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अतुलनीय धन दिलाने वाले कुछ राजयोग एवं विपरीत राजयोग ।।

अतुलनीय धन दिलाने वाले कुछ राजयोग एवं विपरीत राजयोग ।। Atulaniya Dhanadayak Yoga.


























विपरीत राजयोग के विषय में अन्य कई महापुरुषों ने लिखा है । जैसे महाकवि कालिदास लिखते हैं कि अष्टमेश यदि बारहवें या छठे भाव में बैठा हो और छठे भाव का मालिक यदि अष्टम् अथवा व्यय में बैठा हो तथा व्ययेश यदि षष्ठ अथवा अष्टम् भाव में हो, और इन अशुभ भावों के स्वामियों की युति, दृष्टि अथवा व्यत्यय द्वारा परस्पर सम्बन्ध भी हो, परन्तु अन्य किसी ग्रह से युति अथवा दृष्टि सम्बन्ध न हो तो जातक वैभवशाली राजराजेश्वर समान होता है ।।




ऐसा जातक अपने जीवन में सुखी, भाग्यशाली, स्वस्थ, शत्रुहन्ता, यशस्वी, उच्च मित्रों वाला तथा उत्तम सन्तानों से युक्त होता है । परन्तु जन्मकुण्डली में अष्टमेश की ऐसी ही स्थिति "सरल योग" का निर्माण करती है । ऐसा व्यक्ति दृढ़ बुद्धि, दीर्घायु, निर्भय, वि़द्वान, पुत्र व धन से युक्त, शत्रु विजेता, सफल और विख्यात होता है ।।






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