Devata Stotram

उडुपि श्री कृष्ण सुप्रभातम् ।। UDUPI SHRI KRISHNA SUPRABHATAM.

उडुपि श्री कृष्ण सुप्रभातम् ।।

UDUPI SHRI KRISHNA SUPRABHATAM.



उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविन्द उत्तिष्ठ गरुडध्वज ।
उत्तिष्ठ कमलाकान्त त्रैलोक्यं मङ्गलं कुरु ।।

नारायणाखिल शरण्य रथाङ्ग पाणे |
प्राणायमान विजयागणित प्रभाव |
गीर्वाणवैरि कदलीवन वारणेन्द्र |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातं ||१||

उत्तिष्ठ दीन पतितार्तजनानुकम्पिन् |
उत्तिष्ठ विश्व रचना चतुरैक शिल्पिन् |
उत्तिष्ठ वैष्णव मतोद्भव धामवासिन् |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||२||

उत्तिष्ठ पातय कृपामसृणान् कटाक्षान् |
उत्तिष्ठ दर्शय सुमङ्गल विग्रहन्ते |
उत्तिष्ठ पालय जनान् शरणं प्रपन्नान् |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||३||

उत्तिष्ठ यादव मुकुन्द हरे मुरारे |
उत्तिष्ठ कौरवकुलान्तक विश्वबन्धो |
उत्तिष्ठ योगिजन मानस राजहंस |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||४||

उत्तिष्ठ पद्मनिलयाप्रिय पद्मनाभ |
पद्मोद्भवस्य जनकाच्युत पद्मनेत्र |
उत्तिष्ठ पद्मसख मण्डल मध्यवर्तिन् |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||५||

मध्वाख्यया रजतपीठपुरेवतीर्णः |
त्वत्कार्य साधनपटुः पवमान देवः |
मूर्तेश्चकार तव लोकगुरोः प्रतिष्ठां |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||६||

सन्यास योगनिरताश्रवणादिभिस्त्वां |
भक्तेर्गुणैर्नवभिरात्म निवेदनान्तैः |
अष्टौयजन्ति यतिनो जगतामधीशं |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||७||

या द्वारकापुरि पुरातव दिव्यमूर्तिः |
सम्पूजिताष्ट महिषीभिरनन्य भक्त्या |
अद्यार्चयन्ति यतयोष्टमठाधिपास्तां |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||८||

वामेकरे मथनदण्डमसव्य हस्ते |
गृह्णंश्च पाशमुपदेष्टु मना इवासि |
गोपालनं सुखकरं कुरुतेति लोकान् |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||९||

सम्मोहिताखिल चराचररूप विश्व |
श्रोत्राभिराममुरली मधुरारवेण |
आधायवादयकरेण पुनश्चवेणुं |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||१०||

गीतोष्णरश्मिरुदयन्वहनोदयाद्रौ |
यस्याहरत्सकललोकहृदान्धकारं |
सत्वं स्थितो रजतपीठपुरे विभासी |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||११||

कृष्णेति मङ्गलपदं कृकवाकुवृन्दं |
वक्तुं प्रयत्य विफलं बहुशः कुकूकुः |
त्वां सम्प्रबोधयितुमुच्चरतीतिमन्ये |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||१२||

भृङ्गापिपासव इमे मधु पद्मषन्दे |
कृष्णार्पणं सुमरसो स्वितिहर्षभाजः |
झङ्कार राव मिषतः कथयन्ति मन्ये |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||१३||

निर्यान्ति शावक वियोगयुता विहङ्गाः |
प्रीत्यार्भकेशु च पुनः प्रविशन्ति नीडं |
धावन्ति सस्य कणिकानुपचेतु मारात् |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||१४||

भूत्वातिथिः सुमनसामनिलः सुगन्धं |
सङ्गृह्यवाति जनयन् प्रमदं जनानां |
विश्वात्मनोर्चनधियातव मुञ्च निद्रां |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||१५||

तारालि मौक्तिक विभूषण मण्डिताङ्गी |
प्राचीदुकूल मरुणं रुचिरं दधान |
खेसौखसुप्तिक वधूरिव दृश्यतेद्य |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||१६||

आलोक्य देह सुषमां तव तारकालिः |
ह्रीणाक्रमेण समुपेत्य विवर्णभावं |
अन्तर्हितेवनचिरात्यज शेषशय्यां |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||१७||

साध्वीकराब्जवलयध्वनिनासमेतो |
गानध्वनिः सुदधि मन्थन घोष पुष्टः |
संश्रूयते प्रतिग्रहं रजनी विनष्टा |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||१८||

भास्वानुदेश्यति हिमांशुर भूद्गतश्रीः |
पूर्वान्दिशामरुणयन् समुपैत्यनूरुः |
आशाः प्रसाद सुभगाश्च गतत्रियामा |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||१९||

आदित्य चन्द्र धरणी सुत रौहिणेय |
जीवोशनः शनिविधुं तुदकेतवस्ते |
दासानुदास परिचारक भृत्य भृत्य |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||२०||

इन्द्राग्नि दण्डधर निर्रिति पाशिवायु  |
वित्तेश भूत पतयो हरितामधीशाः  |
आराधयन्ति पदवी च्युति शङ्कया त्वाम् |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||२१||

वीणां सती कमलजस्य करे दधाना  |
तन्त्र्यागलस्य चरवे कलयन्त्य भेदं |
विश्वं निमज्जयति गानसुधारसाब्धौ |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||२२||

देवर्षिरम्बर तलादवनीं प्रपन्नः |
त्वत्सन्निधौ मधुरवादित चारु वीणा |
नामानिगायति नत स्फुरितोत्तमाङ्गो |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||२३||

वातात्मजः प्रणत कल्प तरुर्हनूमान् |
द्वारे कृताञ्जलि पुटस्तवदर्शनार्थी |
तिष्ठत्यमुं कुरुकृतार्थमपेत निद्रं |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||२४||

सर्वोत्तमो हरिरिति श्रुतिवाक्य वृन्दैः |
चन्द्रेश्वर द्विरदवक्त्र षडाननाद्याः |
उद्घोशयन्त्य निमिषा रजनी प्रभात |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||२५||

मध्वाभिदे सरसि पुण्यजले प्रभाते |
गङ्गेम्भ सर्वमघमाशु हरेति जप्त्वा |
मज्जन्ति वैदिक शिखामणयो यथावन् |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||२६||

द्वारे मिलन्ति निगमान्त विदस्त्रयीज्ञाः |
मीमांसकाः पदविदोनयदर्शनज्ञाः |
गान्धर्ववेद कुशलाश्च तवेक्षणार्थं |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||२७||

श्री मध्वयोगि वरवन्दित पादपद्म |
भैष्मी मुखाम्भोरुह भास्कर विश्ववन्द्य |
दासाग्रगण्य कनकादिनुत प्रभाव |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||२८||

पर्याय पीठ मधिरुह्य मठाधिपास्त्वां |
अष्टौ भजन्ति विधिवत् सततं यतीन्द्राः |
श्री वादिराजनियमान् परिपालयन्तो |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||२९||

श्रीमन्ननन्त शयनोडुपिवास शौरे |
पूर्णप्रबोध हृदयाम्बर शीत रश्मे |
लक्ष्मीनिवास पुरुषोत्तम पूर्णकाम |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||३०||

श्री प्राणनाथ करुणा वरुणालयार्त |
सन्त्राण शौन्द रमणीय गुणप्रपूर्ण |
सङ्कर्षणानुज फणीन्द्र फणा वितान |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||३१||

आनन्दतुन्दिल पुरन्दर पूर्वदास |
वृन्दाभिवन्दित पदाम्बुजनन्द सूनो |
गोविन्द मन्दरगिरीन्द्र धराम्बुदाभ |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||३२||

मीनाकृते कमठरूप वराहमूर्ते |
स्वामिन् नृसिंह बलिसूदन जामदग्न्यः |
श्री राघवेन्द्र यदुपुङ्गव बुद्ध कल्किन् |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||३३||

गोपाल गोप ललनाकुलरासलीला |
लोलाभ्रनील कमलेश कृपालवाल |
कालीयमौलि विलसन्मणिरञ्जिताङ्घ्रे |
मध्वेश कृष्ण भगवन् तव सुप्रभातम् ||३४||

कृष्णस्य मङ्गल निधेर्भुवि सुप्रभातं |
येहर्मुखे प्रतिदिनं मनुजाः पठन्ति |
विन्दन्ति ते सकल वाञ्छित सिद्धिमाशु |
ज्ञानञ्च मुक्ति सुलभं परमं लभन्ते ||३५||

।। इति श्री उडुपि श्री कृष्ण सुप्रभातम् संपूर्णम् ।।
।। श्री कृष्णार्पणमस्तु ।।

==============================================

वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें ।।

==============================================

किसी भी तरह के पूजा-पाठ, विधी-विधान, ग्रह दोष शान्ति आदि के लिए तथा बड़े से बड़े अनुष्ठान हेतु योग्य एवं विद्वान् ब्राह्मण हमारे यहाँ उपलब्ध हैं ।।

==============================================

संपर्क करें:- बालाजी ज्योतिष केंद्र, गायत्री मंदिर के बाजु में, मेन रोड़, मन्दिर फलिया, आमली, सिलवासा ।।

WhatsAap+ Viber+Tango & Call: +91 - 8690 522 111.
E-Mail :: astroclassess@gmail.com

Website :: www.astroclasses.com
www.astroclassess.blogspot.com
www.facebook.com/astroclassess

।। नारायण नारायण ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।

कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने तथा वास्तु विजिटिंग के लिये अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें । पूजा-पाठ, विधी-विधान, ग्रह दोष शान्ति आदि के लिए तथा बड़े से बड़े अनुष्ठान हेतु योग्य एवं विद्वान् ब्राह्मण हमारे यहाँ उपलब्ध हैं । ज्योतिष पढ़ने के लिये संपर्क करें - बालाजी ज्योतिष केन्द्र, गायत्री मंदिर के बाजु में, मेन रोड़, मन्दिर फलिया, आमली, सिलवासा।।

0 comments:

Post a Comment

Note: only a member of this blog may post a comment.

BALAJI VED VIDYALAYA, SILVASSA.. Powered by Blogger.