#राहु की अशुभता के शमन का उपाय।। Rahu Remedies for Positive Results.
मित्रों, वैदिक ज्योतिष में राहु को छाया ग्रह माना गया है। जब जन्मकुण्डली में राहु अशुभ भाव में स्थित हो, पाप ग्रहों से पीड़ित हो अथवा उसकी महादशा या अंतरदशा प्रतिकूल फल प्रदान कर रही हो, तब जीवन में मानसिक अशांति, भ्रम, भय, व्यर्थ के विवाद, न्यायालय संबंधी समस्याएँ, नशे की प्रवृत्ति, अपयश, आर्थिक अस्थिरता, शत्रु बाधा तथा अचानक आने वाले संकटों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे समय में शास्त्रों में अनेक प्रकार के उपाय बताए गए हैं, जिनके द्वारा राहु के अशुभ प्रभाव को शांत करने का प्रयास किया जाता है।।
#सामान्य एवं सरल उपाय।। Simple and easy remedies.
ये उपाय प्रत्येक श्रद्धालु व्यक्ति अपनी सामर्थ्य के अनुसार कर सकता है। प्रतिदिन अथवा प्रत्येक शनिवार को भगवान शिव का जलाभिषेक करें। "ॐ रां राहवे नमः॥" अथवा "ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः॥" इस मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जप करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ अथवा देवी दुर्गा की उपासना करें, क्योंकि देवी की कृपा से राहुजनित बाधाएँ शांत होती हैं। भगवान भैरव की उपासना करें तथा शनिवार अथवा रविवार को भैरव मंदिर में सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करें। प्रतिदिन अथवा शनिवार को "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जप करना भी राहु की पीड़ा में लाभकारी माना गया है। अपने आचरण में सत्य, संयम और सदाचार अपनाएँ, क्योंकि राहु भ्रम और छल का कारक माना गया है।।
#कम खर्च वाले (अल्प-व्ययी) उपाय।। Low-cost measures.
मित्रों, यदि कोई व्यक्ति अधिक व्यय करने में समर्थ न हो तो इन उपायों को कर सकता है जो विशेष लाभकारी माने गए हैं। शनिवार को काले तिल का दान करें। उड़द की काली दाल का दान निर्धन अथवा योग्य ब्राह्मण को दें। नीले अथवा काले वस्त्र का दान करें। नारियल को बहते जल में प्रवाहित करें। काले कुत्ते को तेल लगी रोटी अथवा मीठी रोटी खिलाएँ। कुष्ठ रोगियों, निर्धनों अथवा असहाय व्यक्तियों की यथाशक्ति सहायता करें। शनिवार को सरसों के तेल का दीपक पीपल अथवा भैरव मंदिर में जलाएँ। पक्षियों को प्रतिदिन अन्न तथा जल उपलब्ध कराएँ। नशा, असत्य भाषण, छल-कपट तथा अनैतिक कार्यों का पूर्ण रूपेण त्याग करें। इन उपायों में धन से अधिक श्रद्धा और नियमितता का महत्व बताया गया है।।
#विशेष एवं विस्तृत (खर्चीले) उपाय।। Special and extensive (costly) measures.
मित्रों,जब राहु अत्यधिक पीड़ादायक हो अथवा जीवन में गंभीर बाधाएँ उत्पन्न कर रहा हो, तब योग्य एवं विद्वान आचार्य के निर्देशन में निम्न उपाय किए जा सकते हैं। सर्वप्रथम राहु ग्रह के लिए शांति पूजा करवाए। जिसमें वैदिक विधि से राहु शांति का अनुष्ठान कराया जाता है। जिसमें राहु बीज मंत्र, नवग्रह पूजन, हवन तथा पूर्णाहुति का विधान होता है। दूसरा सम्पूर्ण नवग्रहों के लिए शांति यज्ञ करवायें। यदि कुण्डली में अनेक ग्रह पीड़ित हों, तब नवग्रह शांति यज्ञ अत्यंत लाभकारी माना गया है। इससे राहु सहित अन्य ग्रहों की शांति का भी प्रयत्न करवाया जाता है।।
महामृत्युंजय जपनभी एक प्रभावी उपाय माना जाता है। राहु से उत्पन्न भय, दुर्घटना, रोग अथवा मानसिक कष्ट की स्थिति में महामृत्युंजय मंत्र का सवा लाख जप करवाकर उसका उसी विधि से हवन (यज्ञ) करवाना चाहिये। अथवा रुद्राभिषेक भी करवाया जा सकता है। साथ ही दुर्गा सप्तशती अथवा चंडी पाठ भी करवाना चाहिये। इस उपाय से भी बहुत ही जल्द और प्रभावी परिणाम की प्राप्ति होती है।
मित्रों, राहु से उत्पन्न तांत्रिक बाधा, भय, शत्रु पीड़ा अथवा अदृश्य अवरोधों की शांति हेतु चंडी पाठ अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। कालभैरव उपासना भी एक प्रभावी उपाय होता है। राहु की प्रबल अशुभता में भगवान कालभैरव की नियमित पूजा, अष्टमी पूजन तथा भैरवाष्टक का पाठ भी शास्त्रसम्मत उपाय माना गया है।।
#गोमेद रत्न धारण।। Wearing the Hessonite Gemstone.
मित्रों, यदि जन्मकुण्डली के गहन परीक्षण के पश्चात राहु योगकारक सिद्ध हो तथा उसे बल प्रदान करना आवश्यक हो, तभी योग्य ज्योतिषाचार्य की सलाह से प्राकृतिक एवं दोषरहित गोमेद धारण किया जा सकता है। बिना परामर्श के गोमेद धारण करना उचित नहीं माना गया है। विद्वान ब्राह्मणों द्वारा राहु के बीज मंत्र जप करवाना चाहिये। विशेष अनुष्ठान के रूप में 18,000 अथवा शास्त्रानुसार निर्धारित संख्या में राहु के बीज मंत्र का जप एवं हवन कराया जाता है।।
#राहु की शांति के लिए दान का महत्व।। The Importance of Charity for Pacifying Rahu.
धर्मशास्त्रों में दान को ग्रहशांति का महत्वपूर्ण साधन माना गया है। राहु की शांति के लिए सामर्थ्य के अनुसार इन वस्तुओं का दान बताया गया है। काला तिल, उड़द की दाल, नीले अथवा काले वस्त्र, सरसों का तेल, नारियल, कंबल, लोहे के पात्र, सप्तधान्य, अन्न एवं गौसेवा हेतु अनुकूल वस्तुओं का दान करना चाहिये। ध्यान रखें कि दान सदैव योग्य पात्र को, निष्काम भाव से तथा अपनी सामर्थ्य के अनुसार ही करना चाहिए।।
#शास्त्रीय दृष्टि से एक महत्वपूर्ण सावधानी।। An important caution from a classical perspective.
मित्रों, यह ध्यान रखना चाहिए कि प्रत्येक अशुभ राहु को केवल उपायों से "समाप्त" नहीं किया जा सकता, बल्कि उसके अशुभता का शमन एवं उसको संतुलन किया जा सकता है। यदि राहु जन्मकुण्डली में योगकारक हो तो उसे बल देना आवश्यक होता है; और यदि वह घोर पापफलदायी हो तो उसकी शांति एवं उपासना का मार्ग अपनाया जाता है। अतः किसी भी बड़े अनुष्ठान, रत्नधारण अथवा विशेष उपाय से पूर्व विद्वान ज्योतिषाचार्य से जन्मकुण्डली का परीक्षण अवश्य कराना चाहिए।।
अंततः, शास्त्रों का सिद्धांत है कि "सत्कर्म, सत्य, संयम, ईश्वर-भक्ति, दान, जप और सेवा" ये ऐसे उपाय हैं जो केवल राहु ही नहीं, अपितु समस्त ग्रहों की अशुभता को भी शमन करने में सहायक माने गए हैं।।
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