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आपकी राश‌ि के अनुसार आपका मारकेश जो आपके जीवन तक पर संकट लाता है, कौन है - आइये जानें ।।

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आपकी राश‌ि के अनुसार आपका मारकेश जो आपके जीवन तक पर संकट लाता है, कौन है - आइये जानें ।। Aapak Marakesh Arthat Mrityu Ka Grah Kaun.


हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,



मित्रों, किसी भी व्यक्ति की जन्मकुण्डली आधार पर उसके जीवन में मारकेश की दशा में होने वाली घटनाओं की सटीक विचार किया जा सकता है । यह दशा जीवन में जब भी आती है अमिट छाप छोड़ ही जाती हैं । अत: आइये आज हम इस बात पर गम्भीरता से विचार करते हैं, कि आखिर क्या होता है मारकेश ? सामान्य भाषा में कहें तो मारकेश अर्थात-मरणतुल्य कष्ट या फिर मृत्यु तक देने वाला वह ग्रह जिसे आपकी जन्मकुंडली में मारक होने का अधिकार प्राप्त होता है ।।


परन्तु अलग-अलग लग्नों के मारकेश अर्थात मारक भावाधिपति भी अलग-अलग होते हैं । मारकेश की दशा जातक को अनेकों प्रकार की बीमारी, मानसिक परेशानी, वाहन दुर्घटना, दिल का दौरा, नई बीमारी का जन्म लेना, व्यापार में हानि, मित्रों और संबंध‌ियों से धोखा तथा अपयश जैसी परेशानियां देती हैं । अब कौन सा ग्रह आपकी जन्मकुण्डली में मारक है, इस बात को जानना पड़ेगा ।।


मित्रों, आइये सभी लग्नों के लिए मारकेश ग्रह का विचार करते हैं । मेष लग्न की कुण्डली के लिए शुक्र, वृषभ लग्न के लिये मंगल, मिथुन लग्न वाले जातकों के लिए गुरु, कर्क और सिंह लग्न वाले जातकों के लिए शनि मारकेश होता है । कन्या लग्न के लिए गुरु, तुला के लिए मंगल और वृश्चिक लग्न के लिए शुक्र मारकेश होता है । जबकि धनु लग्न के लिए बुध, मकर के लिए चन्द्रमा, कुम्भ के लिए सूर्य, और मीन लग्न के लिए बुध मारकेश होता है ।।


सूर्य आत्मा और चन्द्रमा अमृत तथा मन माना गया हैं इसलिए इन्हें मारकेश होने का दोष नहीं लगता । ये दोनों अपनी दशा-अंतर्दशा में केवल अशुभता में कमी लाते हैं । मारकेश का विचार करते समय कुण्डली के सातवें भाव के अतिरिक्त, दूसरे, आठवें, और बारहवें भाव के स्वामियों और उनकी शुभता-अशुभता का भी विचार करना आवश्यक होता है ।।


मित्रों, सातवें भाव से आठवां दूसरा भाव होता है जो धन और कुटुम्ब का भाव माना जाता हैं । इसलिए इस विषय में सूक्ष्मता तथा गहराई से विचार करने की आवश्यकता होती है और उसके बाद ही फलादेश क‌िया जाना चाहिये । अब बात आती है, कि अगर किसी की कुण्डली में मारकेश की दशा चल रही हो तो ऐसे में क्‍या करें ? क्योंकि खतरों से खेलने का शौक कोई अच्छी बात तो है नहीं ।।


इसके अशुभ प्रभाव से बचने के लिए सरल और आसान तरीका यह है, कि कुण्डली के सप्तम भाव में यदि पुरुष राशि हो तो शिव की तथा स्त्री राशि हों तो शक्ति की आराधना करनी चाहिये । जो भी ग्रह उस घर में उपस्थित हो उसके जप संख्या का चार गुना उसका मूल मंत्रजप करना-करवाना अथवा महामृत्युंजय मन्त्र का जप करना-करवाना या फिर ज्यादा-से-ज्यादा रुद्राभिषेक करवाना ही इस दशा की शांति के सरल उपाय हैं अथवा आवश्यक होता है ।।






















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