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डॉक्टर एवं राजनेता बनाता है बुध परन्तु कब और कैसे ? बुध का सम्पूर्ण विश्लेषण ।।



डॉक्टर एवं राजनेता बनाता है बुध परन्तु कब और कैसे ? बुध का सम्पूर्ण विश्लेषण ।। Doctors and Politicians Banata Hai Budha.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, आज बुधवार है, इसलिए आज हम किसी भी कुण्डली में बुध ग्रह की भूमिका एवं उसके प्रभाव तथा बुध के वजह से मनुष्य के शरीर में होनेवाले रोगों के विषय में तथा उसका सरल उपाय क्या है, इस विषय में विधिवत चर्चा करेंगे । सामान्यतया बुध व्यापार एवं स्वास्थ्य का कारक ग्रह माना गया है । बुध सौरमंडल का सबसे छोटा और सूर्य के सबसे निकट स्थित ग्रह है ।। बुध मिथुन और कन्या राशि का स्वामी है तथा यह कन्या राशि में उच्च एवं मीन राशि में नीच का होता है । बुध वाक् कला का भी द्योतक है इसलिए यह व्यक्ति को विद्वता, वाद-विवाद की क्षमता प्रदान करता है । विद्या और बुद्धि के सूचक ग्रह के रूप में भी इसे जाना जाता है । सामान्य रूप से यह जातक के दांतों, गर्दन, कंधे एवं त्वचा पर अपना प्रभाव रखता है इसलिये जन्मकुण्डली में बुध के अशुभ होने पर व्यक्ति दाँत कमजोर हो जाते हैं ।। मित्रों, इन्सान में सूँघने की शक्ति भी इसके वजह से ही कम हो जाती है तथा गुप्त रोग भी यही देता है । किसी व्यक्ति की कुण्डली में बुध अगर अशुभ हो तो जातक की वाक् क्षमता अर्थात बोलने की शक्ति भी जाती रहती है । नौकरी और व्यवसाय में धोखा और नुक्सान भी इसी की अशुभता का परिणाम होता है । आइये कुण्डली के विभिन्न भावों में बुध की स्थिति, प्रभाव एवं उसके उपायों की भी चर्चा कर लेते हैं हैं ।। किसी भी व्यक्ति की कुण्डली में बुध यदि प्रथम भाव में बैठा हो तो जातक विनोदप्रिय, हंसमुख तथा सामाजिक व्यक्ति होता है । ऐसा जातक अपनी आजीविका तथा ससुराल और संतान की ओर से भी सदैव चिंतित रहता है । ऐसे व्यक्ति को चाहिये की वो नशा ना करें यही इसका सरल उपाय है । यदि बुध कुण्डली के द्वितीय भाव में उपस्थित हो तो जातक लेखन कार्य एवं व्यापार से पैसे कमाता है । इसका उभरा हुआ मस्तिष्क होता है परन्तु इसे शत्रुओं से हानि की संभावनायें होती है । इसके दोषों से बचने का उपाय ये हैं, कि इसे अपने नाक छिदवाने चाहिये एवं जुआ तथा सट्टेबाजी आदि से बचना चाहिये ।। मित्रों, तृतीयस्थ बुध जातक को धनी बनाता है प्रोफेशन से डॉक्टर हो सकता है । संतान का फल उत्तम परन्तु कभी-कभी बाधाएं भी लाता है । इसके दोषपूर्ण स्थिति से बचने के लिए पक्षियों को दाना डालना चाहिये एवं अपने दांत हमेशा साफ रखने चाहिये । चतुर्थ भाव में बैठा बुध जातक को माता का सुख, राजकीय सम्मान एवं धन दिलाता है । अगर दोषपूर्ण हो तो जातक को पीले कपड़े पहननें चाहिये, केसर का तिलक लगाना एवं स्वर्ण आभूषण पहननें चाहिये ।। पंचम भाव का बुध जातक को सृजनात्मक एवं वाणी सम्बन्धित कार्यों में ओजस्विता, न्यायप्रियता, ज्योतिष में रुचि एवं निपूणता देता है । यदि अशुभ स्थिति में हो तो जातक को अपने परिवारजनों की चिंता सदैव लगी रहती है । अगर अशुभ हो तो गले में तांबे के छेद वाला एक गोल सिक्का धारण करना चाहिये । षष्ठम भाव का बुध जातक को ईमानदार, उच्च श्रेणी का वक्ता, विद्वान व्याख्याता, तर्कशास्त्र में निपुणता एवं लेखन कार्य में कुशलता देता है ।। मित्रों, यदि छठे भाव में बैठा बुध अशुभ हो तो किसी गरीब के लड़की के विवाह में तन, मन एवं धन से सहायता करें तथा बकरी की सेवा करें । घर का द्वार उत्तर दिशा की ओर न रखें एवं एक चांदी का छल्ला धारण करें । सप्तमस्थ बुध जातक को मुफ्त का सलाह-मशविरा देने में अग्रणी बनाता है । ऐसा जातक लोगों का मार्गदर्शक, लेखन कार्य में कुशल एवं विपरीत परिस्थितियों को भी अनुकूल बना लेता है । यह जातक एक उत्तम व्यापारी हो सकता है अगर अशुभ हो तो पन्ना धारण करें ।। अष्टम भाव में बैठा बुध जातक को दांत का रोगी देता है । इसकी बातचीत में तथा स्वभाव में कर्कशता होती है एवं इसकी बहन या बुआ को कोई कष्ट होता है । इस दोषपूर्ण बुध के लिए दुर्गा माता का पूजन करना चाहिये एवं साबुत मूंग का यथा‍शक्ति दान करें । नाक में छेद करवाकर एक चांदी का छल्ला धारण करें तथा छत पर बारिश का पानी रखें ।।

मित्रों, नवमस्थ बुध जातक को अपने से ज्यादा परिवार की चिंता करने वाला एवं प्राध्यापक आदि बनाता है । इस जातक को आयु के 34 वर्ष के बाद जीवन पूरी तरह सफलता प्राप्त होती है । अशुभ राशि में होने पर हरा रंग इसके लिए नुकसानदायक हो जाता है । ऐसे में लोहे की एक छोटी सी गोली को लाल रंग में रंगकर अपने पास रखें । दशम भावस्थ बुध जातक को अपनी नीतियों से सरकारी क्षेत्र से या ठेकेदारी के कार्य से सफलता दिलाता है ऐसे जातक को शाकाहारी रहना चाहिये ।। एकादश भाव में विद्यमान बुध जातक का उच्च कुल में विवाह करवाता है । ऐसे जातक को 34 वर्ष की उम्र के बाद अचानक सफलता एवं उन्नति प्राप्त होती है । अगर बुध अशुभ हो तो बुध को शुभ बनाने के लिए पीला वस्त्र धारण करना एवं केसर का तिलक लगाना चाहिये । स्वर्ण के आभूषणों को धारण करने से भी तथा गले में तांबे का एक पैसा धारण करने से भी बुध शुभ फलदायी हो जाता है ।। मित्रों, द्वादश भाव का बुध जातक को अत्यधिक खर्चीला एवं रोगी बना देता है । इसकी बेटी, बहन, मौसी तथा बुआ इत्यादि को कोई कष्ट भी संभव है । बुध के इस दु:ष्फल से बचने के लिए माथे पर केसर का तिलक लगाएं एवं कम बोलें । घर पर कुत्ता पालें, स्वर्ण के आभूषण धारण करें तथा इनके अलावा गणेश पूजा, दुर्गा स्तुति एवं बुध की वस्तुओं का दान करें । बुध को शुभ बनाने के लिए "ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:'' इस मन्त्र का एक माला जप करें ।। लग्न से पांचवे भाव तक बुध सभी भावों की वृद्धि करता है । छठे भाव का बुध शत्रु की वृद्धि एवं स्वयं की पराजय करवाता है । सातवें भाव में स्त्री सुख, आठवें भाव में बन्धुहीनता एवं जेल यात्रा तथा नवम भाव में भाग्य वृद्धि करता है । दशम में व्यापार वृद्धि, एकादश भाव में लाभ तथा द्वादश भाव में स्थित बुध जातक की धन हानि एवं खर्चे को बढ़ाता है ।।

मित्रों, बुध के अशुभ फलों से बचने का उपाय मैंने भावानुसार भी बताया है । परन्तु कुल मिलाकर भगवान गणेश एवं माँ दुर्गा की आराधना करना श्रेयस्कर होता है । साथ ही गौ सेवा, काले कुत्ते को इमरती देना, नाक छिदवाना, ताबें के प्लेट में छेद करके बहते पानी में बहाना तथा अपने भोजन में से एक हिस्सा गाय को, एक हिस्सा कुत्तों को और एक हिस्सा कौवे को देना शुभ फलदायी होता है ।। आप अपने हाथों से गाय को हरा चारा, हरा साग खिलायें, उड़द की दाल का सेवन करें एवं दान करें । कन्या पूजन एवं भोजन, किन्नरों को हरी साडी एवं सुहाग सामग्री आदि का दान देना भी बहुत चमत्कारी सिद्ध होता है । ॐ बुं बुद्धाय नमः का १०८ बार नित्य जप अथवा गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करना चाहिये । पन्ना धारण करें या हरे वस्त्र धारण करें यदि संभव न हो तो हरा रुमाल साथ में अवश्य रखें ।। वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें ।।


बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।

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