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आपके कुण्डली का सूर्य और आपके जीवन में धन एवं प्रतिष्ठा की स्थिति ।। Kundali Ka Surya And Jivan Me Dhan And Pratishtha.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,


मित्रों, आज रविवार है, तो आज सूर्य से सम्बन्धित लेख आप सभी के लिये प्रस्तुत है । पहले हम ज्योतिष की कुछ भूमिका पर चर्चा कर लेते हैं क्योंकि ज्योतिष ही हमारा सही पथ प्रदर्शन करता है । इसके द्वारा हम जड़ चेतन आदि सभी वस्तुओं, उनकी आकृति, प्रकृति, आयु, बल, कार्य शैली तथा उसके परिणाम आदि का भी भली भांति अनुमान लगा सकते हैं । ज्योतिष के माध्यम से आकाश स्थित ग्रह नक्षत्रों के मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव के भूत, वर्तमान एवं भविष्य के फलादेश को देख, समझ, एवं जान सकते हैं ।।


ज्योतिष विज्ञान में प्राचीन ऋषि मुनियों में वशिष्ठ, जैमिनी, व्यास, अत्री, पराशर, कश्यप, शौनक, नारद, गर्ग, मारीच, मनु, अंगीरा, लोमश एवं भृगु आदि अनेक नाम हैं । साथ ही चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के काल में महान खगोल और ज्योतिष के महान विद्वान आर्यभट जिन्होंने सूर्य एवं चन्द्र के ग्रहण के सही समय को जानने की सटीक पद्दति विकसित की तथा २७ नक्षत्रों पर आधारित एक समय सारिणी तैयार करके ज्योतिष को और आगे बढ़ाया ।।


आचार्य वाराहमिहिर ने इस विज्ञान को क्रम बद्ध करके एक ब्रह्ज्जातक ग्रन्थ की रचना की । उसके बाद में ब्रह्मगुप्त, कल्याण वर्मा, चन्द्रसेन, मुंजाल, श्रीपति, श्रीधर, भट्टवोसरि, भोजराज, ब्रहमदेव, भास्कराचार्य, गणेश, नीलकंठ, मुनीश्वर, दिवाकर, नित्यानंद, बाघजी मुनि, नीलाम्भर झा, सुधाकर द्विवेदी एवं विदेशी लेखक व् विद्धवानों आदि ने अनेकों प्रसिद्ध रचनाकारों, टीकाकारों एवं समीक्षाकारों ने फलित ज्योतिष के ऊपर बहुत कुछ लिखा है ।।


ज्योतिष शास्त्र मानव जीवन को सुखी बनाने की एक अत्यंत महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कला है । क्योंकि ज्योतिष शास्त्र जन्म के समय पर ही जीवन कालीन घटनाक्रम का बोध कराने में सक्षम है । इसलिए ज्योतिष शास्त्र का पूर्णतः लाभ मनुष्य तभी उठा सकता है जब वह इसका उपयोग जन्म समय या विपत्ति आने से पूर्व या उचित समय पर करे ।।


भाग्यहीन व्यक्ति व्यर्थ के वाद विवाद में घिरे रहते हैं, जबकि भाग्यवान इसका उपयोग करके लाभ उठा लेते हैं । आज ज्योतिष शास्त्र का उपयोग प्रचलन विषयों को छोड़ कर विश्वभर में हर क्षेत्र, हर जाती एवं हरेक सम्प्रदायों के लोगों द्वारा उठाया जा रहा है । ज्योतिष शास्त्र आपको योग्य जीवनसाथी चुनने में सहायता करता है । क्योंकि सुखद वैवाहिक जीवन ही मनुष्य को समाज में सफल बनाने की योग्यता प्रदान करता है ।।


ज्योतिष शास्त्र का योगदान केवल व्यक्तिगत जीवन के लिये ही नहीं अपितु समाज और राष्ट्र कल्याण के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है । ज्योतिष के द्वारा हम दिन, तिथि, वार, सप्ताह, पक्ष, मास, ऋतु, वर्ष, अयन, गोल, नक्षत्र, योग, करण, चन्द्र, सूर्य, स्थिति, ग्रहण, वर्षा का अनुमान, व्यक्ति के भविष्य का अनुमान तथा सही-गलत समय एवं शुभाशुभ मुहूर्त आदि का पता कर सकते हैं ।।


आइये अब ये देखते हैं, कि आपकी कुण्डली में सूर्य की भूमिका एवं सूर्य अच्छा हो तो आपको क्या दे सकता है ? सामान्यतया आपकी कुण्डली में सूर्य प्रथम भाव, नवम भाव तथा दशम भाव का कारक ग्रह माना जाता है । ऐसी स्थिति में अगर सूर्य प्रथम भाव का स्वामी हो तो जातक के शरीर, रंग, रूप तथा स्वभाव को शुभ होने पर निखारता है और सामाजिक प्रतिष्ठा को सर्वोच्च स्थिति तक पहुँचाता है ।।


नवम भाव का स्वामी सूर्य यदि आपकी कुण्डली में हो तो ज्ञान, सुख-दुःख, ताकत, बल, स्वास्थ्य, दादी, नाना और पिता के संबन्धको मजबूत और इनसे लाभ एवं इनके पक्ष को मजबूत करता है । साथ ही दशम भाव का स्वामी हो तो पिता, राज्य, हुकूमत, पद प्राप्ति, पदोन्नति, कर्म व्यापार, ट्रान्सफर, यात्रा, गुरु-आचार्य, तीर्थ-यात्रा, भाग्य, धर्म तथा सास आदि के बारे में जानकारी प्राप्त किया जा सकता है ।।



दशम का स्वामी सूर्य यदि उत्तम स्थिति में कुण्डली में हो अर्थात शुभ हो तो जातक को इस सभी क्षेत्रों में उत्तम लाभ धन और प्रतिष्ठा देता है । परन्तु यदि अशुभ हो तो निश्चित ही इन क्षेत्रों से सम्बन्धित हानि भी पहुँचाता है । वैसे तो सूर्य दशम भाव का पूर्ण अथवा स्थिर कारक माना जाता है । परन्तु उपरोक्त सभी भावों में सूर्य का कारकत्व होता है ।। 

जन्मकुण्डली के दशम भाव का सूर्य अथवा दशमेश सूर्य राजत्व, रक्तवस्त्र, माणिक्य, राज्य, वन, क्षेत्र, पर्वत, पिता, आदि का सम्पूर्ण कारक होता है । सूर्य को आत्मा एवं पिता का अधिष्ठाता ग्रह भी माना जाता है । सूर्य पुरुष एवं क्रूर ग्रह भी माना गया है तथा आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य एवं आश्लेषा नक्षत्रों में पूर्ण बलवान होता है । सूर्य का अधिकार क्षेत्र हड्डी एवं सिर प्रदेश होता है तथा सूर्य का विशेष प्रभाव २२ से २४ वर्ष की उम्र में किसी भी जातक पर ज्यादातर होता देखा गया है ।।

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।।। नारायण नारायण ।।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।

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