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सूर्य का आस्तित्व और अन्य ग्रहों से युति का शुभाशुभ फल - भाग-१.।। Surya Ki Yuti Ka Fal, Part-1.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,


मित्रों, मित्रों, ज्योतिष शास्त्रानुसार सूर्य को राजा माना जाता है । सूर्य को आत्मा एवं पिता का कारक ग्रह भी माना जाता है । सूर्य से ही सभी ग्रहों को प्रकाश प्राप्त होता है और ग्रहों की इनसे दूरी या नजदीकी उन्हें अस्त एवं उदय करती है । एक प्रकार से सूर्य सृष्टि को चलाने वाले प्रत्यक्ष देवता का रूप हैं ।।

कुण्डली में सूर्य को पूर्वजों अथवा पितरों का प्रतिनिधि माना जाता है । सूर्य पर किसी भी कुण्डली में एक या एक से अधिक बुरे ग्रहों का प्रभाव हो तो उस कुण्डली में पितृ दोष का निर्माण हो जाता है । व्यक्ति की आजीविका में सूर्य सरकारी पद का भी प्रतिनिधित्व करता है ।।

मित्रों, सूर्य प्रधान जातक कार्यक्षेत्र में कठोर अनुशासन वाला उच्चाधिकारी, प्रशासक, समय के साथ उन्नति करने वाला, कार्य निरीक्षक बनता है । बारह राशियों में से सूर्य मेष, सिंह तथा धनु में स्थित होकर विशेष रूप से बलवान एवं अनुकूल होता है । मेष राशि में सूर्य को उच्च का माना जाता है ।।

मेष के अलावा सूर्य सिंह राशि में हो तो भी पूर्ण बलवान माना जाता हैं । किसी कुण्डली में सूर्य बलवान तथा बुरे ग्रहों के प्रभाव से रहित हो तो जातक को जीवन में बहुत कुछ दे देता है । जातक का स्वास्थ्य उत्तम होता है और बलवान सूर्य जातक को शारीरिक तौर पर बहुत चुस्त-दुरुस्त होता है ।।

मित्रों, अब आइये हम जानते हैं, कि सूर्य और चन्द्रमा अगर किसी भाव में एक साथ हो तो जातक को कैसा फल देंगे ? सूर्य और चन्द्रमा किसी एक घर में एक साथ बैठे हों तो कारकत्व के अनुसार फ़ल देते है, सूर्य पिता है और चन्द्र यात्रा है, ये यात्रा में सफलता दिला सकते हैं । इसमें पुत्र को भी यात्रा हो सकती है, संतान की उन्नति बाहर हो सकती है ।।

सूर्य और मंगल एक साथ हो तो मंगल की गर्मी और पराक्रम के कारण अभिमान की मात्रा बढ जाती है । पिता प्रभावी और शक्तिमान बन जाता है, यहाँ मंगल भाई है, इसलिये एक भाई सदा सहयोग में रहता है । मंगल रक्त का कारक है, इसलिये पिता-पुत्र दोनों को रक्त से सम्बन्धित बीमारियाँ होती है । एक दूसरे से एक सात और एक बारह में भी यही प्रभाव होता है । स्त्री की कुण्डली में पति प्रभावी होता है, लेकिन उसके ह्रदय में प्रेम अधिक होता है ।।

सूर्य और बुध का आपसी सम्बन्ध हो तो पिता और पुत्र दोनो ही शिक्षित होते है । समाज में प्रतिष्ठा होती है परन्तु ऐसे जातक के अन्दर वासना की अधिकता होती है । ऐसे जातक के पिता के पास भूमि भी होती है तथा इसकी बहनें काफ़ी प्रतिष्ठित परिवार में ब्याही जाती है । व्यापारिक कार्यों के अन्दर पिता पुत्र दोनो ही निपुण होते है परन्तु पिता का सम्बन्ध किसी अन्य महिला से भी हो सकता है ।।

मित्रों, अब अगले रविवार को अन्य ग्रहों के साथ सूर्य की युति का वर्णन करेंगे । साथ ही अन्य ग्रहों के साथ जब सूर्य गोचर में हो तो क्या और कैसा फल जातक को देता है ? इस विषय पर भी विस्तृत चर्चा करेंगे । सोमवार को चन्द्रमा से सम्बन्धित कोई लेख लेकर हम आपके साथ होंगे ।।


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।।। नारायण नारायण ।।।

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बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।

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