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संतान दोष एवं उसके निवारण के कुछ सरल उपाय भाग-३. Santan Dosh And Nivaran Vidhi Part-3.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,


मित्रों, मैंने अपने पिछले सन्तान सुख वाले लेख में सन्तान प्राप्ति के उत्तमोत्तम योगों का वर्णन किया था जो कि ज्योतिष के सूत्रों पर सम्पूर्ण रूप से आधारित था । आज भी मैं अपने इस लेख में भी कुछ और सन्तान सुख प्राप्ति के ज्योतिष के कुछ उत्तमोत्तम योगों की चर्चा करेंगे । तो चलिए आज कुछ और सर्वोत्तम श्रेणी के ज्योतिषीय योग जो की सन्तान देते हैं, की चर्चा कर लेते हैं ।।

सर्वप्रथम पति और पत्नी की जन्म कुण्डलियों से संतानोत्पत्ति की क्षमता पर विचार करना चाहिए । ज्योतिष के अन्य ग्रंथों के अनुसार पुरुष की कुण्डली में सूर्य स्पष्ट, शुक्र स्पष्ट और गुरु स्पष्ट का योग करें । राशि का योग यदि 12 से अधिक आये तो उसमें 12 से भाग दे दें । शेष राशि (बीज) तथा उसका नवांश दोनों विषम हों तो संतानोत्पत्ति की  पूर्ण क्षमता, एक सम एक विषम हो तो क्षमता मध्यम तथा दोनों सम हों तो अक्षमता होती है ।।

इसी प्रकार स्त्री की कुंडली से चन्द्र स्पष्ट, मंगल स्पष्ट और गुरु स्पष्ट से विचार करना चाहिये । शेष राशि (क्षेत्र) तथा उसका नवांश दोनों सम हों तो संतानोत्पत्ति की  पूर्ण क्षमता, एक सम एक विषम हो तो क्षमता मध्यम तथा दोनों विषम  हों तो अक्षमता होती है । बीज तथा क्षेत्र का विचार करने से अक्षमता सिद्ध होती हो तथा उन पर पाप युति या दृष्टि भी हो तो उपाय करने पर भी लाभ की संभावना क्षीण होती है ।।


बीज तथा क्षेत्र का विचार करने से अक्षमता सिद्ध होती हो और उन पर शुभ युति दृष्टि हो तो शान्ति उपायों (पूजा-पाठ आदि) से एवं औषधि उपचार से लाभ होता है । शुक्र से पुरुष की तथा मंगल से स्त्री की संतान उत्पन्न करने की क्षमता का विचार करना चाहिये । पुरुष व स्त्री जिसकी अक्षमता सिद्ध होती हो उसे किसी कुशल वैद्य से परामर्श लेना चाहिए ।।

मित्रों, सूर्यादि ग्रह अपनी नीच राशि, शत्रु आदि की राशि में अथवा नवांश में, पाप युक्त, पाप दृष्ट, अस्त अथवा त्रिक भावों का स्वामी हो कर पंचम भाव में हों तो संतान बाधा होती है । योग कारक ग्रह की पूजा, दान, हवन आदि से शान्ति करा लेने पर बाधा का निवारण हो जाता है । सन्तान सुख की प्राप्ति इन उपायों से हो जाता है । फलदीपिका की बात करें, तो - 

एवं हि जन्म समये बहुपूर्वजन्मकर्माजितं दुरितमस्य वदन्ति तज्ज्ञाः ।।
तत्तद्ग्रहोक्तजपदानशुभक्रिया-भिस्तददोषशान्तिमिह शंसतु पुत्र सिद्धयै ।। (अध्याय-१२, पुत्रभाव फलम्, श्लो.२३.)

अर्थात् = जन्म कुंडली से यह ज्ञात होता है, कि पूर्व जन्मों के किन पापों के कारण संतान हीनता का दोष है । बाधाकारक ग्रहों या उनके देवताओं का जप, दान, हवन आदि शुभ क्रियाओं के करने से पुत्र प्राप्ति हो जाती है ।।


मित्रों, सूर्य संतान प्राप्ति में बाधक है तो कारण पितृ पीड़ा है । पितृ शान्ति के लिए गयाजी में पिंड दान करना चाहिये । हरिवंश पुराण का श्रवण एवं सूर्य का रत्न माणिक्य धारण करने से भी बहुत फर्क पड़ता है । रविवार को सूर्योदय के बाद गेंहु, गुड, केसर, लाल चन्दन, लाल वस्त्र, ताम्बा, सोना तथा लाल रंग के फल दान करने चाहिये ।।

सूर्य के बीज मन्त्र "ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः" इस मन्त्र का 7000 की संख्या में जप करने से भी सूर्य कृत अरिष्टों की निवृति हो जाती है । गायत्री मन्त्र के जप से, रविवार के मीठे व्रत (नमक का परित्याग करने से) रखने से तथा ताम्बे के पात्र में जल में लाल चन्दन, लाल पुष्प ड़ाल कर नित्य सूर्य को अर्घ्य देने पर भी शुभ फल प्राप्त होता है । विधि पूर्वक बेल पत्र की जड़ को रविवार को लाल डोरे में धारण करने से भी सूर्य प्रसन्न हो कर शुभ फल प्रदान करते हैं ।।

मित्रों, यदि चन्द्रमा संतान प्राप्ति में बाधक हो तो कारण माता का शाप, माँ दुर्गा की अप्रसन्नता अथवा कुल देवी या किसी देवी का कोप है । जिसकी शांति के लिए रामेश्वर तीर्थ का स्नान एवं गायत्री मन्त्र का जप लाभदायक सिद्ध होता है । श्वेत तथा गोल मोती को चांदी की अंगूठी में रोहिणी, हस्त अथवा श्रवण नक्षत्र में जड़वा कर सोमवार या पूर्णिमा तिथि में पुरुष दायें हाथ में तथा स्त्री बाएं हाथ की अनामिका या कनिष्टिका अंगुली में धारण करें ।।


अंगूठी धारण करने से पहले "ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः" मन्त्र का कम से कम १०८ जप करें । इस अंगूठी में चन्द्र ग्रह की प्रतिष्ठा करके धूप, दीप, पुष्प, अक्षत आदि से पूजन करें । सोमवार को नमक रहित व्रत रखें तथा उपरोक्त मन्त्र का ११००० की संख्या में जप करें । सोमवार को चावल, चीनी, आटा, श्वेत वस्त्र, दूध, दही तथा नमक एवं चांदी इत्यादि का दान करें ।।

मित्रों, सन्तान दोष किस ग्रह के दोष के वजह से बन रहा है तो कौन सा उपाय करके हम अपने जीवन में सन्तान प्राप्ति कर सकते हैं, हमने इस क्रम में अबतक सूर्य एवं चन्द्रमा से निर्मित दोष, उसके निवारण एवं सन्तान प्राप्ति के उपायों का विस्तृत वर्णन कर दिया है । अब हम अपने अगले लेख में इस क्रम में अगले ग्रह मंगल से लेकर आगे के ग्रहों के विषय में विस्तृत वर्णन करेंगे ।।

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