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पति-पत्नी का सम्बन्ध और बुध ग्रह की स्थिति ।। Pati-Patni Ka Sambandh And Budh Graha.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,


मित्रों, आइये आज हम सीधे अपने मूल विषय कि ओर ही चलते हैं । देखते हैं कि वैदिक ज्योतिष के अनुसार नवग्रहों में बुध को राजकुमार कहा जाता है । इसकी अपनी कोई शक्ति नहीं होती यह जिस ग्रह के साथ होता है उसके गुण को ग्रहण कर लेता है और उसी के अनुसार अच्छा या बुरा फल देता है ।।

दाम्पत्य जीवन के संदर्भ में बुध की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है । कुण्डली में इस ग्रह की स्थिति के आधार पर वैवाहिक जीवन और पति-पत्नी के सम्बन्ध के बारे में जाना जाता है । जिस स्त्री अथवा पुरूष की कुण्डली में बुध सप्तम भाव में होता है उसे बुद्धिमान जीवन साथी मिलता है । परन्तु इसी प्रकार बुध की राशि मिथुन या कन्या में से कोई भी अगर सप्तम भाव हो तो भी उसका फल समान ही होता है ।।

मित्रों, सप्तम भाव में बुध का नवांश होने से भी बुद्धिमान जीवन साथी मिलता है । परन्तु ज्योतिषीय सिद्धान्तों के अनुसार मिथुन या कन्या राशि में सप्तम भाव में चन्द्रमा का होना जीवन साथी के लिए कष्टकारी माना जाता है । मिथुन राशि में बुध के साथ चन्द्रमा हो तो जीवन साथी के व्यवहार के कारण उस पर शक की गुंजाईश रहती है । कन्या राशि में बुध के साथ चन्द्रमा हो तो जीवन साथी के साथ रिश्तों में दूरियां एवं जल क्षेत्र से खतरा भी हो सकता है ।।


जिस व्यक्ति की कुण्डली में मीन राशि में बुध होता है उसकी पत्नी सुंदर होती है । इस कुण्डली वाले जातकों को संतान प्राप्ति के लिए काफी इंतजार करना पड़ता है । साथ ही ऐसे लोगों को बिना चिकित्सक के परामर्श एवं औषधि के सन्तान नहीं होता है । पुत्र हो भी जाय तो उस पुत्र से सुख मिलना भी इनके लिए कठिन होता है । क्योंकि किसी कारणवश इनका पुत्र इनसे दूर हो जाता है ।।

मित्रों, किसी भी जातक की जन्म कुण्डली में बुध यदि मिथुन राशि में बैठा हो तो इस बात की सम्भावना प्रबल हो जाती है, कि जातक के पिता का अन्य स्त्रियों से भी मित्रवत सम्बन्ध हो सकते हैं । मिथुन राशि में बुध का यह संयोग उसके पिता को विवाहेत्तर सम्बन्ध के लिए उकसाता है ।।

किसी जातक की कुण्डली में सप्तम भाव में अगर बुध अकेला बैठा है तो यह इस बात का संकेत है कि व्यक्ति परायी स्त्रियों से सम्बन्ध रखने वाला होगा । इस व्यक्ति के प्रति स्त्रियां स्वयं आकर्षित होती है और यह अपनी धन दौलत एवं क्षमताओं से स्त्री सुख का आनन्द लेता रहता है । इस प्रकार की बुध की स्थिति वाले व्यक्ति पत्नी के अलावा अन्य स्त्रियों से भी सम्बन्ध रखने वाला हो सकता है ।।


मित्रों, बुध अगर द्वादश भाव में अकेला बैठा हो तो जातक का जीवनसाथी किसी अन्य व्यक्ति से  सम्बन्ध रखने वाला हो सकता है । इस स्थिति के कारण परिवार में कलह और असंतोष का माहौल बना रह सकता है । ऐसे जातकों को अपने पैतृक सम्पत्ति के लिए अदालत भी जाना पड़ सकता है । परन्तु वहाँ भी कोई जरुरी नहीं की इनको सफलता मिल सके वहाँ भी दुर्भाग्य इनका पीछा नहीं छोड़ेगा और इनकी हार ही होगी ।।

जिस जातक की कुण्डली में बुध के नवमांश में शुक्र हो उसे विवाह करने से पहले सामने वाले की कुण्डली भी अच्छी तरह परख लेना चाहिये । क्योंकि इनके वैवाहिक जीवन में यौन सम्बन्धों को लेकर तनाव की स्थिति बनी रहती है । इस वजह से पति-पत्नी में सदैव असंतोष बना रहता है । ऐसे जातक या तो स्वयं यौन सम्बन्धी मामले में अक्षम होते हैं या इनका जीवन साथी । अत: विवाहेत्तर सम्बन्ध स्थापित होने के कारण दाम्पत्य जीवन दु:खद ही रहता है ।।

मित्रों, अगर किसी कन्या की कुण्डली में बुध और शनि की युति हो तो यह वैवाहिक जीवन के लिए शुभ नहीं माना जाता । इसके वजह से कन्या को दुर्बल पति प्राप्त होता है । अगर यह योग लग्न, सप्तम या द्वादश भाव में हो तो दाम्पत्य जीवन के लिये और भी कष्टकारी साबित होता है । इस युति पर अगर मंगल अथवा गुरू की नवम या पंचम दृष्टि पड़ रही हो अथवा वर की कुण्डली में लग्न या पंचम भाव पर बलवान पुरूष ग्रहों का प्रभाव हो तो कन्या के लिए सुखकर माना जाता है परंतु वैवाहिक जीवन के सुख में कमी बनी ही रहती है ।।


जिस जातक की कुण्डली के सप्तम भाव में बुध यदि मकर या कुम्भ राशि पर हो तो उनके वैवाहिक जीवन में प्रेम की जगह क्लेश अधिक होता है । मकर-कुम्भ शनि की राशि हैं और बुध शनि का मित्र ग्रह है । फिर भी दोनों में मन मुटाव रहता है, उसका कारण यह है कि शनि स्त्री ग्रह है और बुध का स्वभाव भी स्त्री (नपुंशक) ग्रह जैसा है । इसके कारण पति-पत्नी में असंतोष रहता है जो दाम्पत्य जीवन में असंतुष्टि और क्लेश लाता है ।।

मित्रों, सप्तम भाव में बुध सिंह राशि में बैठा हो तो जातक को मनचाही पत्नी नहीं मिलती है । इस योग में अगर सूर्य भी शामिल हो यानी सप्तम भाव में सिंह राशि हो और वहाँ बुध-सूर्य की युति हो तो पत्नी चरित्रवान तो होती है परंतु अत्यन्त क्रोधी तथा उग्र स्वभाव वाली होती है । इनमें घमण्ड, अहंकार एवं बात बात में नाराज़ होने की आदत होती है जिसके कारण वैवाहिक जीवन की मधुरता समाप्त हो जाती है ।।

सप्तम भाव में धनु या मीन राशि बैठी हो और वहाँ बुध हो तो यह पत्नी के प्रति शक की भावना को बढ़ाता है । इसका कारण यह है कि बुध गुरू का शत्रु ग्रह है तथा मीन राशि में बुध नीच का हो जाता है । सप्तम भाव साझेदारी का भाव माना जाता है मीन में बुध के होने से व्यक्ति को साझेदारी में धोखा मिलता ही है । विवाह अर्थात एक प्रकार की साझेदारी ही है अत: यहां भी धोखा मिलने की पूरी संभावना रहती है ।।


मित्रों, कुण्डली में बुध की स्थिति का वैवाहिक जीवन पर काफी गहरा प्रभाव पड़ता है । इसलिये विवाह के समय कुण्डली मिलाते समय बुध की स्थित का सम्पूर्ण रूप से आंकलन करें । हमारे पूर्वाचार्यों के अनुसार विवाह के लिये वर-वधू की कुण्डली में कितने भी अधिक गुण क्यों न मिल रहें हों परन्तु बुध का योग सही नहीं हो तो विवाह सोच समझ करके ही करें ।।

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