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ज्योतिष के अति महत्वपूर्ण योग - कर्तरी योग जातक को क्या देता है ?।। important yoga in astrology.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,


मित्रों, आज हम कर्तरी योग के विषय में बात करेंगे । कर्तरी योग दो प्रकार का होता है । पहला पापकर्तरी योग एवं दूसरा शुभ कर्तरी योग । अब नाम से तो स्पष्ट है, कि पाप बुरा फलदायक होगा और शुभकर्तरी शुभ फलदायक होगा ।।

परन्तु आइये जानते हैं, कि ये दोनों प्रकार के योग जन्मकुण्डली में ग्रहों की किस प्रकार की स्थितियों से निर्मित होते हैं ? मूल रूप से यह योग लग्न से ही आधारित होता है ।।


मित्रों, जन्मकुण्डली में जब लग्न के दोनों तरफ अर्थात द्वितीय और द्वादश भावों में पाप ग्रह स्थित होते हैं तो "पापकर्तरि योग" बनता है । परन्तु यही स्थिति जब विपरीत हो जैसे लग्न से द्वितीय और द्वादश भावों में शुभ ग्रह स्थित हों तो "शुभ कर्तरि योग" बनता है ।। 

शुभ कर्तरि संजातस्तेजोवित्तबलाधिकः।।
पापकर्तरिके पापी भिक्षाशी मलिनो भवेत।।

अर्थ:- शुभ कर्तरी योग में जन्म लेने वाला मनुष्य तेजस्वी, धनी तथा बल से परिपूर्ण होता है । एवं पाप कर्तरी योग में जन्म लेने वाला मनुष्य भिक्षा मांगकर जीवन-यापन करने वाला, निर्धन व गन्दा होता है ।।


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