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संतान दोष एवं उसके निवारण के कुछ सरल उपाय भाग-४.।। Santan Dosh And Nivaran Vidhi Part-4.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,


मित्रों, सन्तान दोष किस ग्रह के दोष के वजह से बन रहा है तो कौन सा उपाय करके हम अपने जीवन में सन्तान प्राप्ति कर सकते हैं, हमने इस क्रम में अबतक सूर्य एवं चन्द्रमा से निर्मित दोष, उसके निवारण एवं सन्तान प्राप्ति के उपायों का विस्तृत वर्णन कर दिया है । अब हम आज के अपने इस लेख में इसी क्रम में अगले ग्रह मंगल से लेकर आगे के ग्रहों के विषय में विस्तृत वर्णन करेंगे ।।

मैं अपने लेखों में पूर्ण प्रयत्न करता हूँ, कि ज्योतिष के विभिन्न ग्रंथों के आधार पर ही पूर्ण प्रमाणिक और उत्तमोत्तम योगों का वर्णन करूँ । लेखन में भी पूरा प्रयत्न रहता है, कि किसी प्रकार की कोई त्रुटी न रहे । फिर भी हम भी एक इन्सान ही हैं, अगर त्रुटियाँ दिखे तो हमें बतायें और आपको अच्छा लगे तो दूसरों को बतायें । तो चलिए आज कुछ और सर्वोत्तम श्रेणी के ज्योतिषीय योग जो की सन्तान सुख से सम्बंधित है, की चर्चा कर लेते हैं ।।


मित्रों, मैंने अपने पिछले लेख में बीज तथा क्षेत्र के विषय में स्पष्टता से बतलाया था । बीज तथा क्षेत्र का विचार करने पर जिस जातक के सन्तानोत्पत्ति की अक्षमता सिद्ध होती हो और उन पर ग्रहों की शुभ युति अथवा दृष्टि हो तो शान्ति उपायों (पूजा-पाठ आदि) से एवं औषधि उपचार से लाभ होता है । शुक्र से पुरुष की तथा मंगल से स्त्री की संतान उत्पन्न करने की क्षमता का विचार करना चाहिये ।।

सूर्यादि ग्रह अपनी नीच राशि, शत्रु आदि की राशि में अथवा नवांश में, पाप युक्त, पाप दृष्ट, अस्त अथवा त्रिक भावों का स्वामी हो कर पंचम भाव में हों तो जातक के जीवन में संतान बाधा होती है । योग कारक ग्रह की पूजा, दान, हवन आदि से शान्ति कराने पर इस दोष का निवारण हद तक हो जाता है । सन्तान सुख की प्राप्ति इन उपायों से हो जाता है । जैसे - फलदीपिका की बात करें, तो इस श्लोक से इस बात कि पुष्टि हो जाती है - 

एवं हि जन्म समये बहुपूर्वजन्मकर्माजितं दुरितमस्य वदन्ति तज्ज्ञाः ।।
तत्तद्ग्रहोक्तजपदानशुभक्रिया-भिस्तददोषशान्तिमिह शंसतु पुत्र सिद्धयै ।। (अध्याय-१२, पुत्रभाव फलम्, श्लो.२३.)


अर्थात् = जन्म कुंडली से यह ज्ञात होता है, कि पूर्व जन्मों के किन पापों के कारण संतान हीनता का दोष है । बाधाकारक ग्रहों या उनके देवताओं का जप, दान, हवन आदि शुभ क्रियाओं के करने से पुत्र प्राप्ति हो जाती है ।।

मित्रों, मंगल यदि आपके जीवन में आपके लिये सन्तान प्राप्ति में बाधक हो तो इसका अभिप्राय यह हुआ की आपके भाई की बददुआ, शत्रु द्वारा किया गया अभिचार प्रयोग, श्री गणेशजी की अथवा हनुमानजी की अवज्ञा के वजह से दोष है । इसकी शान्ति प्रदोष व्रत एवं भगवान राम के चरित्र रामायण का पाठ करने से हो जाता है । लाल रंग का मूंगा रत्न को सोने या ताम्बे की अंगूठी में मृगशिरा, चित्रा या अनुराधा नक्षत्र में जड़वा कर मंगलवार को धारण करें ।।

इस अंगूठी को सूर्योदय के बाद पुरुष दायें हाथ की तथा स्त्री बायें हाथ की अनामिका अंगुली में धारण करे । धारण करने से पहले "ॐ क्रां क्रीं क्रों सः भौमाय नमः" इस मन्त्र का एक माला जप अर्थात १०८ बार जप करके अंगूठी में मंगल ग्रह प्रतिष्ठा करें । धूप, दीप, लाल पुष्प, गुड एवं अक्षत आदि से पूजन कर लेवें । हो सके तो मंगलवार को नमक रहित शुद्ध एवं सात्विक भोजन के साथ व्रत रखें ।।


मित्रों, उपरोक्त मंगल के मन्त्र का जितनी अधिक संख्या में जप करे उतना फायदेमन्द सिद्ध होगा । मंगलवार को गुड, लाल रंग का वस्त्र, फल, ताम्बे का पात्र, सिन्दूर, लाल चन्दन, केसर तथा मसूर का दाल इत्यादि का दान करें । मंगल शुभफलदायी होकर आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करेंगे । अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली के अनुसार बुध ग्रह संतान प्राप्ति में बाधक हो तो इसका कारण मामा का शाप, तुलसी या भगवान विष्णु की अवज्ञा मानी जाती है ।।

इस दोष की शान्ति हेतु विष्णुपुराण का पाठ या श्रवण करना चाहिये । इसमें विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ भी फलदायी सिद्ध होता है । एक पन्ना रत्न सोने या चांदी में उसे आश्लेषा, ज्येष्ठा या रेवती नक्षत्र में जड़वाकर बुधवार को सूर्योदय के बाद पुरुष लोग दायें हाथ की तथा स्त्रियाँ अपने बायें हाथ की कनिष्टिका अंगुली में धारण करें । तुलसी को जल व दीप दान करना भी शुभ रहता है ।।


मित्रों, इसे धारण करने से पहले "ॐ ब्रां ब्रीं ब्रों सः बुधाय नमः" इस मन्त्र का कम से कम एक माला का जप करें । अंगूठी में बुध ग्रह कि प्रतिष्ठा करके धूप, दीप, लाल पुष्प, गुड तथा अक्षत आदि से पूजन करें । बुधवार का व्रत बिना नमक का करें तथा इस मन्त्र (ॐ ब्रां ब्रीं ब्रों सः बुधाय नमः) का ९००० कि संख्या में जप करें । बुधवार को कर्पूर, घी, खांड, हरे रंग का वस्त्र और फल, कांसे का पात्र तथा साबुत मूंग आदि का दान करें ।।

यदि किसी की कुण्डली में बृहस्पति संतान प्राप्ति में बाधक है तो कारण गुरु अथवा किसी ब्राह्मण का शाप हो सकता है अथवा किसी फलदार वृक्ष को काटने का दोष हो सकता है । इस दोष की शान्ति के लिये पुखराज रत्न को सोने की अंगूठी में पुनर्वसु, विशाखा तथा पूर्वा भाद्रपद आदि में से किसी नक्षत्र में जड़वाकर गुरुवार को सूर्योदय के बाद कोई पुरुष दायें हाथ की तथा स्त्रियाँ बायें हाथ की तर्जनी अंगुली में धारण करना चाहिये ।।


मित्रों, अंगूठी धारण करने से पहले इस मन्त्र का "ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः" कम से कम एक माला अर्थात १०८ बार जप करें । इस अंगूठी में गुरु ग्रह की प्रतिष्ठा करके धूप, दीप, पीले पुष्प, हल्दी तथा अक्षतादि से पूजन करें । अगर आप पुखराज धारण नहीं कर सकते तो उसके उपरत्न जैसे - सुनैला या पीला जरकन अथवा गोल्डन टोपाज भी धारण कर सकते हैं या फिर केले की जड़ गुरु पुष्य योग में निकालकर उपरोक्त विधि से सिद्ध करके धारण करें ।।

गुरूवार को नमक रहित भोजन के साथ व्रत रखें तथा इस मन्त्र (ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः) का १९००० की संख्या में जप करें । गुरूवार को घी, हल्दी, चने की दाल, बेसन, पपीता, पीत रंग का वस्त्र तथा स्वर्णादि का दान करें । फलदार पेड़ सार्वजनिक स्थल पर लगायें और ब्राह्मण विद्यार्थीयों को भोजन करा कर दक्षिणा देने तथा गुरु की पूजा सत्कार से भी बृहस्पति प्रसन्न हो कर शुभ फल देते हैं ।।


मित्रों, हम अपने अगले लेख में संतान प्राप्ति में बाधक शुक्र, शनि, राहू और केतु हों तो क्या वजह हो सकती है ? तथा इनसे बनने वाले दोषों कि शान्ति के लिये क्या करना चाहिये ? इन उपायों को कब कैसे करें तथा करने के किये कौन सा समय उपयुक्त होगा ? इस बात का विस्तृत वर्णन करेंगे ।।

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