Navgraha

अथ श्रीशनैश्चर माला मन्त्रः ।। Shri Shanaishchara Malamantrah.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,
 Shri Shanideva.


मित्रों, आज शनिवार भगवान शनि देव का दिन है । शनिवार को प्रात: पीपल के पेड़ पर काले तिल चढ़ाकर दूध, चीनी मिश्रित मीठा जल चढ़ाने से जन्मकुण्डली के सभी ग्रह अनुकूल होते है ।।

शनिवार के लिये शुभ एवं अशुभ समय तथा घर से क्या खाकर जाएँ कि दिन भर लाभ-ही-लाभ हो ? चलिए ये भी आपलोगों को बता ही देते हैं, शनिवार को अदरक एवं गुड़ खाकर घर से बाहर जायें, आपका काम अवश्य ही सिद्ध होगा ।।

कोणस्थ, पिंगल, बभ्रु, कृष्ण,रौद्रान्तक, यम, सौरी, शनैश्चर, मन्द एवं पिप्पलाश्रय - ये भगवान शनिदेव के सिद्ध नाम हैं । इनका जप करके घर से निकलने से समस्त कार्य सिद्ध हो ही जाता है ।।


कोई भी कार्य करना हो तो शुभ, अमृत, लाभ एवं अभिजित मुहूर्त अत्यन्त शुभ होता है, जिसका परिणाम सदैव पॉजिटिव ही होता है ।।


अथ श्रीशनैश्चर माला मन्त्रः ।। Shri Shanaishchara Malamantrah.


                                     ।।श्रीः।।


अस्य श्रीशनैश्चरमालामन्त्रस्य काश्यप ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः,

शनैश्चरो देवता, शं बीजं, निं शक्तिः, मं कीलकं,
समस्तपीडा परिहारार्थे शनैश्चरप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।
शनैश्चराय अङ्गुष्ठाभ्यां नमः, कृष्णवर्णाय तर्जनीभ्यां
नमः, सूर्यपुत्राय मध्यमाभ्यां नमः, मन्दगतये अनामिकाभ्यां
नमः, गृध्रवाहनाय कनिष्ठिकाभ्यां नमः, पङ्गुपादाय करतल-
करपृष्ठाभ्यां नमः, एवं हृदयादि न्यासः ।।








ॐ नमो भगवते शनैश्चराय मन्दगतये सूर्यपुत्राय महाकालाग्नि-

सदृशाय क्रूर (कृश) देहाय गृध्रासनाय नीलरूपाय चतुर्भुजाय
त्रिनेत्राय नीलाम्बरधराय नीलमालाविभूषिताय धनुराकारमण्डले
प्रतिष्ठिताय काश्यपगोत्रात्मजाय माणिक्यमुक्ताभरणाय छायापुत्राय
सकलमहारौद्राय सकलजगत्भयङ्कराय पङ्कुपादाय क्रूररूपाय
देवासुरभयङ्कराय सौरये कृष्णवर्णाय स्थूलरोमाय अधोमुखाय
नीलभद्रासनाय नीलवर्णरथारूडाय त्रिशूलधराय सर्वजनभयङ्कराय
मन्दाय दं, शं, नं, मं, हुं, रक्ष रक्ष, ममशत्रून्नाशय,
सर्वपीडा नाशय नाशय, विषमस्थशनैश्चरान् सुप्रीणय सुप्रीणय,
सर्वज्वरान् शमय शमय, समस्तव्याधीनामोचय मोचय विमोचय,
मां रक्ष रक्ष, समस्त दुष्टग्रहान् भक्षय भक्ष्य, भ्रामय भ्रामय,
त्रासय त्र्रासय, बन्धय बन्धय, उन्मादयोन्मादय, दीपय दीपय,
तापय तापय, सर्वविघ्नान् छिन्धि छिन्धि,
डाकिनीशाकिनीभूतवेतालयक्षरक्षोगन्धर्वग्रहान् ग्रासय ग्रासय,
भक्षय भक्षय, दह दह, पच पच, हन हन, विदारय विदारय,
शत्रून् नाशय नाशय, सर्वपीडा नाशय नाशय,
विषमस्थशनैश्चरान् सुप्रीईणय सुप्रीणय, सर्वज्वरान् शमय शमय,
समस्तव्याधीन् विमोचय विमोचय, ओं शं नं मं ह्रां फं हुं,
शनैश्चराय नीलाभ्रवर्णाय नीलमेखलय सौरये नमः ।।



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