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मुकदमों में विजय एवं अकल्पनीय पदोन्नती का समय आपकी कुण्डली में ।।














मित्रों, आज बुधवार है, इसीलिये बुध से सम्बन्धित लेख आप सभी के समक्ष प्रस्तुत है । चंद्रमा के पुत्र होने तथा बृहस्पति द्वारा पुत्र माने जाने के कारण स्वयं के गुणधर्म के अतिरिक्त बुध पर इन दोनों ग्रहों का प्रभाव भी स्पष्टत: देखने को मिलता है । चन्द्रमा और बृहस्पति के आशीर्वाद के कारण ही बुध के अधिकार क्षेत्र में आने वाले विषय विस्तृत हैं ।।

बुध गंधर्वराज के औरस पुत्र होने के कारण ललित-कलाओं में निपुण एवं उनपर बुध का अधिकार भी सिद्ध है । वहीं बृहस्पति के प्रभाव से विद्या, पाण्डित्य, शास्त्र, उपासना आदि बुध के प्रमुख विषय हैं । अभिव्यक्ति (प्रेजेन्टेशन) की क्षमता भी बुध का ही क्षेत्र माना जाता हैं । आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में सफलता के लिए जिस प्रस्तुतिकरण अर्थात प्रेजेंटेशन की आवश्यकता होती है वह सिर्फ बुध ही देता है ।।

मित्रों, अन्य ग्रह जैसे चन्द्रमा, शुक्र, बृहस्पति, कला, विद्या और कल्पनाशक्ति प्रदान करते हैं । परन्तु यदि जन्मपत्रिका में बुध बली न हो तो अपनी प्रतिभा का आर्थिक लाभ उठाने की कला से जातक वंचित रह जाता है । वाणी बुध एवं बृहस्पति दोनों का विषय है परन्तु जहाँ वाणी में ओजस्विता बृहस्पति का क्षेत्र है, वहीं वाक्-चातुर्य एवं वाक्पटुता बुध का ही आशीर्वाद है ।।

बुध जातक को ऐसा हाजिर-जवाबी बनाता है कि सामने वाला आवाक् रह जाता है और उससे कुछ बोलते नहीं बनता है । स्पष्ट है कि सही समय पर सही जवाब या कार्य के लिए बुद्धि में जिस ज्ञान की आवश्यकता होती है वह बुध की कृपा से ही प्राप्त होती है । बुध से जु़डा सर्वाधिक महत्वपूर्ण गुण है अनुकूलनता । हर परिस्थितियों में खुद को ढाल लेना सिर्फ बुध प्रधान व्यक्ति ही कर सकता है ।।

मित्रों, प्रकृति का अकाट्य नियम परिवर्तन है और वह उसे ही जीने का अधिकार देती है, जो परिवर्तनों को सहर्ष स्वीकार कर उनके अनुरूप जल्द से जल्द स्वयं को ढाल लेता है । अनुकूलता का ही दूसरा रूप सामंजस्य अर्थात एडजेस्ट कर लेना भी होता है । समय की ताल से ताल मिलाना ये अच्छी तरह जानते हैं । यह इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि यदि वक्त के साथ इन्होंने खुद को नहीं बदला तो ये बहुत पीछे और अकेले रह जाएंगे ।।

अब चलिये बुध की महादशा में बाकी के ग्रहों की अंतर्दशा का फल जान लेते हैं । कुण्डली में यदि मंगल बलवान, कारक एवं शुभ फलदायी हो और बुध की दशा में ऐसे शुभ मंगल की अन्तर्दशा चल रही हो और जातक सेना, पुलिस अथवा कृषि कर्म करने वाला हो तो उसे विशेष लाभ मिलता है । इस समय में सैनिकों को पदोन्नती, सैन्य सेवा पदक आदि की प्राप्ति होती है ।।

मित्रों, नये घर की प्राप्ति, पशुधन में वृद्धि, कृषि कार्यों में लाभ, न्यायालय में चल रहे मुकदमों में विजय मिलती है । पुत्रोत्पत्ति से खुशियाँ, बन्धु-बान्धवों से स्नेह तथा साहसिक कार्यों से समाज में प्रतिष्ठा बढ़ती है । अशुभ मंगल की अन्तर्दशा में जातक अधर्म के मार्ग पर चला जाता है । अधिक भोजन विशेषकर मांसाहारी भोजन करने में रुचि, जादू-टोना करने में स्वयं को विद्वान समझकर हानि उठाता है तथा हिंसक कार्यों में रूचि बढ़ जाती है ।।

हाँ इसको व्यर्थ के तर्क-वितर्क और विवादों में सफलता अवश्य मिलती है । इस जातक का कामावेग इतना बढ़ जाता है कि जातक छोटे-छोटे बच्ची और पशुओं तक को अपनी वासनापूर्ति के लिए उपयोग कर लेता है । इस दशा में प्राय निराशा, कलह और अपयश ही मिलता है । बुध की दशा में राहु की अन्तर्दशा चल रही हो और यदि राहु शुभ अवस्था में हो तो जातक परम सुख प्राप्त करता है ।।

मित्रों, राजनीति में प्रवेश कर चुनाव जितना, मन्त्री जैसे पद को प्राप्त करता है । बुध की दशा में राहु की अन्तर्दशा में जातक शासन-सता में उच्च पदस्थ एवं आदरणीय बन जाता है । उतम विद्या एवं अनेक प्रतिष्ठित जनों से मेल-मिलाप बढता है तथा मित्र वर्ग से द्रव्यलाभ भी प्राप्त करता है । व्यापारियों के उद्योग-व्यापारादि की वृद्धि तथा नौकरी वालों को पदोंन्नति देता है ।।










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