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भगवान् की मूर्ति कैसी हो एवं पूजा कैसे करें ? ।।



भगवान् की मूर्ति कैसी हो एवं पूजा कैसे करें ? ।। Bhagwan Ki Murti Kaisi Ho And Pooja Kaise Karen.

हेलो फ्रेंड्सzzz…

मित्रों, आज हम जानेंगे कैसे करनी चाहिए हमें अपने घरो में भगवान् की पूजा । साथ ही किस दिसा में रखनी चाहिये हमें अपने घरो में मंदिर तथा कैसी होनी चाहिये भगवान् की मूर्तियाँ ? क्या सही तरीके से पूजा पाठ नही करने की वजह से ही आपको करना पड़ रहा है मुश्किलों का सामना या फिर गलत जगह पर मंदिर रखने की वजह से ही नही है आपके घरो में सुख और शांति ? ।। पूजा-पाठ एवं वैदिक एस्ट्रोलॉजी की और भी बहुत सारी जानकारियों के लिए आप हमारे YouTube के चैनल को सब्सक्राइब करें एवं हमारे विडियोस को लाइक तथा अपने दोस्तों और अपने परिवार के साथ शेयर करें । तरह-तरह की अन्य जानकारियों के लिए हमारे blog को विजिट करें जहाँ आपको तरह तरह के आर्टिकल्स मिलेंगे । और भी ज्यादा जानकारियों के लिए आप हमारे वेबसाइट पर भी विजिट करें ।।

मित्रों, आइये जानते हैं, कि कैसे करें अपने घरों में भगवान की पूजा ? क्योंकि हम सभी हिन्दुओं के घरों में पूजन के लिए छोटे-छोटे मंदिर बने होते ही है । जहाँ सभी लोग भगवान् की नियमित पूजा करते है । लेकिन हममें से अधिकाँशत: लोग पूजा सम्बन्धी छोटे-छोटे नियमों का पालन नहीं करते जिससे हमें पूजन का सम्पूर्ण फल प्राप्त नही होता है ।। आज हम आपको घर में पूजन सम्बन्धी कुछ ऐसे नियम बताएँगे जिससे आपको पूजन का सम्पूर्ण फल प्राप्त होगा और आपके घर में हमेशा शुख शांति बनी रहेगी । पहली बात अगर आप शिव की पूजा करते हैं और अपने घर में शिवलिंग रखते हैं अथवा रखना चाहते हैं तो शास्त्रों के अनुसार बताया गया है की यदि हम अपने घर के मंदिर में शिवलिंग रखना चाहते है तो शिवलिंग हमारे अंगूठे के आकर से बड़ा नहीं होना चाहिए ।।

मित्रों, क्योंकि शिवलिंग बहुत ही संवेदनशील होता है इसलिये घर के मंदिर में छोटा सा शिवलिंग ही रखना चाहिये । यही शुभ होता है तथा अन्य देवी देवताओ की मूर्तियाँ भी छोटे आकार की ही रखनी चाहिए । क्योंकि अधिक बड़ी मुर्तियों की पूजा बिना वैदिक मन्त्रों के नहीं होनी चाहिये । इसलिये बड़ी मूर्तियाँ मंदिरों के लिए ही अच्छी होती है इसलिये घर के छोटे-छोटे मंदिरों के लिए छोटी-छोटी मुर्तियाँ ही ठीक मानी गई है ।। दूसरी बात घर में पूजा करने वाले व्यक्ति का मुँह पश्चिम दिशा की ओर ही होनी चाहिये । यह अत्यन्त शुभ होता है इसलिये आपके पूजा स्थल का द्वार पूर्व दिशा की ओर होनी चहिये । यदि यह किसी कारण संभव न हो तो पूजा करते समय व्यक्ति के मुँह की दिशा पश्चिम में होगा तब भी श्रेष्ठ फल प्राप्त होता है ।।

तिसरी बात घर का मंदिर ऐसे स्थान पर होना चाहिए जहाँ दिन भर में कभी भी कुछ देर के लिए सूर्य की रोशनी अवश्य पहुँचे । जिन घरों में सूर्य की रोशनी और ताज़ी हवा आती रहती है उस घर में कई दोषों की अपने आप ही शांति हो जाती है ।। चौथी बात यदि घर में मंदिर है तो हर रोज सुबह और शाम पूजन करना आवश्यक होता है । पूजन के समय घंटी अवश्य बजाना चाहिए और साथ ही एक बार में पूरे घर में घूम कर भी घंटी बजानी चाहिए । ऐसा करने पर घंटी की आवाज से नकारात्मक शक्तियां नष्ट हो जाती है और सकारात्मकता बढ़ती है ।।

पाँचवी बात ध्यान देने योग्य है, कि पूजा में बासी फूल पत्ते कभी भी प्रयोग नहीं करना चाहिए तथा स्वच्छ और ताजा फुल एवं जल का ही उपयोग करना चाहिए । इस संबंध में यह बात ध्यान देने योग्य है, कि तुलसी के पत्ते और गंगाजल यह दोनों कभी बासी नहीं होते हैं ।। अतः इन का उपयोग कभी भी किया जा सकता है अत: बाकी शेष सामग्री ताजा ही उपयोग करना चाहिए । यदि कोई फूल सूंघा गया हो या खराब हो गया हो तो वो भगवान को समर्पित नहीं करना चाहिए ।।

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।।। नारायण नारायण ।।।

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