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राहु ग्रह की शान्ति का सरल उपाय एवं बच्चे की पढ़ाई ।। Rahu Ki Shanti And Bachchon Ki Padhaai.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,
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मित्रों, हमारे ब्लॉग-वेबसाईट और फेसबुक के माध्यम से ज्योतिष के लेख तो प्रतिदिन आपलोग पढ़ते ही है । मैं भी पूरा प्रयत्न करता हूँ, की ज्योतिष के गूढ़-से-गूढ़ ज्ञान को इसी प्रकार सतत आपलोगों तक पहुंचाता रहूँ ।।

इस माध्यम से लोगों का ज्योतिष का सम्पूर्ण एवं निर्मल ज्ञान मिले । मैंने अपने पीछे के एक लेख में बताया था, की अच्छे एवं बुरे ग्रहों की पहचान कैसे करें ? इस विषय पर मैंने विस्तृत लेख लिखा था, साथ ही ये भी कहा था कि अपने अगले लेख में आपलोगों को इस विषय में और भी बहुत कुछ बताऊंगा ।।

मित्रों, कई बार किसी समय-विशेष में कोई ग्रह अशुभ फल देता है । जब इन्सान बहुत ही परेशान हो जाता है । ऐसे में इस प्रकार के ग्रहों की की शान्ति करवानी अनिवार्य हो जाती है । आज मैं ग्रह दोषों की शान्ति के लिए कुछ वैदिक एवं सरल उपाय बताता हूँ ।।

वैसे तो मैं लगभग हर बार ग्रह दोषों के शान्ति की सरल विधी बताते ही रहता हूँ । इनमें से किसी एक को भी यदि भाव पूर्वक आप करेंगे तो ग्रहों के द्वारा प्रदत्त अशुभ फलों में कमी आयेगी और शुभ फलों की वृद्धि होगी । तब हमारा कोई ऐसा काम जिसमें बार-बार बाधायें आती हैं वो सरलता से सम्पन्न हो जायेगी ।।
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मित्रों, किसी भी ग्रहों की शान्ति हेतु उनके मंत्र का जप उनके जप संख्या के अनुसार किया जाना चाहिये । सैद्धान्तिक रूप से जप का दशांश हवन भी अवश्य करना चाहिये । परन्तु यदि आप स्वयं जप करते हैं तो हवन के जगह पर किसी श्रेष्ठ ब्राह्मण को उस ग्रह से सम्बंधित द्रव्य का दान कर सकते हैं ।।

वैसे तो मंत्र का जप स्वयं करें परन्तु अगर आपके पास समय नहीं हो तो किसी विद्वान्, वेदपाठी तथा कर्मनिष्ठ ब्राह्मण से सम्बंधित ग्रह का जप करवायें । तथा हवन भी विधिपूर्वक जप का दशांश उचित सामग्री से अथवा ग्रहों की समिधा से शुद्ध गाय के घी में डुबोकर करवायें ।।

मित्रों, ग्रहों की शान्ति का दूसरा सरल उपाय है सम्बंधित ग्रह का रत्न-उपरत्न धारण करना । ग्रहों के जो निर्धारित दान द्रव्य बताये गये हैं, उनके दान करने चाहिये । दान अथवा रत्न-उपरत्न भी यदि धारण नहीं कर सकते तो अभाव में ग्रहों की जो जड़ी-बूटी बतायी गयी है, उसे विधिवत् सिद्ध करके धारण करें शांति अवश्य मिलेगी ।।

जहाँतक राहु की बात है तो इसके जप के लिये रात्रिकाल का समय सर्वाधिक श्रेष्ठ माना गया है । भैरवजी के पूजन या फिर शिव पूजन से अथवा काल भैरव अष्टक के पाठ से राहू के दु:ष्प्रभावों से शान्ति मिलती है । राहु के मूल मंत्र का जप रात्रि में 18,000 बार 40 दिन में कर सकते हैं ।।

मित्रों, राहू का वैदिक मंत्र : "ॐ कया नश्चित्र आ भुवदूती सदावृधः सखा । कया शचिष्ठया वृता:" ।। तांत्रिक मन्त्र : "ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम:" ।। अथवा : "ॐ रां राहवे नम: ।।
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राहू की शान्ति हेतु दान के लिये कुछ द्रव्य बताया गया है । जैसे - गोमेद, सोना, सीसा, तिल, सरसों का तेल, नीला कपड़ा, काला फूल, तलवार, कंबल, घोड़ा, सूप । इन सभी वस्तुओं के श्रद्धापूर्वक दान करने से राहू के दोषों की निवृत्ति हो जाती है ।।

मित्रों, शनिवार का व्रत करने से भी राहू के दु:ष्प्रभावों से शान्ति मिलती है । भैरव, शिव अथवा माता चंडी की पूजा-आराधना करने से भी राहू के दोषों की निवृत्ति हो जाती है । 8 मुखी ओरिजनल रुद्राक्ष धारण करने से भी राहू का मारकत्व तक समाप्त हो जाता है ।।

किसी बच्चे की कुण्डली में राहू की दशा चल रही हो और उसका पढ़ाई में मन नहीं लगता हो तो आप इस सरल से उपाय को करके उसके जीवन को सुधार सकते हैं । शुक्ल पक्ष के पहले बृहस्पतिवार को सूर्यास्त से ठीक आधा घंटा पहले बड़ के पत्ते पर पांच अलग-अलग प्रकार की मिठाईयां तथा दो छोटी इलायची पीपल के वृक्ष के नीचे श्रद्धा भाव से बच्चे से रखवा दें ।।

बच्चे से कहें की वो अपनी शिक्षा के लिये कामना करें अथवा प्रार्थना करे । इन सभी सामग्रियों को वहाँ रखकर बिना पीछे मुड़कर न देखें, सीधे अपने घर आ जाये । इस प्रकार बिना क्रम टूटे तीन बृहस्पतिवार तक करना है । यह उपाय माता-पिता भी अपने बच्चे के लिये कर सकते हैं, बच्चा करे तो सर्वोत्तम ।।
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