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जातक की राजा की हस्ती और कुण्डली में चन्द्रमा ।।



जातक की राजा की हस्ती और कुण्डली में चन्द्रमा ।। Moon and matchless property.

हैल्लो फ्रेंड्सzzzzz.

मित्रों, सभी ग्रहों में चन्द्रमा को अत्यन्त शुभ ग्रह माना जाता है । यह हमारी पृथ्वी का सबसे नजदीकी ग्रह भी है अत: इसका प्रभाव भी जातक पर बहुत जल्दी होता है ।।

जन्म कुण्डली में चन्द्र जिस राशि पर होता है वही व्यक्ति की राशि होती है । चन्द्र राशि का महत्व लग्न के समान ही होता है । फलादेश करते समय लग्न कुण्डली के समान ही चन्द्र कुण्डली को भी प्रयुक्त किया जाता है ।। चन्द्रमा कई प्रकार के योग का भी निर्माण करता है जिनमें से कुछ योग शुभ फलदायी तो कुछ अशुभ फलदायी भी होते हैं । चन्द्रमा के द्वारा निर्मित कुछ मुख्य शुभ योगों में एक सर्वाधिक प्रभावी "गजकेशरी योग" होता है ।।

मित्रों, सभी शुभ योगों में "गजकेशरी योग" काफी जाना-पहचाना नाम है । यह योग "गुरू-चन्द्र" के सम्बन्ध से बनता है । जब गुरू एवं चन्द्र जन्म कुण्डली में एक दूसरे से केन्द्र स्थान में.... यानी 1, 4, 7, 10, में होता है अथवा "गुरू-चन्द्र" की युति इन भावों में होती है तो "गजकेशरी योग" बनता है । सामान्यतया इस योग से प्रभावित व्यक्ति बहुत विद्वान् होते हैं ।।

इनमें विवेक तथा दया की भावना प्रबल होती है । अधिकतर इस योग वाले व्यक्ति उच्च पद पर कार्यरत होते हैं । अपने गुणों एवं कर्मों के कारण मृत्यु के पश्चात भी इनकी ख्याति बनी रहती है ।। मित्रों, जन्म कुण्डली में जिस किसी घर में चन्द्रमा होता है उससे दूसरे घर में यदि कोई ग्रह बैठा हो तो "सुनफा योग" बनता है । इस योग में राहु केतु एवं सूर्य का विचार नहीं किया जाता है ।।

अर्थात् चन्द्रमा से दूसरे घर में राहु केतु एवं सूर्य हों तो "सुनफा योग" नहीं बनता । इस योग में चन्द्र से दूसरे घर में शुभ ग्रह हों तो योग उच्च स्तर का होता है ।। परन्तु मित्रों, यदि कोई एक शुभ तथा दूसरा अशुभ ग्रह हों तो इसे मध्यम दर्जे का माना जाता है । और यदि दोनों अशुभ ग्रह हैं तो भी योग तो बनता है परन्तु निम्न स्तर का ।।

कुण्डली में सुनफा योग जिस स्तर का होता है जातक को इसका लाभ भी वैसा ही मिलता है । जिनकी कुण्डली में यह योग होता है उस जातक को सरकारी क्षेत्र से काफी लाभ होता है ।। मित्रों, "सुनफा योग" की तरह ही अनफा योग में भी सूर्य को गौण माना जाता है यानी सूर्य से इस योग का विचार नहीं किया जाता । अनफा योग कुण्डली में तब बनता है......

जब जन्मकुण्डली में चन्द्रमा से बारहवें घर में कोई ग्रह बैठा होता है । ग्रह अगर शुभ है तो योग प्रबल होता है । चन्द्रमा से बारहवें घर में अशुभ ग्रह होने पर योग कमज़ोर हो जाता है ।। इस योग से प्रभावित व्यक्ति उदार एवं शान्त प्रकृति का होता है । नृत्य, संगीत एवं दूसरी कलाओं में इनकी काफी रूचि होती है । सुख-सुविधाओं में रहते हुए भी वृद्धावस्था में मन विरक्त हो जाता है ।।

योग एवं साधना ऐसे जातक को अत्यधिक पसंद होता है । जन्मकुण्डली में चन्द्रमा की स्थिति से "दुरूधारा योग" भी निर्मित होता है । परन्तु जब चन्द्रमा जिस भाव में हो उस भाव से दोनों तरफ कोई ग्रह बैठा हो ।। मित्रों, ध्यान रखने वाली बात यह है कि दोनों तरफ में से किसी ओर सूर्य नहीं होना चाहिए । अगर चन्द्र के दोनों तरफ शुभ ग्रह होंगे तो यह योग अधिक शक्तिशाली होगा ।।

एक ग्रह शुभ दूसरा अशुभ तो मध्यम दर्जे का तथा दोनों तरफ अशुभ ग्रह हों तो निम्न स्तर का योग बनेगा । "दुरूधरा योग" के विषय में यह कहा जाता है......

कि जिस जातक की कुण्डली में "दुरुधरा योग" शुभ तथा प्रभावी होता है वह जातक अत्यन्त समृद्धशाली होता है । इसे सर्वोत्तम भूमि एवं भवन का सुख प्राप्त होता है ।। मित्रों, चन्द्रमा केवल शुभ योग ही नहीं अपितु कुछ अशुभ योग भी बनाता है । चन्द्रमा द्वारा निर्मित अशुभ योगों में "केमद्रुम योग" प्रमुख है । यह योग जन्मपत्री में तब बनता है......

जब चन्द्रमा के दोनों तरफ के भाव में कोई ग्रह नहीं हो । इस योग के विषय में माना जाता है कि इससे प्रभावित व्यक्ति का मन अस्थिर रहता है ।।

असामाजिक अर्थात् सिर्फ गलत कार्यों में ही ऐसे जातक का मन लगता है । इसके फलस्वरूप संघर्ष भरा जिंदगी एवं जीवन में काफी उतार-चढ़ाव सदैव बने रहते हैं ।। वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें ।।


बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।

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