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सूर्य से सटीक फलादेश की सरल विधी ।। Surya Se Satik Faladesh Ki Vidhi.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,


मित्रों, यदि कोई व्यक्ति आपके पास आकर अपने पिता के विषय में कोई प्रश्न करता है, तो आप वहां किस ग्रह की स्थिति को देखेंगे ? अगर आपको इस बात की जानकारी है, कि पिता का कारक ग्रह सूर्य होता है तो आपको एक क्षण भी नहीं लगेगा और आप सूर्य की स्थिति को देखेंगे ।।

इसीलिये अगर आप ज्योतिष का अध्ययन कर रहे हैं, तो सर्वप्रथम आपको सभी ग्रहों का सम्पूर्ण रूप से अध्ययन करना चाहिये । इसी क्रम में आप कौन सा ग्रह किस राशि का स्वामी है ये भी जान लेंगे । तो इसके बाद अब केवल भावों का अध्ययन बाकि रह जायेगा ।।

मित्रों, अगर आप एक कुशल ज्योतिषी बनना चाहते हैं, तो आपको ग्रहों के सम्पूर्ण अध्ययन के बाद द्वादश भावों का भी गहराई से अध्ययन करना चाहिये । साथ ही भावों के कारक ग्रहों के विषय को भी स्पष्टता से जान लेना आवश्यक होता है ।।


आज हम आपलोगों को सूर्य के विषय में बतलाते हैं । जिस जातक के पिता सामाजिक प्रतिष्ठा से सम्पन्न हों तथा जातक स्वयं भी सामाजिक प्रतिष्ठा से सम्पन्न हो तो निश्चित रूप से जातक सूर्य प्रभावी व्यक्ति है । अर्थात सूर्य उसका निश्चित रूप से सम्पूर्ण कारक ग्रह होगा ।।

मित्रों, अब हम सूर्य प्रभावी जातकों के कुछ और लक्षणों को देखते हैं । सूर्य पिता, आत्मा, समाज में मान, सम्मान, यश, कीर्ति, प्रसिद्धि एवं प्रतिष्ठा का कारक ग्रह है । सूर्य सिंह राशि का स्वामी ग्रह है । जन्मकुण्डली में सूर्य उच्च का अथवा श्रेष्ठ स्थिति में रहेगा तो इन सभी से सम्पन्न रखेगा ।।

परन्तु यदि जन्मकुण्डली में सूर्य अशुभ होगा तो जातक को पेट, आँख, हृदय का रोग हो सकता है । साथ ही सरकारी कार्य में बाधा भी उत्पन्न होते रहता है । इसके एक और लक्षण यह है कि मुँह में बार-बार बलगम इकट्ठा हो जाता है ।।


मित्रों, किसी भी जातक की सामाजिक हानि, अपयश, मनं का दुखी होना या असंतुस्ट होना, पिता से विवाद या वैचारिक मतभेद ये सभी कारण जन्मकुण्डली में सूर्य के पीड़ित होने के सूचक है ।।

इस प्रकार की स्थितियों में जातक को समाधान भी चाहिये होता है । ऐसे में अब आपको देखना ये है, कि ग्रहों के नियंत्रक अथवा कारक भगवान का स्वरुप कौन सा है । जैसे सूर्य भगवान राम के कुल देवता हैं । ऐसे में भगवान राम की आराधना से सूर्य की स्थिति को ठीक किया जा सकता है ।।

मित्रों, एक तो स्वयं ग्रहों की उपासना अथवा उससे सम्बन्धित देवताओं की उपासना से ग्रहों की स्थिति को बेहतर किया जा सकता है । आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ, सूर्य को अर्घ्य देना, गायत्री मंत्र का जप अथवा ताँबा, गेहूँ एवं गुड का दान करने से अशुभ सूर्य से शुभ फल प्राप्त किया जा सकता है ।।


ग्रहों से सम्बंधित रत्न, ग्रहों से सम्बंधित धातु, ग्रहों से सम्बंधित खाद्य पदार्थ, आदि के सेवन अथवा दान से ग्रहों की स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है । ऐसे में सूर्य को ठीक करने के लिये प्रत्येक कार्य का आरम्भ मीठा खाकर करें ।।

मित्रों, ताबें के एक टुकड़े को सूर्य की दशा-अन्तर्दशा में अपने पास, अपने साथ रखें । ॐ रं रवये नमः या ॐ घृणी सूर्याय नमः १०८ बार (१ माला) जाप करे। अथवा वैदिक मन्त्र का भी जप यथ समय अनुसार आप स्वयं कर सकते हैं अथवा ब्राह्मणों से करवा सकते हैं ।।

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।।। नारायण नारायण ।।।

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