शनिदेव पर तेल चढ़ाने से क्या फायदा होता है ?।। Shanidev Ko tel Kyon Chadhate Hai.
हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,
मित्रों, इस विषय में कई प्रकार की प्राचीन कथाएं प्रचलित हैं । इन कथा में सर्वाधिक प्रचलित कथा का संबंध हनुमानजी से है । शास्त्रों के अनुसार रामायण काल में एक समय शनि को अपने बल और पराक्रम पर घमंड हो गया था ।।
उस समय में हनुमानजी के बल और सामर्थ्य की कीर्ति चारों दिशाओं में फैली हुई थी । जब शनिदेव को हनुमानजी के संबंध में जानकारी मिली तो शनिदेव बजरंग बली से युद्ध करने के लिए निकल पड़े ।।
एक शांत स्थान पर हनुमानजी अपने स्वामी श्रीराम की भक्ति में लीन बैठे थे । तभी वहां शनिदेव आ गए और उन्होंने बजरंग बली को युद्ध के ललकारा । युद्ध की ललकार सुनकर हनुमानजी ने शनिदेव को समझाने का प्रयास किया ।।
लेकिन शनिदेव नहीं माने और युद्ध के लिए ललकारने लगे । अंत में हनुमानजी भी युद्ध के लिए तैयार हो गए । दोनों के बीच घमासान युद्ध हुआ । हनुमानजी ने शनि को बुरी तरह परास्त कर दिया ।।
युद्ध में हनुमानजी द्वारा किए गए प्रहारों से शनिदेव के पूरे शरीर में भयंकर पीड़ा हो रही थी । तब इस पीड़ा को दूर करने के लिए हनुमानजी ने शनि को तेल लगाया । इस तेल को लगाते ही शनिदेव की समस्त पीड़ा दूर हो गई ।।
तभी से शनिदेव को तेल अर्पित करने की परंपरा प्रारंभ हुई । शनिदेव पर जो भी व्यक्ति तेल अर्पित करता है, उसके जीवन की समस्त परेशानियां दूर हो जाती हैं और धन का अभाव खत्म हो जाता है ।।
हनुमानजी की कृपा से शनि की पीड़ा शांत हुई थी, इसी वजह से आज भी शनि हनुमानजी के भक्तों पर विशेष कृपा बनाए रखते हैं । शनिदेव ने भी वचन दिया कि जो भी तेल अर्पित करेगा उसकी समस्त पीड़ा मैं दूर करूँगा और हनुमान जी के भक्तों को भी मैं पीड़ा नहीं पहुंचाऊंगा ।।

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मित्रों, इस विषय में कई प्रकार की प्राचीन कथाएं प्रचलित हैं । इन कथा में सर्वाधिक प्रचलित कथा का संबंध हनुमानजी से है । शास्त्रों के अनुसार रामायण काल में एक समय शनि को अपने बल और पराक्रम पर घमंड हो गया था ।।
उस समय में हनुमानजी के बल और सामर्थ्य की कीर्ति चारों दिशाओं में फैली हुई थी । जब शनिदेव को हनुमानजी के संबंध में जानकारी मिली तो शनिदेव बजरंग बली से युद्ध करने के लिए निकल पड़े ।।
एक शांत स्थान पर हनुमानजी अपने स्वामी श्रीराम की भक्ति में लीन बैठे थे । तभी वहां शनिदेव आ गए और उन्होंने बजरंग बली को युद्ध के ललकारा । युद्ध की ललकार सुनकर हनुमानजी ने शनिदेव को समझाने का प्रयास किया ।।
लेकिन शनिदेव नहीं माने और युद्ध के लिए ललकारने लगे । अंत में हनुमानजी भी युद्ध के लिए तैयार हो गए । दोनों के बीच घमासान युद्ध हुआ । हनुमानजी ने शनि को बुरी तरह परास्त कर दिया ।।
युद्ध में हनुमानजी द्वारा किए गए प्रहारों से शनिदेव के पूरे शरीर में भयंकर पीड़ा हो रही थी । तब इस पीड़ा को दूर करने के लिए हनुमानजी ने शनि को तेल लगाया । इस तेल को लगाते ही शनिदेव की समस्त पीड़ा दूर हो गई ।।
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