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इस दीवाली आप भी कर सकते हैं "श्रीविद्या की साधना" ।। This Diwali, you can Also Shri Vidya Sadhna.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,


मित्रों, श्री अर्थात् लक्ष्मी ! तो श्री विद्या की साधना अर्थात् लक्ष्मी की साधना । लक्ष्मी की साधना अर्थात् दैवीय कृपा के द्वारा धन प्राप्ति की साधना । वैसे तो श्रीविद्या की साधना मूल रूप से आत्म साधना है । अपनी आत्मा को जानना और अपनी क्षमताओं का विकास करना यही मूल रूप से श्रीविद्या की साधना है ।।

इस विद्या की साधना का जो फल होता है, उससे हमें जो ज्ञान प्राप्त होता है उसके द्वारा हम अपने जीवन का उच्च स्तरीय विकास कर सुख दुःखों से परे होकर सही मायने में जीवन का समुचित आनंद प्राप्त कर सकते है । ऐसे तो यह बहुत ही प्राचीन विद्या है जिसके विषय में विभिन्न ग्रंथों से हमें अलग अलग तरीके से जानकारी प्राप्त होती है ।।

श्री विद्या को ललिता, राजराजेश्वरी, महात्रिपुरसुन्दरी, बाला, पंचदशी, षोडशी, आदि नामों से भी जाना जाता है । मूल तत्व में यह एक ही है मगर भाव और अवस्था के अनुसार इसमें भेद दिखाई देता है । दस महाविद्याओं में जो षोडशी विद्या है वह श्री विद्या का ही एक रूप है ।।

श्री विद्या को ब्रम्ह विद्या भी कहते हैं और जैसा की मैंने बताया "श्री" शब्द से महालक्ष्मी का बोध होता है । "श्री" शब्द से श्रेष्ठता का भी ज्ञान होता है । "श्री" शब्द में एक बीज अक्षर मंत्र के रूप में अनन्त गोपनीय रहस्य छुपे हुए हैं । इसे हम सिर्फ साधना के माध्यम से ही जान सकते हैं ।।

जहाँ भी "श्री" है वहां सुख, सम्पदा, वैभव शक्ति, धन, राज्य, आत्मोत्थान, आदि अनेक उपलब्धियां विद्यमान रहती हैं । हम इस श्री विद्या के माध्यम से इन समस्त उपलब्धियों को सहजता से प्राप्त कर सुखी, निरोग, स्वस्थ, धीर वीर गंभीर, आदि दैवीय गुणों से परिपूर्ण हो जाते हैं ।।

श्रीविद्या का साधक जीवन के सभी कष्टों से छूट कर सभी उत्तम भोगों को प्राप्त करके अन्त में मोक्ष के अधिकारी होते हैं । कारण यह एकमात्र ऐसी विद्या है जो सिद्ध होने के बाद भोग और मोक्ष दोनों सहजता से दे देती है । जब हम किसी को सम्मान पूर्वक बुलाते हैं अथवा पुकारते हैं तो उसके नाम के आगे श्री शब्द का प्रयोग अवश्य करते हैं फिर चाहे देवता हो या मनुष्य ।।

अतः श्री विद्या की साधना के माध्यम से जीवन का हर सुख प्राप्त कर संसार के सभी भय तथा पीड़ा से मुक्ति पायी जा सकती है । मित्रों, इस साधना से आत्मकल्याण के साथ-साथ लोककल्याण एवं जीव मात्र के कल्याण करने की शक्ति आ जाती है । हम दीन-हीन एवं दासता के जीवन से ऊपर उठकर श्रेष्ठ बन सकते है तथा इसका लाभ औरों में भी बाँट सकते हैं ।।

मित्रों, यह अत्यन्त ही सहज साधना है और इसे कोई भी कर सकता है । इसमें किसी भी प्रकार का कोई बंधन नहीं है इस साधना में भौतिक सुख और आत्म कल्याण दोनों प्राप्ति सहज हो जाती है । ऐसा साधक उच्च स्तर की आध्यात्मिक चेतना को प्राप्त करता है ।।

इस साधना के मुख्यतः दो रूप है सूक्ष्म और स्थूल । सूक्ष्म अर्थात आत्म तत्व की साधना और स्थूल रूप में यान्त्रादी एवं मूर्ती आदि के द्वारा भी की जाती है । इस साधना को महाराज मनु, चन्द्र, कुबेर, लोपामुद्रा, कामदेव, अग्नि, सूर्य, इन्द्र, कार्तिकेय, भगवान शिव और दुर्वासा ऋषि ने भी की थी और समस्त लोक के कल्याण हेतु प्रदान किया है ।।

गुरुओं की कृपा एवं माताजी की दया से इस साधना को करने का सौभाग्य हमें भी प्राप्त हुआ । मैंने अपने जीवन में इस विद्या के द्वारा कईयों का कल्याण किया है एवं मैं स्वयं भी एक जीता-जागता उदाहरण हूँ । श्रीयन्त्र के उपर श्रीविद्या से प्रतिष्ठा एवं सिद्ध मन्त्र जिसे भी दिया मैंने वो स्वयं सामने से आकर अपने जीवन में हुई तब्दिली को बयां करते हैं । आप भी इस दीवाली लाभ उठा सकते हैं ।।

हम अपने अगले अंक में श्री विद्या की साधना के विषय में वर्णन करने का प्रयत्न करेंगे । वैसे ये साधना शुरू-शुरू में अत्यन्त कठिन लगती है परन्तु संकल्प दृढ़ हो तो हो ही जाती है । मैं प्रयत्न करूँगा इस विषय की गम्भीरता को आसान करके वर्णित करूँ । अब आप अपना कर्तब्य अवश्य करें की मेरे फेसबुक पेज को लाइक करके मेरा हौसला बढायें ।।

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मित्रों, इस विडियो में जन्मकुण्डली के ग्यारहवें भाव में वर्णित आमदनी के योग के विषय में जो ९ श्लोकों में वर्णित है । तो आइये जानें व्यक्ति के जीवन में धन की आमदनी के विषय में विस्तृत रूप से इस विडियो टुटोरियल में - https://youtu.be/pViXV-eODWk

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