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भवन की ऊँचाई कितनी रखें - उच्च श्रेणी का वास्तु टिप्स ।। Height of the building.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, आज मैं आपलोगों को वास्तु के सिद्धान्तों में से उच्च कोटि का ज्ञान समर्पित करने का प्रयास करता हूँ । आज हम जानने का प्रयास करेंगे कि जब हम अपने घर का निर्माण करें तो कौन सी दीवार कितनी ऊँची रखें ।।

अगर हम अपने घर के चारो तरफ के दीवारों जिसे चहारदीवारी कहते हैं, के विषय में बात करें, तो हमारे भवन से पहले इसका निर्माण करते समय ये ध्यान रखना चाहिए कि हमारे दक्षिण-पश्चिम दिशा की चहारदीवारी उत्तर-पूर्व दिशा की अपेक्षा मोटी व ऊँची होनी चाहिए ।।

मित्रों, यदि मकान में निर्माण कार्य धीरे-धीरे चरणों में संपन्न कराने की आपकी योजना है, तो वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार ही करें । वास्तु के अनुसार सर्वप्रथम पश्चिम या दक्षिण दिशा में निर्माण कार्य आरम्भ करें ।।

वास्तुशास्त्र के सिद्धान्तों के अनुसार किसी भी मकान की ऊँचाई कितनी होनी चाहिए ? इसका पूरा ध्यान रखना चाहिए । ऊँचाई का हिसाब निकालने का वास्तु का सिद्धान्त तो ये है, कि जितनी मकान की चौड़ाई हो.....

उसके 16वें भाग में चार हाथ, 96 अंगुल जोड़ दें, इसका योग जितना हो उसके बराबर मकान की ऊँचाई होनी चाहिए । यदि बहुमंजिली मकान की योजना हो तो पहली ऊँचाई में से 12वाँ भाग कम करके दूसरी मंजिल की ऊँचाई रखें ।।

मित्रों, इसी क्रम से तीसरी एवं चौथी मंजिल का भी निर्माण करना चाहिए । तीसरी मंजिल के लिए दूसरी मंजिल से 12वाँ भाग कम करें । प्रत्येक मंजिल के लिए यह सामान्य क्रम ऊँचाई निर्धारित किया गया है ।।

यदि इस क्रम से 4, 31/2 , 3 हाथ जोड़ दें, तो यह ऊँचाई उत्तम मध्यम और कनिष्ठ तीन प्रकार की होगी । यदि इस क्रम में भी क्रमशः 4 हाथ में 20, 18, 16, अंगुल तथा 31/2 और 3 हाथ में 27, 21, 15 अंगुल और जोड़ें......

तो उत्तम, मध्यम और कनिष्ठ ऊँचाई के तीन-तीन भेद और हो जाएँगे । इस प्रकार कुल 12 भेद होते हैं जिसे बखूबी समझकर ही करना श्रेयस्कर होता है । इनमें 8वाँ व 10वाँ भेद समान होने चाहिए ।।

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।। नारायण नारायण ।।

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