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कुण्डली में केतु के अनिष्ट फलदायी होने पर करें यह उपाय ।।

कुण्डली में केतु के अनिष्ट फलदायी होने पर करें यह उपाय ।। Ketu Grah Ke Ashubh Dosho Ki Shanti.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, मित्रों, आज हम कुण्डली में केतु के अनिष्ट में होने पर क्या करें ताकि केतु हमें शुभ फल प्रदान करे इस विषय में चर्चा करेंगे । क्योंकि किसी जातक की कुंडली अथवा गोचर में अशुभ केतु फोड़े-फुंसी, मूत्राशय से संबंधित रोग, रीढ़ कि हड्डी एवं जोड़ों का दर्द, संतान हानि आदि जैसी समस्या का कारक माना जाता है ।।

अगर आपके जीवन में इस तरह कि कोई समस्या हो तो आप कुत्ते को मीठी रोटी खिलाएं । मकान के नींव की सतह में शहद कि एक सीसी दबा दें । कंबल दान में दें और सफेद रेशम के धागे को कंगन की तरह हाथ में बांधे ।।

मित्रों, कई बार किसी समय-विशेष में कोई ग्रह अशुभ फल देता है । ऐसे में उसकी शांति आवश्यक हो जाती है । केतु ग्रह की शान्ति के लिए कुछ और शास्त्रगत उपाय आज मैं बताता हूँ । इनमें से किसी एक को भी करने से अशुभ फलों में कमी आती है और शुभ फलों की वृद्धि होती है ।।

ग्रहों के मंत्र की जप संख्या के अनुसार जप करना करवाना, ग्रहों के दान द्रव्यों का दान करना श्रेयस्कर होता है । मंत्र का जप स्वयं करें या किसी कर्मनिष्ठ ब्राह्मण से करवायें । दान द्रव्यों के अलावे उनके रत्न-उपरत्न का दान अथवा स्थितियों के अनुसार उन्हें धारण करना चाहिये ।।

ग्रहों के रत्नों के अभाव में ग्रहों कि समिध के जड़ी को विधिवत् स्वयं धारण कर सकते हैं, इससे भी शांति होती है । केतु ग्रह की शान्ति के लिए रात्रिकाल का समय उचित बताया गया है । साथ ही भगवान गणेशजी की पूजा करना चाहिये ।।

गणेश के द्वादश नाम स्तोत्र का पाठ करने से भी लाभ होता है । केतु के मूल मंत्र का रात्रि में 40 दिन में 18,000 बार जप करना श्रेयस्कर होता है । अथ मंत्र : "ॐ स्रां स्रीं स्रौं स: केतवे नम:" ।।

केतु के लिये दान-द्रव्यों में लहसुनिया, सोना, लोहा,‍ तिल, सप्त धान्य, तेल, धूमिल, कपड़ा, फूल, नारियल, कंबल, बकरा और शस्त्र आदि बताया गया है । बृहस्पतिवार का व्रत एवं गणेशजी की पूजा तथा 9 मुखी रुद्राक्ष धारण करना भी लाभदायी होता है ।।

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