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पति-पत्नी का झगड़ा, बन्द बिजनेश चालू करवाने तथा बच्चों के पढ़ाई के लिए सरल टिप्स एवं आइये ज्योतिष सीखें ।।

पति-पत्नी का झगड़ा, बन्द बिजनेश चालू करवाने तथा बच्चों के पढ़ाई के लिए सरल टिप्स एवं आइये ज्योतिष सीखें ।। Some Attractive Tips and Learn Astrology.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,


पति-पत्नी का झगड़ा शान्त नही होता तो बेडरुम में एक ताम्बे के लोटे में पानी भरकर रखें, सुबह उठकर आधा-आधा पति-पत्नी पी जाएँ । महज कुछ ही दिनों के इस प्रयोग से घर का झगड़ा समाप्त हो जायेगा ।। आइये ज्योतिष सीखें ।। (टिप्स - अगर आपका बिजनेश बन्द सा हो गया है, तो करें ये आसन सा उपाय । थोडा सा हल्दी, पत्नी के सिन्दूर की डब्बी से थोडा सा सिन्दूर एक मिनरल वाटर के बोतल में मिलाकर अपने ऑफिस में छुपाकर रख दें । आपके कारोबार में कम से कम पाँच गुनी वृद्धि हो ही जाएगी ये निश्चित है ।।) क्या आपको ज्योतिष सीखने की इच्छा है ? मित्रों, वैसे तो ज्योतिष सीखने की इच्छा अधिकतर लोगों में होती है । लेकिन उनके सामने समस्या यह होती है कि ज्योतिष की शुरूआत कहाँ से की जाये ? कुछ जिज्ञासु मेहनत करके किसी ज्यातिषी को पढ़ाने के लिये राज़ी तो कर लेते हैं, लेकिन गुरूजी कुछ इस तरह ज्योतिष पढ़ाते हैं कि जिज्ञासु ज्योतिष सीखने की बजाय भाग खड़े होते हैं ।। बहुत से पढ़ाने वाले ज्योतिष की शुरुआत कुण्डली-निर्माण से करते हैं । ज़्यादातर जिज्ञासु कुण्डली-निर्माण की गणित से ही घबरा जाते हैं । वहीं कुछ बचे-खुचे लोग “भयात/भभोत” जैसे मुश्किल शब्द सुनकर भाग खड़े होते हैं । अगर कुछ छोटी-छोटी बातों पर ग़ौर किया जाए, तो आसानी से ज्योतिष की गहराइयों में उतरा जा सकता है । ज्योतिष सीखने के इच्छुक नये विद्यार्थियों को इन कुछ मुख्य बातों को ध्यान में रखनी चाहिए ।। (टिप्स - अगर बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लगता, तो आप एक बड़े मुँह वाले बोतल में पानी भरकर उसमें एक गोमतिचक्र डालकर बच्चे के पढ़ाई वाले टेबल के नीचे चुपचाप रख देवें । बच्चे का पढ़ाई में मन लगने लगेगा, लेकिन ये बात बच्चे को कदापि न बतायें ।।) शुरूआत में उतना ही पढ़ें जितना आपको याद रह सके । जब तक पहला पाठ समझ में न आये, दूसरे पाठ या पुस्तक को हाथ न लगायें । जो कुछ भी पढ़ें ध्यान से पढ़े, उसे पूरी तरह से समझने का प्रयत्न करें । बिना गुरू-आज्ञा के अन्य ज्योतिष की पुस्तकें न पढ़ें ।। शुरूआती दौर में कुण्डली-निर्माण की ओर ध्यान न लगायें, बल्कि कुण्डली के विश्लेषण पर ध्यान दें । शुरूआती दौर में अपने मित्रों और अपने नजदीकी लोगों से उनकी कुण्डलियों पर विश्लेषण करें । मुझे लगता है, कि ज्योतिष सीखने के इच्छुक व्यक्ति इन बातों को ध्यान में रखेंगे, तो जल्द ही ज्योतिष पर उमकी अच्छी पकड़ हो सकती हैं ।। (टिप्स - हर शुक्रवार को अवश्य ही अपने घर के मुख्य दरवाजे पर आटे का दीपक बनाकर तील के तेल का दीपक अवश्य ही जलाएं । अगर आप शुक्रवार को घर के मुख्य दरवाजे पर आटे के दीपक में तील के तेल का दीपक जलाते हैं, तो आपके घर लक्ष्मी के आने के मार्ग प्रशस्त होते हैं । जलकर जब बुझ जाए दीपक तो उस दीपक को किसी जलाशय में डाल दें, मछलियों के निमित्त ।।) मित्रों, मुख्य रूप से ज्‍योतिष के दो विभाग होते हैं - गणित और फलित । गणित के अन्दर मुख्‍य रूप से जन्‍म कुण्‍डली बनाना आता है जिसको आज के समय में सॉफ्टवेयर ने बिलकुल आसन कर दिया है । वैसे ज्योतिष पढने के इच्छुक व्यक्ति को गणित भी अवश्य पढ़ना चाहिए । इसमें समय और स्‍थान के हिसाब से ग्रहों की स्थिति की गणना की जाती है ।। दूसरी फलित विभाग में उन गणनाओं के आधार पर भविष्‍यफल बताया जाता है । इस श्रृंखला में हम ज्‍यो‍तिष के गणित वाले हिस्से की चर्चा बाद में करेंगे । मित्रों, हम यहाँ पहले फलित ज्‍योतिष पर ध्यान लगाएंगे और कुछ मुख्य सूत्रों को बताएँगे जिसे याद रखकर भविष्य में आप बड़े ज्योतिषी बन सकते हैं ।। मित्रों, किसी की भी कुण्डली उसके जन्म के समय अन्तरिक्ष में ग्रहों की स्थिति का एक नक्शा ही होता है । उसे हम जब अपने पास बनाकर अथवा किसी से बनवाकर रख लेते हैं और इसी को जन्म कुण्डली कहते हैं । आजकल बाज़ार में बहुत-से कम्‍प्‍यूटर सॉफ़्टवेयर उपलब्‍ध हैं और उन्‍हे जन्‍म कुण्‍डली निर्माण और अन्‍य गणनाओं के लिए प्रयोग किया जा सकता है ।। लेकिन ज्‍योतिष नौ ग्रहों, बारह राशियों, सत्ताईस नक्षत्रों और बारह भावों पर ही मुख्य रूप से टिकी हुई है । सारे भविष्‍यफल का मूल आधार इनका आपस में संयोग ही है । आधुनिक खगोल विज्ञान (एस्‍ट्रोनॉमी) के हिसाब से सूर्य तारा और चन्‍द्रमा उपग्रह है, लेकिन भारतीय ज्‍योतिष में इन्‍हें ग्रहों में शामिल किया गया है । राहु और केतु गणितीय बिन्‍दु मात्र हैं और इन्‍हें भी भारतीय ज्‍योतिष में ग्रह का दर्जा हासिल है ।। (टिप्स - अगर पति-पत्नी का झगड़ा शान्त नही होता, घर सुबह-शाम किचकिच होते ही रहती हो । तो आप अपने शयनकक्ष (बेडरुम) में सोने से पहले एक ताम्बे के लोटे में पानी भरकर रखें । सुबह उठकर पहले पति को आधा लोटा पानी पिलायें और बाकी का आधा लोटा पानी पत्नी स्वयं पी लें । महज कुछ ही दिनों के इस प्रयोग से घर का झगड़ा समाप्त हो जायेगा ।।) भारतीय ज्‍योतिष पृथ्‍वी को केन्द्र में मानकर चलती है । राशिचक्र वह वृत्त है जिसपर नौ ग्रह घूमते हुए मालूम होते हैं । इस राशिचक्र को अगर बारह भागों में बांटा जाये, तो हर एक भाग को एक राशि कहते हैं । इन बारह राशियों के नाम हैं- मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्‍या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन ।। इसी प्रकार जब राशिचक्र को सत्‍ताईस भागों में बांटा जाता है, तब हर एक भाग को नक्षत्र कहते हैं । मित्रों, आपमें से जो भी इस विषय के सिखने के अभिलाषी हों एक पांचांग बाजार से खरीद लेवें । क्योंकि उसमें से नक्षत्रों आदि की चर्चा जिसे आने वाले समय में हम करने वाले हैं, समझने में आसानी होगी ।। एक वृत्त को गणित में 360 कलाओं (डिग्री) में बाँटा जाता है । इसलिए एक राशि जो राशिचक्र का बारहवाँ भाग है, 30 कलाओं की हुई । फ़िलहाल ज़्यादा गणित में जाने की बजाय बस इतना जानना काफी होगा कि हर राशि 30 कलाओं की होती है । हर राशि का कोई न कोई मालिक एक ग्रह होता है ।। (टिप्स - अगर आपके घर में लक्ष्मी नहीं टिकती है, तो इस बात पर गम्भीरता से ध्यान केन्द्रित करें । आप अपने बाथरूम के बाल्टी को सदैव पानी से भरा हुआ रखें । अगर आपका बाल्टी खाली रहता है, तो इससे राहू ग्रह का थोडा सा भी शुभ फल आपको नहीं मिलेगा अपितु नाराजगी ही हाथ लगेगी और राहूरैश्वर्य प्रदायकः ।।) मित्रों, आगे हम राशि व ग्रहों के स्‍वभाव कैसे होते हैं, तथा किन ग्रहों से हम उनके स्वभाव के अनुसार क्या जान सकते हैं तथा उन्हें भविष्‍यकथन के लिए कैसे उपयोग कर सकते हैं । वैसे इस विषय में हमारा विडियो टुटोरियल है यु टूब पर मेरे चैनल का लिंक ये है - (Click Here Watch Video) यहाँ इस चैनल पर जाकर आप हर तरह के विडियो टुटोरियल देखकर ज्योतिष पढ़ सकते हैं ।। (टिप्स - अपने कचरेवाले को कुछ-न-कुछ प्रतिदिन खाने की सामग्री दें । ऐसा करने से आपका शनि ग्रह शुभ फलदाता बन जायेगा और आपके जीवन से दु:खों की बिदाई हो जाएगी {शानिर्दु:ख प्रदायक: = शनि प्राकृतिक रूप से दुःख दाता ग्रह है, लेकिन इस उपाय को करने से शनि शुभ फलदाता बन जाता है ।।} और आप सुखी हो जायेंगे ।।)

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।

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