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अरिष्ट अर्थात एक्सिडेन्ट एवं चोट आदि लगने के योग ।।



अरिष्ट अर्थात एक्सिडेन्ट एवं चोट आदि लगने के योग ।। Accident and injury Yoga in your Horoscope.


हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,


मित्रों, आज हम बात करेंगे, कि कोई भी ग्रह, जिस घर में बैठा हो, वह घर उसके शत्रु का हो तो वह क्या फल देता है, यह तो एक बात हुई, ।। साथ ही दूसरी बात यह है, कि वही घर यदि छठा घर हो या फिर त्रिकोण हो या फिर 5, 7, 9 या फिर अष्टम भाव में हो जो उसके शत्रु का घर हो तो कोई ग्रह क्या फल जातक को देता है ।। मित्रों, छठे भाव में, पांचवें, नवे, सातवें तथा आठवें जो शत्रु का घर हो उस घर में बैठे हुए ग्रह, अपनी दशा में जातक को शुभ या अशुभ किस प्रकार का फल देते हैं ।।

मित्रों, कोई भी ऐसा ग्रह जिसके शत्रु ग्रह की कोई राशि जो छठे, पांचवें, नवें, सातवें घर में बैठी हो और यह ग्रह अपने शत्रु के राशि में ही बैठा हुआ हो तो ऐसे ग्रह की दशा-अंतर्दशा में जातक के अंग और प्रत्यंग भंग होने के योग बनते हैं ।। अष्टम भाव में शत्रु के घर में बैठे हुए ग्रह की दशा हो तो जातक के मस्तक में चोट लगने के योग बनते हैं । नीचस्थ ग्रह की दशा में शत्रुओं का भय, अकारण विदेश भ्रमण, बंधन अर्थात जेल यात्रा का योग एवं अनेक प्रकार के रोगों से पीड़ा होना संभव होता है ।।

नीचस्थ ग्रह की दशा में राजा भी पराभव को प्राप्त करता है । शून्य बली ग्रहों की दशा अर्थात निर्बल ग्रह की दशा में लोग स्वप्न और चिंता के फल का भोग करते हैं । पंच महापुरुष योग में जो फल बतलाए गए हैं, वह सब उन-उन ग्रहों की दशा में ही जातक को प्राप्त होते हैं ।। शीर्षोदय राशिगत ग्रह दशा के आरंभ काल में, उभयोदयगत दशा के मध्य में, पृष्ठोदय राशि तथा नीच राशि के ग्रह. दशा के अंत में उपरोक्त बतलाए हुए अपने-अपने फल को देते हैं ।।

3, 5, 6, 7, 8, 11 ये छः राशियाँ शीर्षोदय होती हैं । शीर्षोदयी अर्थात्, पूर्वीय क्षितिज पर उदय के समय जिन राशियों का सिर वाला भाग पहले दृष्टिगोचर होता है ।।

मकर, वृषभ, धनु, कर्क और मेष - 1, 2, 4, 9, 10 ये पाँच राशियाँ पृष्ठोदयी होती हैं । पृष्ठोदयी अर्थात्, पूर्वीय क्षितिज पर उदय के समय इनका पृष्ठभाग पहले उदित होता है ।। मीन राशि उभयोदय कही गयी है, क्योंकि मीन राशि का स्वरुप दो मछलियों वाला है । ये दोनों मछलियाँ एक-दूसरे से विपरीत दिशा में अपना मुख रखे हुए हैं । इसीलिए, उदय के समय एक साथ सिर एवं पूंछ दिखने से इसे उभयोदय अर्थात् सिर एवं पूंछ से एक साथ उदित होने वाली कहा जाता है ।।

शीर्षोदय राशियाँ मूलतः शुभ फलदायी कही गयी हैं । परन्तु पृष्ठोदयी राशियों के बारे में ज्योतिष के जानकारों मे भ्रांतियां है । कोई इन राशियों का फल अशुभ कोई देर से कहता है ।।

मीन राशि सदैव मिश्रित या मध्यम फलद होती है । इसके अतिरिक्त, पृष्ठोदयी राशियाँ उत्तरार्द्ध में और शीर्षोदयी राशियाँ पूर्वार्ध में विशेष फलप्रद हैं ।। उभयोदय राशि मध्य में फलप्रद होती है । अर्थात्, पृष्ठोदय राशिस्थ ग्रह सम्पूर्ण दशा के अंत में, शीर्षोदय स्थित ग्रह आदि में उभयोदय मध्य में फलद होते हैं । प्रश्न विचार में, शीर्षोदय कार्यसाधक और पृष्ठोदय कार्यनाशक है ।।

मूल दशापति के साथ में रहने वाले ग्रह की अंतर्दशा आधा, दशापति से त्रिकोण में स्थित ग्रह तृतीयांश तथा दशापति से सप्तमस्थ ग्रह सप्तमांश और दशा स्वामी से चतुर्थ और अष्टम भाव में स्थित ग्रह की अंतर्दशा चतुर्थांश फल देती है ।।


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