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खुशहाल जिन्दगी एवं अधिक आमदनी का राज वास्तु सिद्धान्तों से पायें ।।



खुशहाल जिन्दगी एवं अधिक आमदनी का राज वास्तु सिद्धान्तों से पायें ।। The secret of architectural principles to Find More Income.


हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,
मित्रों, यदि हम अपने गृहस्थ जीवन को सुखद एवं समृद्ध बनाना चाहते हैं और अपेक्षा करते हैं कि जीवन के सुंदर स्वप्नों को साकार कर सकें । तो इसके लिए पूरी निष्ठा एवं श्रद्धा से वास्तु के उपायों को अपनाकर अपने जीवन को खुशहाल बनाना होगा । अगर आप आर्थिक मानसिक या शारीरिक रूप से परेशान हैं तो अपने रहन-सहन में वास्तुशास्त्र के सिद्धान्तों को अपनायें ।।

कारण की वास्तु और ज्योतिष का गहरा सम्बन्ध होता है । वास्तुशास्त्र के सम्पूर्ण सिद्धान्त ग्रहों के आधार पर ही निर्मित हैं । और समय-समय पर जिन ग्रहों कि स्थिति गोचर में अथवा जन्मकुण्डली में कमजोर होगी या मजबूत होगी तो सभी ग्रह अपने स्वभाव के अनुसार ही आपको शुभ या अशुभ फल देंगे ।। मित्रों, कुछ अचूक वास्तु टिप्स बताते हैं, घर के प्रवेश द्वार पर "स्वस्तिक" अथवा ''ॐ'' का चित्र लगाने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है । सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए उत्तर-पूर्व दिशा में पानी का एक कलश अवश्य रखना चाहिए । परन्तु वास्तु के सिद्धान्तानुसार रसोईघर में देवस्थान नहीं होना चाहिए ।।

घर में देवस्थान जहाँ भी जिस भी दीवाल पर हो उसका शौचालय की दीवार का संपर्क कदापि नहीं होना चाहिए । आप जब भी अपने भवन में प्रवेश करें उस समय सामने की तरफ शौचालय अथवा रसोईघर भी नहीं होना चाहिए । यदि किसी कारण से शौचालय है एवं जिसे हटाया भी नहीं जा सकता तो उसका दरवाजा सदैव बन्द रखें ।। मित्रों, ऐसी स्थिति में शौचालय के दरवाजे पर एक दर्पण लगा दें ये अशुभ दोषों को समाप्त कर देता है । यदि भवन के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने रसोईघर हो तो उसमें दरवाजा लगा दें और दरवाजे के बाहर अपने इष्टदेव अथवा ॐ की कोई तस्वीर लगा दें । इससे बाहर से आनेवाली नकारात्मक उर्जा अन्दर न जाकर बाहर की ओर लौट जायेगी ।।

आपके भवन में जो जल के स्रोत हैं, जैसे नलकूप अथवा हौज इत्यादि, तो उसके पास गमले में एक तुलसी का पौधा अवश्य लगायें । अगर पति-पत्नी में आपस में वैमनस्यता बढ़ रही हो तो उसका एक कारण सही दिशा में शयनकक्ष का न होना भी हो सकता है । अगर दक्षिण-पश्चिम के कोने में आपका मास्टर बेडरुम नहीं है तो पति-पत्नी के प्रेम सम्बन्ध कटुता भरे हो जाते हैं ।। यद्यपि कभी-कभी गृहस्थ जीवन में अथवा व्याहारिक जीवन में भी कोई छोटा सा कारण भी बड़ा रूप ले लेता है । फिर चाहे वो आर्थिक हो या घर के अन्य सदस्यों को लेकर हो । इसका सीधा प्रभाव पति-पत्नी के आपसी सम्बन्धों पर पड़ता है । इसलिए घर का वातावरण ऐसा होना चाहिए कि ऋणात्मक शक्तियां कम तथा सकारात्मक शक्तियां अधिक क्रियाशील रहें ।।

लेकिन मित्रों, ऐसा वास्तु शास्त्र के सिद्धान्तों द्वारा ही संभव होता है । घर के अंदर यदि रसोई सही दिशा (अग्निकोण) में न हो तो ऐसी अवस्था में पति-पत्नी के विचार कभी नहीं मिलते हैं । रिश्तों में कड़वाहट दिनों-दिन बढ़ती है, कारण अग्नि का किसी और दिशा में जलना अर्थात् विपरीत स्वभावी ग्रहों का आपसी टकराव ।। क्योंकि हर एक दिशा किसी न किसी ग्रह से सम्बन्धित होता है । इसलिये रसोई घर की सही दिशा "आग्नेय कोण" ही होता है । अगर आग्नेय कोण में रसोईघर बनाना संभव न हो तो उससे सटी हुई दोनों तरफ की दिशाओं की ओर थोड़ा खिसकाकर रख सकते हैं, परन्तु सर्वोत्तम दिशा अग्निकोण ही होती है ।।

मित्रों, घर के अंदर ईशान कोण में अगर शौचालय हो अथवा कोई रूम हो और उस रूम में शौचालय हो तो पति-पत्नी का जीवन बड़ा ही अशांत रहता है । आर्थिक संकट व संतान सुख इन दोनों का सदैव आभाव ही रहता है । मेरे अनुभव में तो इसे वहाँ से (शौचालय को) हटा देना ही उचित होता है ।। अगर किसी वजह से हटाना संभव न हो तो काँच के एक बर्तन में समुद्री नमक भरकर शौचालय में सदैव रखें । जब ये नमक गीला हो जाय तो बदल दें और अगर यह भी संभव न हो तो मिट्टी के एक बर्तन में सेंधा नमक डालकर रख दें । जिस घर में किचन के अंदर ही स्टोर रूम हो तो गृहस्वामी को अपनी नौकरी या व्यापार में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है ।।

इन मुश्किलों से बचाव के लिए किचन व स्टोर रूम अलग-अलग बनाने चाहिए अथवा बना हो तो उसे अलग-अलग करवा देना चाहिये । ऐसा हमारे ऋषियों का अकाट्य अनुभव है । अक्सर देखा गया है, कि जिन घरों में भोजन बनाने के साधन जैसे गैस, स्टोव, माइक्रोवेव ओवन इत्यादि एक से अधिक होते हैं, उनके आमदनी के साधन भी एक से अधिक होते हैं ।। अब इसका अर्थ ये नहीं है, कि आप भी चार-चार गैस, स्टोव और चूल्हा इत्यादि खरीदने लगो । परन्तु इतना प्रयत्न अवश्य करो कि परिवार के सभी सदस्य कम से कम एक समय भोजन साथ मिलकर अवश्य करें । ऐसा करने से आपसी संबंध मजबूत होते हैं तथा साथ मिलकर रहने की भावना भी मजबूत होती है ।।

एक अनुभव बताता हूँ, जिस घर में किचन मुख्य द्वार से जुड़ा हो, वहां आरम्भ में पति-पत्नी के बीच अत्यधिक प्रेम होता है । घर का वातावरण भी सौहार्दपूर्ण रहता है, किन्तु कुछ समय बाद बिना कारण आपस में मतभेद पैदा होने लगता हैं । इसलिये जैसा मैंने ऊपर बताया ऐसी स्थिति में उस उपाय को करना ही श्रेयस्कर होता है ।। वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें ।।

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बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।

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