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बुध ग्रह की स्थिति एवं उनका मानवीय जीवन पर शुभाशुभ प्रभाव ।। Budh Grah And Manav Jivan.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,


मित्रों, ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ग्रहों की संख्या 9 है परन्तु सप्ताह में दिन सात ही होते हैं । ये सातो दिन सात ग्रह के दिन माने जाते हैं । दो ग्रहों के लिये दिनों की संख्या में अर्थात दिन के प्रतिदिन में से कोई स्पेशल दिन का निर्धारण नहीं होता । परन्तु सप्ताह के प्रत्येक दिन के साथ 9 ग्रहों में से प्रत्येक ग्रह का सम्बन्ध होता है ।।

राहू और केतु इन दोनों को छाया ग्रह माना जाता है, इसलिये इनका कोई स्पेशल दिन निर्धारित नहीं होता । सप्ताह के सात दिनों में से बुधवार सप्ताह का तीसरा दिन है, जिसका स्वामी बुध ग्रह है । ज्योतिषशास्त्रानुसार बुध कम्युनिकेशन, नेटवर्किंग, विचार, चर्चा एवं अभिव्यक्ति का प्रतिनिधित्व करता है । बुध, सौर मंडल के बाकि के आठ ग्रहों में सबसे छोटा और सूर्य के अति सन्निकटिय ग्रह है । बुध हरे का रंग शीतल और नम ग्रह माना जाता है ।।

मित्रों, ज्योतिष और वैदिक ग्रंथों में, बुध को एक कोमल ग्रह के रूप में देखा जाता है या कह सकते हैं कि चंद्रमा के गुण रखने वाला ग्रह है । इसके अलावा, बुध को चंद्रमा का पुत्र भी कहा जाता है । ज्योतिषीय दृष्टि से बुध तीसरे एवं छठे क्रमशः मिथुन एवं कन्या राशि स्वामी है । कन्या राशि में शुरूआती 15 डिग्री में बुध उच्च का एवं बाकी 15 डिग्री में मूलत्रिकोणी कहलाता है । मिथुन में बुध स्वगृही होता है तथा मीन राशि में बुध नीच का होता है ।।

बुध को राजकुमार, युवा, बेचैन, चंचल, बुद्धिमान, प्रज्ञात्मक, चतुर, मजाकिया, मनोरंजक, बातूनी, विश्लेषणात्मक, तार्किक, वैज्ञानिक, गणनात्मक, हंसमुख, लापरवाह, लचीले स्वभाव, बहुमुखी, हाजिर जवाबी, मिलनसार, मित्रवत एवं तार्किक विशेषताओं के कारक ग्रह के रूप में जाना जाता है अथवा कहा जाता है । जिन जातकों की जन्मकुण्डली में बुध अच्छी जगह या अच्छी स्थिति में होता है, उन जातकों में उपरोक्त गुण एवं विशेषताएं काफी मात्रा में विद्यमान होती है ।।

मित्रों, बुध को चतुर्थ एवं दसम भाव का कारक ग्रह भी माना जाता है । चतुर्थ भाव से माता, सुख, मकान, जमीन, जायदाद, धन, खेती-बाड़ी, मोटरकार, आभूषण वस्त्र, पानी, नदी, पुल, स्वसुर, सुगन्ध और गाय-भैंस इत्यादि पशुधन के बारे में जानकारी मिलती है । वहीँ दशम भाव से हमें पिता, राज्य, हुकूमत, पद प्राप्ति, पदोन्नति, कर्म व्यापार, ट्रान्सफर, पूर्व जन्म और सास के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं ।।

बुध को ज्योतिष, गणित, डाक्टरी, बुद्दि, बीमा एजेंसी, शिल्प विद्या, नृत्य, हास्य, लक्ष्मी, व्यापार, गाना तथा लेखन आदि का स्थिर कारक ग्रह है । इसमें भी मुख्य रूप से बुध वाणी एवं वात-पित्त-कफ का अधिष्ठाता एवं पूर्ण कारक होता है । बुध एक नपुंसक तथा शुभ ग्रह है और यह अनुराधा, ज्येष्ठा एवं मूल नक्षत्र में पूर्ण बलवान होता है । बुध का हमारे शरीर के अंगों में हमारी त्वचा एवं नाभि के निकट स्थलों पर ज्यादा प्रभाव रखता है ।।

मित्रों, बुध अथवा किसी भी ग्रह की कोई निश्चित सीमायें नहीं होती सभी ग्रह सभी क्षेत्रों में अपना प्रभाव रखते हैं । वैसे मनुष्य के ३२ वर्ष की आयु में बुध उसपर ज्यादा प्रभावी होता है । बुध के बारे में अभी और बहुत कुछ बाकि है । तो अगले बुधवार को फिर से बुध के विषय में और भी बहुत कुछ रोचक जानकारियाँ आपलोगों के लिये लेकर आयेंगे । क्योंकि इस विषय पर लेख अभी जारी है....

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।।। नारायण नारायण ।।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।

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