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मजिस्ट्रेट, जज, प्रिंसिपल, एमएलए, एमपी, प्रसिद्द राजनेता एवं यूनिवर्सिटी हेड़ बनाता है-देवगुरु बृहस्पति ।।



मजिस्ट्रेट, जज, प्रिंसिपल, एमएलए, एमपी, प्रसिद्द राजनेता एवं यूनिवर्सिटी हेड़ बनाता है-देवगुरु बृहस्पति ।। MP, MLA, Magistrate And judge etc Banata Hai Brihaspati.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, आज गुरुवार है, तो आज देवगुरु बृहस्पति से सम्बन्धित लेख आप सभी के लिये प्रस्तुत है । हम मनुष्यों के जीवन काल में कई तरह के मुश्किल हालात रह-रहकर पैदा होते हैं, जिनका हल ढ़ूंढ़ना कभी-कभी बड़ा मुश्किल हो जाता है । कई जगह भटकने के बाद परेशान इंसान अंततः ज्योतिष की शरण में अपनी मुश्किलों का जवाब पाने की कोशिश करता है । यश-पद-प्रतिष्ठा-धन-संपत्ति-ऐश्वर्य आदि गुरु या बृहस्पति ग्रह के क्षेत्र माने जाते हैं ।।
किसी भी जन्मकुण्डली में सर्वप्रथम बृहस्पति के बलाबल और अन्य ग्रहों के साथ उसके सम्बन्धों का निश्चित आँकलन करना चाहिये । कुण्डली का कमजोर गुरु जीवन में कई प्रकार का संकट पैदा करता है, परन्तु गुरु यदि मजबूत हो तो जातक को कई प्रकार का लाभ भी करवाता है । गुरु यदि मजबूत हो तथा शुभ भावों में बैठा हो तो ऐसे में जातक को भौतिक से ज्यादा आध्यात्मिक लाभ प्रदान करता है ।। 

मित्रों, गुरु की अलग-अलग लग्नों में उपस्थिति अलग-अलग परिणाम देती है । जिस राशि पर गुरु बैठा होता है, उसका भी प्रभाव गुरु के प्रभाव के साथ संयुक्त हो जाता है । गुरु आचार्य है, जिस भी वस्तु या व्यक्ति में भारीपन अर्थात गुरुत्व है, उसका कारक गुरु ही होता है । स्वर्ण तथा मूल्यवान वस्तुओं एवं पदार्थों का भी प्रतिनिधित्व गुरु ही करता है । गुरु ही पद-प्रतिष्ठा, आध्यात्मिकता-धार्मिकता, ज्ञान-विज्ञान आदि का पूर्ण कारकत्व रखता है ।।
सभी नौ ग्रहों में सर्वाधिक शुभता गुरु के पास ही होती है इस बात में कोई संशय नहीं है । किसी शुभ ग्रहों के साथ इसकी दृष्टि-युति इसके शुभत्व को बढ़ाती है । इतना ही नहीं गुरु अपने शत्रु पर भी दृष्टि डालता है तो उसे भी बल प्रदान करता है । कुण्डली में गुरु बलवान एवं शुभ हो तो जातक को प्रसिद्धि दिलाने में सहायता करता है । जबकि बलहीन एवं अशुभ गुरु के कारण जातक के जीवन में शत्रुओं की वृद्धि, रोग बाधा एवं अपमान आदि दिलाता है ।।

मित्रों, गुरु संतान का विशेषकर पुत्र संतान का भी कारक ग्रह होता है । किसी स्त्री जातक की कुण्डली में यही गुरु पति का कारक होता है । जिस भी स्त्री का गुरु कमजोर हो, उसके विवाह में विलंब होने के साथ ही उसका दाम्पत्य भी सुखी नहीं रहता है । स्त्री के सुखी वैवाहिक जीवन के लिए गुरु का संतुलित होना आवश्यक होता है । इसी प्रकार जीवन में पुत्र की लालसा भी तभी पूरी होती है, जब गुरु की संतान भाव पर दृष्टि हो ।।
गुरु की पञ्चम भाव पर शुभ दृष्टि अथवा पञ्चम भाव में स्वयं गुरु की उपस्थिति हो या फिर पञ्चमेश के ऊपर गुरु का प्रभाव हो तो योग्य एवं गुनी सन्तान के योग बनते हैं । कुण्डली में गुरु के मजबूत होने से धन-धान्य की वृद्धि, सुखोपभोग, विवेकशीलता, तर्क-न्याय से भरा जीवन सुलभ होता है किंतु उसका बलहीन होना विवेकहीन, अन्यायी, कलंक आदि अपमान तथा राजदण्ड से भय आदि प्रदान करवाता है ।।

मित्रों, ये तो तय है, कि गुरु बाकि के सभी ग्रहों में से सबसे अधिक शुभ ग्रह होता है । जीवन में हर क्षेत्र में सफलता के पीछे गुरु ग्रह की शुभता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है । जन्मकुण्डली में अगर गुरु मजबूत हो तो सफलता का कदम चूमना बिल्कुल तय है । किसी भी तरह की सफलता के पीछे सकारात्मक उर्जा का होना अहम होता है और यही काम गुरु करता है । गुरु जीवन के अधिकतर क्षेत्रों में सकारात्मक उर्जा प्रदान करने में सहायक होते हैं ।।
गुरु जातक को आशावादी बनाता है और निराशा को जीवन में प्रवेश नहीं करने देता है । यही वजह है, कि सफलता खुद ब खुद व्यक्ति का कदम चूमने लगती है । किसी भी व्यक्ति को जीवन में जब सफलता मिलती है तब उसकी जिंदगी खुशियों से भर जाती है । परन्तु अगर आपकी कुण्डली में आपका गुरु शुभ नहीं है अथवा बलहीन है तो गुरु को प्रसन्न करना पड़ेगा तभी सफलता प्राप्ति के मार्ग प्रशस्त हो सकेगी ।।

मित्रों, लेकिन यही गुरु अगर कमजोर हो तो तमाम मुश्किलें जातक का जीना हराम कर देती है । बनते हुए काम बिगड़ जाते हैं, किसी काम में यश नहीं मिलता, घर में पैसे की तंगी बनी रहती है और स्वास्थ्य पर भी इसका असर दिखने लगता है । ऐसे में ये जानना बहुत जरूरी होता है कि अगर आपकी कुण्डली में गुरु कमजोर हो तो उसे मजबूत कैसे करें और कैसे घर में खुशहाली लायें ।।
देवगुरु बृहस्पति को अनुकूल करने के लिये चीनी, केला, पीला वस्त्र, केशर, नमक, मिठाईयां, हल्दी, पीला फूल और भोजन आदि का दान करना चाहिये । इसकी शान्ति के लए बृहस्पति से सम्बन्धित रत्न का दान करना भी श्रेष्ठ बताया गया है । परन्तु कुछ भी दान करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि दिन बृहस्पतिवार हो और सुबह का समय हो ।।

मित्रों, गुरु के लिये दान किसी ब्राह्मण, गुरू अथवा पुरोहित को करना विशेष लाभदायक होता है । बृहस्पतिवारका व्रत भी रख सकते हैं इससे भी बृहस्पति का अशुभ प्रभाव कम होता है । कमज़ोर बृहस्पति वाले व्यक्तियों को केला और पीले रंग की मिठाईयां गरीबों, पक्षियों विशेषकर कौओं को खिलाना चाहिये । ब्राह्मणों एवं गरीबों को दही चावल खिलाना भी बृहस्पति को अनुकूल बनाता है ।।
रविवार और बृहस्पतिवार को छोड़कर अन्य सभी दिन पीपल के जड़ को जल से सिंचना चाहिये । गुरू, पुरोहित और शिक्षक बृहस्पति ग्रह के प्रतिरूप होते हैं, अत: इनकी सेवा से भी बृहस्पति के दुष्प्रभाव में कमी आती है । केला का सेवन अथवा घर में केला रखने से भी बृहस्पति से पीड़ित व्यक्तियों की कठिनाई बढ़ जाती है अत: इनसे बचना चाहिये । ऐसे व्यक्ति को अपने माता-पिता, गुरुजन एवं अन्य पूजनीय व्यक्तियों के प्रति आदर भाव रखना चाहिये ।।

मित्रों, प्रतिदिन और हर विशेष अवसरों पर सभी बुजुर्गों का चरण स्पर्श कर आशिर्वाद लेना चाहिये । सफेद चन्दन की लकड़ी को पत्थर पर घिसकर उसमें केसर मिलाकर माथे पर तिलक लगाना चाहिये । ऐसे व्यक्ति को मन्दिर में या किसी धर्म स्थल पर निःशुल्क सेवा करनी चाहिये । किसी भी मन्दिर के सम्मुख से निकलने पर अपना सिर श्रद्धा से अवश्य झुकाना चाहिये ।।
अशुभ गुरु वाले व्यक्ति को परस्त्री/परपुरुष से अवैध सम्बन्ध नहीं रखने चाहिये । गुरुवार के दिन मन्दिर में केले के पेड़ के सम्मुख शुद्ध देशी गाय के घी का दीपक जलाना चाहिये । गुरुवार के दिन आटे के गोलियों में चने की दाल, गुड़ एवं पीसी हल्दी मिलाकर गाय को खिलानी चाहिये । गुरु के दुष्प्रभाव निवारण के लिये जो भी टोटके करें गुरुवार के दिन, गुरु के नक्षत्र (पुनर्वसु, विशाखा, पूर्व-भाद्रपद) तथा गुरु की होरा में ही करें ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।

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