसी इन्डस्ट्रीज की फोटो या फिर इस प्रकार का कोई कैलेंडर आदि न चिपकायें । इस प्रकार की वस्तुयें कर्ज, हानि एवं व्यापार अथवा आपके कार्य में घाटा करवाने के लिये पर्याप्त हो जायेंगी ।।



  
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